Bhutan: भूटान के राजा का आठ दिवसीय भारत दौरा, कामाख्या मंदिर में की पूजा अर्चना
भूटान और चीन सीमा विवाद के बीच भूटानी राजा भारत आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वे असम और महाराष्ट्र का भी दौरा करेंगे।
विस्तार
भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक आज अपनी आठ दिवसीय यात्रा पर भारत आए हैं। इस दौरान वे असम की तीन दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को गुवाहाटी पहुंचे। यहां उन्होंने नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर में पूजा अर्चना की।
इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक का गुवाहाटी पहुंचने पर स्वागत किया गया। वे किंग 3-10 नवंबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यात्रा के दौरान वे पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्री और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उनसे मुलाकात करेंगे। भूटान और चीन सीमा विवाद के बीच भूटानी राजा भारत आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भूटानी राजा तीन से 10 नवंबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। भारत और भूटान के बीच मित्रता और सहयोग का रिश्ता है।
गुवाहाटी में भूटान नरेश सीधे कामाख्या मंदिर गए। यहां उन्होंने पारंपरिक बौद्ध वस्त्र पहने नरेश ने गर्भगृह में प्रार्थना की और मंदिर की परिक्रमा की। इसके अलावा देवी के सम्मान में मिट्टी के दीपक जलाए। उन्होंने मंदिर के पुजारियों को आश्वासन दिया कि वह भविष्य में अपने परिवार के साथ फिर से मंदिर आएंगे। अधिकारियों ने शाही आगंतुक को कामाख्या मंदिर की प्रतिकृति भेंट की।
#WATCH | Assam CM Himanta Biswa Sarma receives the King of Bhutan, Jigme Khesar Namgyel Wangchuck upon his arrival in Guwahati.
The King is on an official visit to India from 3-10 November. During the visit, he will meet PM Modi. EAM and senior officials of Govt of India… pic.twitter.com/PqfINvnoQu — ANI (@ANI) November 3, 2023
सीमा विवाद अहम
बता दें, पिछले सप्ताह भूटान के विदेश मंत्री टांडी दोरजी ने बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की थी। भूटान और चीन सीमा विवाद पर भारत की करीब से नजर है। जानकारों की मानें तो नई दिल्ली बीजिंग और थिंफू के बीच जारी बातचीत पर कड़ी नजर रख रहा है क्योंकि यह वार्ता डोकलाम ट्राई-जंक्शन के कारण भारत के लिए भी अहम हो सकती है।
यह है डोकलाम विवाद
बता दें, छह साल पहले डोकलाम में चीनी सैनिकों के अतिक्रमण को लेकर भारत-चीन के बीच तनाव काफी बढ़ गया था और लंबे समय तक भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने थे। दोनों देशों के बीच लंबी कूटनीतिक वार्ता के बाद डोकलाम में चीनी सैनिक पीछे हटे थे।