ED: पश्चिम बंगाल में यूं मिली अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी, दोबारा छपी ओएमआर शीट; रिश्वत में बंटी नौकरियां
पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरियों के लिए अयोग्य लोगों को नियुक्त किया गया, जबकि योग्य उम्मीदवार इंतजार करते रह गए। ओएमआर शीट की रातोंरात छपाई बदलकर नंबर बढ़ाए गए। मंत्री सुजीत बोस के करीबी और रिश्वत देने वाले चुन लिए गए। ईडी ने मंत्री के दफ्तर समेत 13 ठिकानों पर छापे मारे और 45 लाख की नकदी जब्त की।
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पश्चिम बंगाल में अयोग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी दे दी गई और योग्य प्रत्याशी नियुक्ति पत्र मिलने की राह देखते रह गए। मंत्री, दूसरे नेता और अधिकारी, ये सब मिले हुए थे। इन्होंने अपने मंसूबे कामयाब बनाने के लिए उस फर्म मालिक को ओएमआर सीट की छपाई का टेंडर दिया, जो इनके इशारे पर कुछ भी कर सकता था। फर्म मालिक ने किया भी। रातोंरात ओएमआर सीट बदल दी गई। यानी उनकी नई छपाई हो गई। उसके बाद जिन अयोग्य लोगों का चयन किया जाना था, उनके नंबर फुल आ गए। दो तरह के लोगों का चयन किया गया। एक, जो अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस के करीबी थे और दूसरे, जिन्होंने किसी भी तरह से नौकरी के लिए पैसा दिया था।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने नगर पालिका भर्ती घोटाले में 10 अक्तूबर को बड़ी कार्रवाई की है। कोलकाता और उसके आसपास 13 स्थानों पर छापेमारी की गई। पश्चिम बंगाल के विधायक और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस का कार्यालय और उनकी अन्य फर्मों सहित कई अन्य परिसरों की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान संपत्ति के दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और 45 लाख रुपये की अघोषित नकदी सहित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए।
बता दें कि ईडी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। यहां पर ये उल्लेख करना उचित है कि ईडी ने सौमेन नंदी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य के मामले में 2022 के सीएएन 1 के साथ 2022 के डब्ल्यूपीए 9979 में 2023 के सीएएन 2 के रूप में एक आवेदन कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष दायर किया था। उसमें पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में फैले नगर पालिकाओं में विभिन्न पदों की भर्ती में की गई अवैधताओं से संबंधित अपने निष्कर्षों पर एक स्थिति रिपोर्ट रखी गई थी।
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2023 में ली गई थी अयान सिल और इससे जुड़े विभिन्न परिसरों की तलाशी
इससे पहले प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी द्वारा जांच के दौरान, 2023 में अयान सिल और अन्य से जुड़े विभिन्न परिसरों में तलाशी ली गई थी। तलाशी के दौरान, अयान सिल के कब्जे से डिजिटल साक्ष्य के साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। उन्हें जब्त कर लिया गया। आपत्तिजनक दस्तावेजों की जांच से पता चला था कि भर्ती घोटाला, केवल शिक्षकों की भर्ती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न नगर पालिकाओं [कांचरापाड़ा, न्यू बैरकपुर, कमरहाटी, टीटागढ़, बारानगर, हालिसहर, दक्षिण दमदम (एन), दमदम आदि] तक फैला हुआ है। मजदूरों, सफाई कर्मचारियों, क्लर्कों, चपरासी, एम्बुलेंस परिचारकों, सहायक मिस्त्रियों, पंप ऑपरेटरों, हेल्परों, स्वच्छता सहायकों और ड्राइवरों आदि की भर्ती में भी गोलमाल हुआ है।
ईडी की अब तक की गई जांच से पता चला है कि विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिकाओं आदि से संबंधित ठेके एक ही कंपनी मेसर्स एबीएस इन्फोज़ोन प्राइवेट लिमिटेड (निदेशक- अयान सिल) को प्रश्न पत्रों की छपाई, ओएमआर शीट की छपाई, उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों का मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने आदि के लिए दिए गए थे।
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आपराधिक सांजिश का खुलासा, समझिए कैसे?
अयान सिल, लोक सेवकों और राजनीतिक नेताओं सहित अन्य उच्च पदाधिकारियों ने कुछ निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर आपस में एक आपराधिक साजिश रची। उस साजिश के अनुसरण में मेसर्स एबीएस इन्फोज़ोन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अयान सिल ने ओएमआर शीट की छपाई, डिजाइनिंग और मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार अपनी शक्ति और पद का दुरुपयोग करके उम्मीदवारों की ओएमआर शीट में हेरफेर किया।
पैसे के बदले कई नगर पालिकाओं में कई अयोग्य उम्मीदवारों की अवैध नियुक्तियों को सुगम बनाया। मतलब, जिन उम्मीदवारों के पैसे पहुंच गए या बड़ी राजनीतिक सिफारिश की चिट्ठी आ गई, उनकी ओएमआर शीट बदल दी गई। उन्हें इतने नंबर दे दिए गए, कि उनका चयन पक्का हो गया। ईडी ने इससे पहले नगर पालिकाओं के विभिन्न पदाधिकारियों के परिसरों, विधायक सुजीत बोस और पश्चिम बंगाल के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रथिन घोष के आवासीय परिसरों की भी तलाशी ली थी।