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Maharashtra: '2003 में मुझसे जबरन उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिलवाया गया', भुजबल ने शरद पवार पर साधा निशाना
Mon, 28 Aug 2023 09:16 PM IST
स्वप्निल शशांक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 28 Aug 2023 09:16 PM IST
सार
बीड में एक रैली को संबोधित करते हुए अजित गुट का हिस्सा भुजबल ने यह भी कहा कि 1990 के दशक में किसी ने भी शरद पवार का इस्तीफा नहीं मांगा था, जब तत्कालीन बॉम्बे (अब मुंबई) नागरिक निकाय आयुक्त जीआर खैरनार सहित कुछ लोगों ने उनके खिलाफ आरोप लगाए थे।
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छगन भुजबल और शरद पवार
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने पार्टी सुप्रीमो शरद पवार पर गंभीर आरोप लगाया है। कभी शरद पवार के विश्वासपात्र रहे भुजबल ने कहा कि राकांपा प्रमुख ने 2003 में तेलगी घोटाले के आरोपों के आधार पर उन्हें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिलवा दिया था, जबकि उन्होंने मामले में फर्जी स्टाम्प पेपर रैकेट के सरगना की गिरफ्तारी का आदेश दिया था।।
बीड में एक रैली को संबोधित करते हुए अजित गुट का हिस्सा भुजबल ने यह भी कहा कि 1990 के दशक में किसी ने भी शरद पवार का इस्तीफा नहीं मांगा था, जब तत्कालीन बॉम्बे (अब मुंबई) नागरिक निकाय आयुक्त जीआर खैरनार सहित कुछ लोगों ने उनके खिलाफ आरोप लगाए थे। दरअसल, शरद पवार मार्च 1993 से मार्च 1995 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। इस दौरान खैरनार ने उन पर कुछ आरोप लगाए थे।
भुजबल ने कहा कि 23 दिसंबर 2003 को आपने तेलगी घोटाले में उपमुख्यमंत्री पद से मेरा इस्तीफा ले लिया। मैं तब गृह मंत्री था। मैंने ही तेलगी को गिरफ्तार किया था। मैंने पुलिस से उसके खिलाफ मकोका लगाने के लिए कहा था और यह सुनिश्चित किया था कि कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन कुछ लोगों द्वारा मेरे खिलाफ लगाए गए महज आरोपों के आधार पर आपने मुझे फोन किया और मुझसे इस्तीफा देने के लिए कहा।
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भुजबल की टिप्पणी के बाद से कई पार्टी कार्यकर्ता और समर्थकों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। राकांपा (शरद पवार गुट) के कार्यकर्ताओं ने पुणे और ठाणे में प्रदर्शन किया। पुणे शहर राकांपा प्रमुख प्रशांत जगताप ने कहा कि अजित पवार को भुजबल को फटकार लगानी चाहिए और उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करना चाहिए।
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बीड में एक रैली को संबोधित करते हुए अजित गुट का हिस्सा भुजबल ने यह भी कहा कि 1990 के दशक में किसी ने भी शरद पवार का इस्तीफा नहीं मांगा था, जब तत्कालीन बॉम्बे (अब मुंबई) नागरिक निकाय आयुक्त जीआर खैरनार सहित कुछ लोगों ने उनके खिलाफ आरोप लगाए थे। दरअसल, शरद पवार मार्च 1993 से मार्च 1995 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। इस दौरान खैरनार ने उन पर कुछ आरोप लगाए थे।
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भुजबल ने कहा कि 23 दिसंबर 2003 को आपने तेलगी घोटाले में उपमुख्यमंत्री पद से मेरा इस्तीफा ले लिया। मैं तब गृह मंत्री था। मैंने ही तेलगी को गिरफ्तार किया था। मैंने पुलिस से उसके खिलाफ मकोका लगाने के लिए कहा था और यह सुनिश्चित किया था कि कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन कुछ लोगों द्वारा मेरे खिलाफ लगाए गए महज आरोपों के आधार पर आपने मुझे फोन किया और मुझसे इस्तीफा देने के लिए कहा।
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भुजबल की टिप्पणी के बाद से कई पार्टी कार्यकर्ता और समर्थकों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। राकांपा (शरद पवार गुट) के कार्यकर्ताओं ने पुणे और ठाणे में प्रदर्शन किया। पुणे शहर राकांपा प्रमुख प्रशांत जगताप ने कहा कि अजित पवार को भुजबल को फटकार लगानी चाहिए और उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करना चाहिए।