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कोरोना वैक्सीन: कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील, कहा- क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों को नहीं कर सकते हैं सार्वजनिक

Tue, 22 Mar 2022 08:58 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 22 Mar 2022 08:58 PM IST
सार

वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक लिमिटेड और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कोविड-19 टीकों के क्लीनिकल ट्रायल  पर आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

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bharat biotech and serum institute of india says in Supreme Court clinical trial data cannot be made public domain
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक लिमिटेड और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कोविड-19 टीकों के क्लीनिकल ट्रायल  पर आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इस तरह के डेटा तक केवल दवा नियामकों की पहुंच होनी चाहिए।
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टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के पूर्व सदस्य डॉ जैकब पुलियेल द्वारा दायर जनहित याचिका का विरोध करते हुए वैक्सीन कंपनियों ने कहा कि विनियमों के तहत उन्हें भारत के औषधि महानियंत्रक को क्लीनिकल परीक्षणों और प्रतिकूल प्रभावों पर सभी प्रासंगिक डेटा प्रस्तुत करने की आवश्यकता है और उन्होंने ऐसा किया है।
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भारत बायोटेक की ओर से वरिष्ठ वकील गुरु कृष्णकुमार ने जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को प्राथमिक डेटा का खुलासा करने का कोई कानूनी आदेश नहीं है। नियामक को पहले से ही इस तरह के डेटा दे दिए गए हैं ताकि डेटा का मूल्यांकन किया जा सके।
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कुमार ने कहा कि याचिकाकर्ता आज संशोधित डेटा मांग रहे हैं, कल वह और ब्योरा मांगना शुरू करेंगे। इसका कोई अंत नहीं होगा। इसके अलावा, याचिकाकर्ता द्वारा संदर्भित डब्ल्यूएचओ दिशानिर्देश प्राथमिक डेटा के खुलासे को अनिवार्य नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि कोवैक्सिन की प्रभावकारिता समय बीतने के साथ स्थापित हो गई है, जिसे दुनिया में सबसे सुरक्षित के रूप में पहचाना जाता है। इसलिए याचिका का आधार सही नहीं है। हमारे परीक्षण चल रहे हैं और  सहमति ली गई है।

भारत बायोटेक ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने अपनी वेबसाइट सहित सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रतिष्ठित पीयर रिव्यू जर्नल्स में अपने कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सिन के  क्लीनिकल परीक्षणों के निष्कर्षों को बड़े पैमाने पर प्रकाशित किया है। कंपनी ने कहा है कि कोवैक्सिन ने सभी आवश्यक क्लीनिकल ट्रायल किए हैं और चरण-तीन प्रभावकारिता परीक्षणों में 130 पुष्ट मामलों के मूल्यांकन के माध्यम से खुलासा हुआ है कि कोविड -19 लक्षणों के खिलाफ वैक्सीन 77.8 फीसदी कारगर है। कोविड-19 रोग के गंभीर लक्षणों के खिलाफ इसकी प्रभावकारिता 93.4 फीसदी दिखाई गई है। प्रभावकारिता डेटा एसिमटोमैटिक कोविड -19 के खिलाफ 63.6 फीसदी सुरक्षा प्रदर्शित करता है।

कंपनी का कहना है कि याचिकाकर्ता का प्रयास न केवल मान-हानिकारक है बल्कि उसमें की गई निराधार दलीलों से वर्तमान वैश्विक महामारी के दौरान उन्माद और दहशत पैदा करने और वैक्सीन के प्रति हिचकिचाहट को बढ़ावा देने की आशंका है।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के वकील ने भी आंकड़ों के खुलासे करने की याचिकाकर्ता की मांग का विरोध किया। वकील ने कहा कि सैद्धांतिक रूप में वे डेटा नहीं मांग सकते। मेरा डेटा नियामक के पास है। यही वह जगह है जहां इसे होना चाहिए।


वहीं तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश ने अपने उन सरकारी आदेशों को सही ठहराया है जिनमें कुछ सार्वजनिक उपयोगिताओं का लाभ उठाने और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचने के लिए टीकाकरण अनिवार्य किया गया है। उनका कहना था कि व्यापक जनहित में यह निर्णय लिया गया है।

 
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