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Bidadi Township Row: बिदादी टाउनशिप परियोजना पर सियासत तेज, CM शिवकुमार ने कुमारस्वामी को चर्चा के लिए बुलाया
Mon, 22 Jun 2026 11:18 PM IST
Pavan
पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: Pavan
Updated Mon, 22 Jun 2026 11:18 PM IST
सार
कर्नाटक में प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर विवाद गहरा गया है। सीएम डीके शिवकुमार ने एचडी कुमारस्वामी को 26 जून को चर्चा के लिए बुलाया, लेकिन उन्होंने बैठक 27 जून को बिदादी में किसानों की मौजूदगी में कराने की मांग की। कुमारस्वामी ने परियोजना का विरोध करते हुए सरकार पर किसानों की जमीन रियल एस्टेट हितों को सौंपने का आरोप लगाया।
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सीएम डीके शिवकुमार ने एचडी कुमारस्वामी को किया आमंत्रित
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कर्नाटक में प्रस्तावित ग्रेटर बंगलूरू इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी को 26 जून को विधान सौधा स्थित अपने कार्यालय में बैठक के लिए आमंत्रित किया है। यह बैठक बिदादी क्षेत्र में प्रस्तावित टाउनशिप परियोजना और इसके लिए भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। हालांकि कुमारस्वामी ने पहले से तय कार्यक्रमों का हवाला देते हुए 26 जून की जगह 27 जून को बैठक करने का सुझाव दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक विधान सौधा में नहीं, बल्कि बिदादी या बायरमंगला में आयोजित होनी चाहिए ताकि प्रभावित किसान, ग्रामीण और अन्य हितधारक भी इसमें शामिल हो सकें।
यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कंपनी में अपना पता अपडेट न करने वाले कर्मचारी को राहत नहीं, बहाली का आदेश खारिज
किसानों की भागीदारी पर जोर
कुमारस्वामी ने अपने जवाबी पत्र में कहा कि बिदादी हॉबली के आठ गांवों और हरोहल्ली तालुक के एक गांव के किसान इस परियोजना से प्रभावित होंगे। उनका दावा है कि परियोजना से किसानों, ग्रामीणों और स्थानीय कारोबारियों को भारी नुकसान हो सकता है। साथ ही क्षेत्र के पर्यावरणीय संसाधनों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि यदि बैठक प्रभावित क्षेत्र में आयोजित की जाती है और किसानों, कृषि मजदूरों, रेशम उत्पादन से जुड़ी महिलाओं, छोटे व्यापारियों तथा अन्य प्रभावित लोगों को शामिल किया जाता है, तो समस्या का बेहतर समाधान निकल सकता है।
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खुली बहस की चुनौती
इससे पहले सोमवार को कुमारस्वामी ने शिवकुमार को इस परियोजना पर खुली बहस की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जब चाहें बायरमंगला आकर किसानों के बीच चर्चा कर सकते हैं। कुमारस्वामी का दावा है कि 80 से 90 प्रतिशत स्थानीय किसान इस परियोजना के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के बाद 4,000 से अधिक किसानों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं, लेकिन सरकार ने अब तक उन पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।
सरकार पर गंभीर आरोप
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़ा काम सरकारी कार्यालयों के बजाय बंगलूरू के नागरभावी स्थित एक किराए के मकान से संचालित किया जा रहा है और इसमें कुछ 'माफिया तत्वों' की भूमिका है। उन्होंने कहा कि समय आने पर कई लोगों को जेल जाना पड़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनकर रियल एस्टेट डेवलपर्स को सौंपने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जो नेता पहले इस परियोजना का विरोध करते थे, वही अब इसका समर्थन कर रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं के पुराने रुख की याद दिलाई
कुमारस्वामी ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे तब बंगलूरू पर दबाव कम करने के लिए पांच नए टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें बिदादी भी शामिल था। लेकिन किसानों के विरोध के बाद उन्होंने परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान मुख्यमंत्री शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पहले इस परियोजना का विरोध किया था। अब उनका समर्थन करना विरोधाभासी है।
मंत्रिमंडल विस्तार पर भी साधा निशाना
कुमारस्वामी ने राज्य मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आगामी विस्तार में अधिकांश पद पेमेंट कोटा या वसूली सीटों के रूप में भरे जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया।
यह भी पढ़ें- BRICS NSA Meet: अजीत डोभाल और वांग यी ने की मुलाकात, भारत-चीन संबंधों को स्थिर बनाने पर जोर
क्या है जीबीआईटी परियोजना?
