Bharatpol: दूसरे मुल्कों से जल्द भारत आएंगे वांछित; इंटरपोल में CBI के 3 अफसर, 2024 में भेजे गए 170 नोटिस
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
ऐसे व्यक्ति, जो अपराध की वारदात को अंजाम देकर दूसरे मुल्कों में छिप जाते हैं, अब ज्यादा दिन तक बच नहीं सकेंगे। उन्हें भारत लाने के लिए त्वरित गति से कार्रवाई होगी। इसके लिए सीबीआई ने 'भारतपोल' पोर्टल शुरु किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को इस पोर्टल का शुभारंभ किया। किसी आरोपी को लेकर इंटरपोल से बातचीत करना, उसके खिलाफ रेड कॉर्नर, नीला या किसी दूसरे रंग का नोटिस जारी कराना और आरोपी का प्रत्यर्पण आदि, इस प्रक्रिया को तेज गति से पूरा किया जाएगा। राज्यों की पुलिस और सीबीआई के बीच परंपरागत फाइलों या पत्रों के जरिए होने वाला पत्राचार बंद हो जाएगा। अब 'भारतपोल' पोर्टल पर ही सभी तरह की गतिविधियां संचालित होंगी। दूसरे देशों में छिपे आरोपियों के जल्द प्रत्यर्पण के लिए सीबीआई ने स्थायी तौर पर 'इंटरपोल' में अपने तीन अधिकारियों को तैनात कर दिया है। इसमें से दो अधिकारी इंटरपोल के फांस स्थित हेडक्वार्टर में और एक अधिकारी सिंगापुर में रहेगा।
सीबीआई जो कि भारत में इंटरपोल की नोडल एजेंसी है, उसने पहली बार अपने तीन अधिकारियों को इंटरपोल के साथ काम करने के लिए विदेश भेजा है। ये अधिकारी सीबीआई और इंटरपोल के बीच समन्वय का कार्य करेंगे। सीबीआई के प्रयासों से इंटरपोल द्वारा जिन लोगों के खिलाफ नोटिस जारी किए जाते हैं, उन पर त्वरित गति से कार्रवाई के लिए ये अधिकारी मदद करेंगे। पिछले साल सीबीआई ने लगभग 170 इंटरपोल नोटिस जारी कराए हैं। इन नोटिसों को जारी करने के लिए विभिन्न जांच एजेंसियों और पुलिस द्वारा आग्रह किया गया था। सभी नोटिसों का गेटवे सीबीआई रही है।
इनमें से 110 रेड कॉर्नर नोटिस हैं और बाकी ब्लू कॉर्नर व अलग-अलग रंग वाले कोड के नोटिस हैं। पिछले साल 30 भगोड़ों को इंटरपोल की मदद से बतौर प्रत्यर्पण, भारत लाया गया है। इनमें से एक बड़ी संख्या यूएई की रही है। कनाडा से कोई भी प्रत्यर्पण नहीं हुआ है। साल 2023 में 26 आरोपियों को भारत लाया गया था। तीन वर्षों में हुए कुल प्रत्यर्पण की बात करें तो यह संख्या लगभग 100 रही है। पिछले 20 वर्षों की बात करें तो अभी 120 भगोड़ों को भारत लाने में सफलता हासिल हुई है।
भारतपोल के जरिए अब तेजी के साथ इंटरपोल तक सूचना पहुंचाई जाएगी। अगर इंटरपोल से कोई अलर्ट मिलता है तो उसे भी सीधे राज्यों की पुलिस को अपडेट कराया जाएगा। अभी तक राज्य पुलिस को कोई नोटिस जारी कराना होता तो उसके लिए लंबी प्रक्रिया रहती है। राज्य पुलिस द्वारा नोटिस जारी कराने के लिए जो मसौदा भेजा जाता है, उसमें कई तरह की गलतियां रह जाती हैं। सीबीआई द्वारा उसे ठीक करने के लिए दोबारा से संबंधित राज्य को फाइल भेजी जाती है। इस प्रक्रिया में कई बार पांच छह माह लग जाते हैं। राज्यों की पुलिस को यह संपूर्ण जानकारी नहीं होती कि इंटरपोल नोटिस जारी कराने के लिए किस तरह की भाषा और शब्द इस्तेमाल किए जाएं। इसके चलते उस फाइल में दोबारा से करेक्शन किया जाता था। अब भारतपोल के जरिए ये सब दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।
राज्यों की पुलिस को भारतपोल पोर्टल की ट्रेनिंग दी जाएगी। जिले के एसपी को इंटरपोल नोटिस जारी कराना है तो वह अपने राज्य के आईएलओ यानी 'इंटरपोल लाइजनिंग अफसर' के पास फाइल भेजता है। वहां से वह फाइल सीबीआई के पास पहुंचती है। अब नई व्यवस्था को लेकर आईएलओ और जिलों के पुलिस कप्तानों को डिजिटल तरीके से ट्रेनिंग दी जाएगी।
इतना ही नहीं, इस डिजिटल पोर्टल पर राज्यों की पुलिस के अलावा केंद्रीय एजेंसियों को भी इंटरपोल कलर कोडिंग नोटिस की ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, भारतपोल के जरिए राज्यों की पुलिस और अन्य केंद्रीय कानून लागू करने वाली एजेंसियों को इंटरपोल के साथ सूचना साझा करने की सुविधा मिलेगी। इंटरपोल से सूचना मांगने में आसानी होगी और जल्द से जल्द प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा जा सकेगा। इंटरपोल चैनलों के जरिए 195 देशों से आपराधिक मामलों और विदेश में जांच के लिए भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को त्वरित गति से अंतरराष्ट्रीय मदद की सुविधा प्रदान होगी।