बंगाल हिंसा: एनएचआरसी ने हाईकोर्ट में पेश की रिपोर्ट, राज्य में कानून का शासन नहीं, 'शासक' का कानून
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विस्तार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा पर अपनी रिपोर्ट कलकत्ता उच्च न्यायालय की पांच-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष प्रस्तुत की। इसमें कहा गया है कि राज्य में हिंसक घटनाओं में पीड़ितों की दुर्दशा के प्रति राज्य सरकार की भयावह उदासीनता है, राज्य में कानून का शासन नहीं चलता बल्कि शासक का कानून चलता है। हिंसा के मामलों की जांच राज्य से बाहर या सीबीआई से कराई जाना चाहिए।
आयोग ने कहा है कि यह मुख्य विपक्षी दल के समर्थकों के खिलाफ सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों द्वारा की गई प्रतिशोधात्मक हिंसा थी। इसके परिणामस्वरूप हजारों लोगों के जीवन और आजीविका में बाधा उत्पन्न की गई और उनका आर्थिक रूप से गला घोंट दिया गया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट 13 जुलाई को पेश की।
NHRC submits its report on alleged post-poll violence in West Bengal before a five-judge bench of Calcutta High Court; says, "The spatio-temporal expanse of violent incidents in West Bengal reflects appalling apathy of the state govt towards the plight of victims". pic.twitter.com/c89YzcG66X
— ANI (@ANI) July 15, 2021
रिपोर्ट की मुख्य बातें
- बंगाल चुनाव बाद हिंसा की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। हत्या व दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों की जांच होनी चाहिए।
- बंगाल में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा ये दिखाती है कि पीड़ितों की दुर्दशा को लेकर राज्य की सरकार ने भयानक तरीके से उदासीनता दिखाई है।
- हिंसा के मामलों से जाहिर होता है कि ये सत्ताधारी पार्टी के समर्थन से हुई है।
- ये उन लोगों से बदला लेने के लिए की गई, जिन्होंने चुनाव के दौरान दूसरी पार्टी को समर्थन दिया।
- राज्य सरकार के कुछ अंग और अधिकारी हिंसा की इन घटनाओं में मूक दर्शक बने रहे और कुछ इन हिंसक घटनाओं में खुद शामिल रहे हैं।
आयोग की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अच्छी तरह जानते हैं कि यूपी में कानून का राज नहीं है। ऐसी हालत में वहां पर कितने आयोग भेजे गए? हाथरस से लेकर उन्नाव तक कई घटनाएं हो चुकी हैं। हालत ये है कि पत्रकारों को भी नहीं बख्शा गया, लेकिन उन्होंने बंगाल को बदनाम किया।
आयोग पर लगाया रिपोर्ट लीक करने का आरोप
ममता बनर्जी ने बंगला में चुनाव बाद कथित हिंसा संबंधी अपनी रिपोर्ट मीडिया में लीक करने को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की बृहस्पतिवार को निंदा की। उन्होंने बंगाल सरकार के विचार जाने बिना एनएचआरसी के निष्कर्ष पर पहुंचने को लेकर हैरानी जताई। उन्होंने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा अब हमारे राज्य की छवि खराब करने और राजनीतिक बदला लेने के लिए निष्पक्ष एजेंसियों का सहारा ले रही है। एनएचआरसी को इसका सम्मान करना चाहिए था। ममता बनर्जी ने कहा कि यदि उन्हें समय दे दिया गया, तो वह अगले सप्ताह दिल्ली के अपने दौरे में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मिलना चाहेंगी।
ममता बताएं, उन्हें हमारी रिपोर्ट का कैसे पता चला : राशीद
रिपोर्ट लीक करने के ममता बनर्जी के आरोप पर पलटवार करते हुए मानवाधिकार आयोग के तथ्यान्वेषी दल के सदस्य अतिफ राशीद ने कहा कि मुख्यमंत्री बताएं कि लीक रिपोर्ट वहीं क्यों है, जो कि कलकत्ता हाईकोर्ट में पेश की गई है? सीएम यह भी बताए कि उन्हें हमारी गोपनीय रिपोर्ट के बारे में कैसे पता चला?
रिपोर्ट लीक होने का सवाल नहीं : आयोगShe needs to answer how the leaked report is the same submitted to Calcutta High Court and how come she knows about our confidential report: NHRC fact-finding team member Atif Rasheed on West Bengal CM Mamata Banerjee's allegations that the committee leaked its report pic.twitter.com/tDr08j10W5
— ANI (@ANI) July 15, 2021
इस बीच मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट लीक होने के आरोप को आधारहीन व तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। आयोग ने कहा कि जब रिपोर्ट संबंधित पक्षों के पास पहले से मौजूद है तो आयोग के स्तर से इसके लीक होने का सवाल ही नहीं है।