ग्रेटर बंगलूरू इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना का उद्देश्य बंगलूरू शहर पर बढ़ते जनसंख्या और बुनियादी ढांचे के दबाव को कम करना है। इसके लिए रामनगर जिले के बिदादी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव है। लेकिन स्थानीय किसान और कई ग्रामीण संगठन भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं और अपनी कृषि भूमि बचाने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि शिवकुमार और कुमारस्वामी के बीच प्रस्तावित बैठक कब और कहां होती है तथा इससे परियोजना को लेकर चल रहे विवाद का कोई समाधान निकलता है या नहीं।
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किसानों की भागीदारी पर जोर
कुमारस्वामी ने अपने जवाबी पत्र में कहा कि बिदादी हॉबली के आठ गांवों और हरोहल्ली तालुक के एक गांव के किसान इस परियोजना से प्रभावित होंगे। उनका दावा है कि परियोजना से किसानों, ग्रामीणों और स्थानीय कारोबारियों को भारी नुकसान हो सकता है। साथ ही क्षेत्र के पर्यावरणीय संसाधनों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि यदि बैठक प्रभावित क्षेत्र में आयोजित की जाती है और किसानों, कृषि मजदूरों, रेशम उत्पादन से जुड़ी महिलाओं, छोटे व्यापारियों तथा अन्य प्रभावित लोगों को शामिल किया जाता है, तो समस्या का बेहतर समाधान निकल सकता है।
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खुली बहस की चुनौती
इससे पहले सोमवार को कुमारस्वामी ने शिवकुमार को इस परियोजना पर खुली बहस की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जब चाहें बायरमंगला आकर किसानों के बीच चर्चा कर सकते हैं। कुमारस्वामी का दावा है कि 80 से 90 प्रतिशत स्थानीय किसान इस परियोजना के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के बाद 4,000 से अधिक किसानों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं, लेकिन सरकार ने अब तक उन पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।
सरकार पर गंभीर आरोप
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़ा काम सरकारी कार्यालयों के बजाय बंगलूरू के नागरभावी स्थित एक किराए के मकान से संचालित किया जा रहा है और इसमें कुछ 'माफिया तत्वों' की भूमिका है। उन्होंने कहा कि समय आने पर कई लोगों को जेल जाना पड़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनकर रियल एस्टेट डेवलपर्स को सौंपने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जो नेता पहले इस परियोजना का विरोध करते थे, वही अब इसका समर्थन कर रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं के पुराने रुख की याद दिलाई
कुमारस्वामी ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे तब बंगलूरू पर दबाव कम करने के लिए पांच नए टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें बिदादी भी शामिल था। लेकिन किसानों के विरोध के बाद उन्होंने परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान मुख्यमंत्री शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पहले इस परियोजना का विरोध किया था। अब उनका समर्थन करना विरोधाभासी है।
मंत्रिमंडल विस्तार पर भी साधा निशाना
कुमारस्वामी ने राज्य मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आगामी विस्तार में अधिकांश पद पेमेंट कोटा या वसूली सीटों के रूप में भरे जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया।
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क्या है जीबीआईटी परियोजना?
ग्रेटर बंगलूरू इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना का उद्देश्य बंगलूरू शहर पर बढ़ते जनसंख्या और बुनियादी ढांचे के दबाव को कम करना है। इसके लिए रामनगर जिले के बिदादी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव है। लेकिन स्थानीय किसान और कई ग्रामीण संगठन भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं और अपनी कृषि भूमि बचाने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि शिवकुमार और कुमारस्वामी के बीच प्रस्तावित बैठक कब और कहां होती है तथा इससे परियोजना को लेकर चल रहे विवाद का कोई समाधान निकलता है या नहीं।