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Covid: वैक्सीन के दुष्प्रभावों में बाल झड़ना और माहवारी अनियमितता जैसी परेशानी, रिकवरी के बाद टीके से अधिक असर

Thu, 16 May 2024 01:06 AM IST
दीपक कुमार शर्मा परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 16 May 2024 01:06 AM IST
सार

कोरोना टीकाकरण के एक साल बाद भी किशोरों में बाल झड़ना, त्वचा रोग, सिरदर्द और माहवारी असमानता की परेशानी देखने को मिल रही है। जिन लोगों ने संक्रमण से रिकवर होने के बाद खुराक ली है, उनमें जोखिम सबसे ज्यादा है। यह जानकारी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक चिकित्सा अध्ययन से पता चली है।

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BHU study reveals adverse effects of corona infection, hair fall, menstrual irregularities are more
वैक्सीन (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : istock

विस्तार

कोरोना का टीका लेने वालों में अब तक प्रतिकूल प्रभाव मिल रहे हैं। भले ही इनकी संख्या काफी सीमित है, लेकिन जिन लोगों ने संक्रमण से रिकवर होने के बाद खुराक ली है उनमें जोखिम सबसे ज्यादा है। यह जानकारी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक चिकित्सा अध्ययन में सामने आई है, जिसमें यह भी पता चला है कि किशोरों में बाल झड़ना, त्वचा रोग, सिरदर्द और माहवारी असमानता की परेशानी देखने को मिल रही है। 

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टीकाकरण के एक साल बाद भी लोगों पर क्या प्रभाव है? यह जानने के लिए बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने जनवरी 2022 से अगस्त 2023 के बीच 635 किशोर और 291 वयस्कों पर अध्ययन किया, जिसे मेडिकल जर्नल स्प्रिंगर लिंक में प्रकाशित किया है। भारत के स्वदेशी टीका कोवाक्सिन की खुराक लेने वालों पर यह अध्ययन हुआ, जिसमें 304 (47.9%) किशोर और 124 (42.6%) वयस्कों ने यह स्वीकार किया कि टीका लेने के बाद उन्हें ऊपरी श्वसन पथ के वायरल संक्रमण हुआ। किशोरों में सबसे आम प्रतिकूल प्रभाव बाल झड़ने या त्वचा रोग (10.5%), सामान्य विकार (10.2%) और तंत्रिका तंत्र विकार (4.7%) पाए गए। जबकि, वयस्कों में सामान्य विकार (8.9%), मस्कुलोस्केलेटल विकार (5.8%) और तंत्रिका तंत्र विकार (5.5%) सबसे आम प्रभाव हैं। 

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पुरानी बीमारियों से ग्रस्त लोगों में ज्यादा जोखिम... 
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अध्ययन टीका सुरक्षा से जुड़ा है जिसका मकसद प्रतिकूल प्रभावों का सामना करने वालों में जागरूकता लाना है। अध्ययन में इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि महिलाओं और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों में प्रतिकूल प्रभाव की आशंका सामान्य लोगों की तुलना में 1.6 और 2.7 गुना अधिक है। इसी तरह टीकाकरण के बाद जिन्हें टाइफाइड हुआ, उनमें यह आशंका 3.2 गुना अधिक है। 

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माहवारी की परेशानी पांच फीसदी को अभी तक कहा जा रहा था कि टीकाकरण के बाद माहवारी संबंधी परेशानियां महिलाओं में हो सकती हैं, लेकिन यह इस अध्ययन में साबित भी हुआ है। करीब पांच फीसदी महिलाओं ने टीका लेने के बाद से अब तक मासिक धर्म संबंधी असमान्यताओं की जानकारी दी है। जबकि, 2.7% महिलाओं ने नेत्र संबंधी असमानता की पुष्टि की है। 

खून में थक्का जमने की जानकारी पहले से 
हाल ही में एस्ट्राजेनेका कंपनी के बयान से कोरोना टीका पर सवाल खड़े हुए। ऐसे में शोधकर्ताओं का कहना है कि जब टीकों का परीक्षण किया जा रहा था, उस दौरान रक्त में थक्का जमने जिसे थ्रोम्बोसिस कहते हैं, जानकारी हमारे पास थी। चूंकि, टीका का परीक्षण स्वस्थ लोगों पर किया गया। हमें यह नहीं पता कि जिन्हें मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी परेशानियां हैं, उनमें इसका क्या प्रभाव है? यह जानने के लिए अलग अलग अध्ययन हुए हैं। थ्रोम्बोसिस की वजह से हार्ट अटैक आने की आशंका शुरुआत हो सकती है जिसे चिकित्सा तौर पर प्रमाणित कर पाना बहुत मुश्किल है लेकिन अन्य प्रभाव एक साल बाद भी लोगों में दिखाई दे रहे हैं, जिसकी पहचान होना बहुत जरूरी है। 

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