भारत बंद का पूरे देश में मिला-जुला असर, कई व्यापारी-ट्रांसपोर्ट संगठनों ने नहीं किया समर्थन
- जीएसटी कानूनों के विरोध में कैट द्वारा बुलाया गया भारत बंद कुछ जगहों पर सीमित असर डाल पाया, अनेक व्यापारिक और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बंद से अलग रहने के कारण व्यापक असर नहीं
- दिल्ली में बंद का कोई असर नहीं, व्यापारिक प्रतिष्ठान खुलेंगे, सड़कों पर चहल-पहल
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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) कानूनों और पेट्रोल (Petrol) की बढ़ती कीमतों के विरोध में कैट (CAIT) का शुक्रवार को बुलाया गया भारत बंद (Bharat Bnad) का पूरे देश में मिलाजुला असर हुआ है। व्यापारी संगठन कैट ने पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र में भारत बंद को सफल बताया है। अन्य राज्यों में इसका सीमित असर हुआ है। देश की राजधानी दिल्ली में भारत बंद का कोई असर नहीं हुआ है। यहां पूरे दिन ज्यादातर व्यापारिक संस्थान खुले रहे। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी सामान्य बनी रही। माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी समर्थित व्यापारियों, अनेक व्यापारिक संगठनों और ट्रांसपोर्ट संस्थाओं के बंद से अलग रहने से भारत बंद का व्यापक असर नहीं हो पाया।
कब तक रखेंगे बंद
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) और भारतीय व्यापार मंडल जैसे अनेक व्यापारिक संगठनों ने भारत बंद का समर्थन नहीं किया था। इस कारण इन संगठनों से जुड़े व्यापारियों ने शुक्रवार के दिन भी पूरा कारोबार किया। भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री वीके बंसल ने अमर उजाला से कहा कि बाजार में सुस्ती के कारण लंबे समय से व्यापारी दबाव में हैं। कोरोना के कारण एक साल से ज्यादा समय से दुकानें ठप रही हैं। ऐसे में व्यापारी भारी घाटे में हैं और इससे ज्यादा नुकसान सहने की स्थिति में नहीं हैं। इसके अलावा भारत बंद का आयोजन करने के पहले उनसे कोई बातचीत भी नहीं की गई। यही कारण रहा कि आज भारत बंद पूरी तरह असफल रहा है और पूरे देश में पांच फीसदी व्यापारी भी इसके साथ नहीं रहे।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री से जुड़े 240 व्यापारिक संगठनों ने अपनी दुकानदारी तो जारी रखी, लेकिन काली पट्टी बांधकर GST के प्रति अपना गुस्सा जताया। संगठन ने कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी किया। वीके बंसल ने कहा कि वे भी जीएसटी कानूनों से परेशान हैं और 22 फरवरी को देश के 200 जिलों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस पर अपना विरोध भी जता चुके हैं।
23 मार्च को देश के 400 जिलों में व्यापारी अपने जिले के जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस पर अपना विरोध जताएंगे और GST वापस लेने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत बंद इस समस्या का इलाज नहीं है। इसका रास्ता सरकार के साथ बातचीत करके ही निकाला जाएगा।
इस कारण सफल नहीं रहा भारत बंद
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के प्रवक्ता राजेंद्र कपूर ने अमर उजाला से कहा कि उनका संगठन भारत बंद के साथ नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण यह रहा है कि भारत बंद बुलाने के पहले सभी संगठनों से बातचीत नहीं की गई। संगठन की राज्य इकाइयों से भी बंद के बारे में कोई राय नहीं ली गई। यही कारण है कि वे जीएसटी कानूनों के विरोध में होने के बावजूद भारत बंद के साथ नहीं रहे।
केंद्र ने सुनी ट्रांसपोर्टरों की बात
राजेंद्र कपूर के मुताबिक, जीएसटी के अनेक कानूनों से ट्रांसपोर्टरों को भारी परेशानी होती है। जैसे किराने के सामानों की बहुत थोड़ी दूरी की यात्रा होने पर भी उन्हें थकाऊ कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा भारी मात्रा में सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के दौरान एक-दो छोटी चूक के कारण भी पूरे सामानों की आवाजाही पर रोक लगा दी जाती है।
ट्रकों को खड़ा कर देने से उनका प्रतिदिन का पांच से पचीस हजार रुपये प्रति ट्रक प्रतिदिन का नुकसान होता है। इससे व्यापारियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर के साथ मुलाकात कर उन्होंने इन मुद्दों पर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं और इन दोनों ही मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच इनका विकल्प खोजने पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार केंद्र के साथ सहमति बनाकर वे कानूनों की खामियों को दूर करना चाहते हैं।