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राष्ट्रद्रोह पर बिफरे अंजान, कहा- काला कानून खत्म करे सरकार, करे गिरफ्तार लोगों की रिहाई
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Updated Fri, 31 Aug 2018 09:49 PM IST
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सीपीआई नेता अतुल कुमार अंजान ने लॉ कमीशन की 'राष्ट्रद्रोह' पर टिप्पणी और नक्सली हिंसा के समर्थन में गिरफ्तार लोगों को नजरबंदी करने के दौरान की गई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बताया है।
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उन्होंने कहा कि सरकार में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जरा भी सम्मान बचा हो तो उसे भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोप में गिरफ्तार पांचों लोगों को तुरंत रिहा करना चाहिए और राष्ट्रद्रोह के नाम पर बने इस 'काले कानून' को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए।
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अंजान ने कहा कि जो भी राजनीतिक दल सत्ता में रहता है, वह अपने विरोधियों की आवाज दबाने के लिए हमेशा इस धारा का दुरुपयोग करता है।
भीमा-कोरेगांव हिंसा में गिरफ्तार गौतम नवलखा को इसके पूर्व कांग्रेस सरकार ने भी इसी तरह गिरफ्तार किया था, लेकिन अदालत में उनके ऊपर कोई आरोप ठहर नहीं पाया। ऐसा ही इस बार भी होगा। लेकिन सरकार इसके बाद भी इस कानून का दुरुपयोग करने से बाज नहीं आ रही है।
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उन्होंने कहा कि इसके पूर्व छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार ने भी डॉ. सेन को गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें दो साल तक जेल में रखा गया। लेकिन वे भी सुप्रीम कोर्ट से बेबाक बरी साबित हुए। आखिर सरकारें अपनी मनमर्जी से किसी को भी इस कानून की आड़ में कब तक जेल में डालती रहेंगी।
सीपीआई नेता ने कहा कि पांचों लोगों की गिरफ्तारी के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असहमति लोकतंत्र का सेफ्टी वाल्व होता है। अगर इसे दबाया गया तो प्रेशर कुकर फट जाएगा। इसी तरह लॉ कमीशन ने भी कहा है कि राष्ट्र से असहमति रखना या उसकी आलोचना करना राष्ट्रद्रोह नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि अगर हमारे देश की अदालतें और कानून की समझ रखने वाले लोग बार-बार यह बात कह रहे हैं तो सरकार को यह बात क्यों नहीं समझ आ रही है।