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Bengal: 'कुर्ता फाड़ा, मोबाइल तोड़ा, मारपीट की...', शिक्षक नेता सुमन विश्वास ने पुलिस पर लगाया बदसलूकी का आरोप
Mon, 01 Sep 2025 03:19 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 01 Sep 2025 03:19 PM IST
सार
Bengal: शिक्षक आंदोलन के नेता सुमन विश्वास ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट की अनुमति के बावजूद पुलिस ने मेट्रो स्टेशन पर उन्हें रोकने की कोशिश की और उनके साथ मारपीट की। विश्वास ने कहा कि सरकार आंदोलन दबाना चाहती है।
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सुमन बिस्वास
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
शिक्षक आंदोलन का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले सुमन विश्वास ने सोमवार को आरोप लगाया कि कोलकाता के करुणामयी मेट्रो स्टेशन पर पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की, जबकि उनके पास कलकत्ता हाईकोर्ट का एक विशेष अनुमति आदेश था। उन्होंने दावा किया कि उनका कुर्ता फाड़ दिया गया, मोबाइल फोन तोड़ दिया गया और सादे कपड़ों में मौजूद अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की।
सुमन विश्वास ने पत्रकारों से कहा, जब मैं मेट्रो स्टेशन पर था, तब पुलिस ने मुझे गिरफ्तार करने की कोशिश की। वह आंदोलन को रोकने और मुझे पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) के अधिकारियों से मिलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें: असम में थाडौ जनजाति के नेता की हत्या, दावा- मणिपुर में शांति वार्ता की शुरुआत करने के चलते गई जान
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प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने विश्वास को गिरेबां से पकड़ा, जिससे वहां धक्का-मुक्की शुरू हो गई। यह पूरी घटना सोशल मीडिया पर लाइव दिखाई गई। सुमन विश्वास के अनुसार, हाईकोर्ट का आदेश उन्हें और चार अन्य प्रतिनिधियों को डब्ल्यूबीएसएससी मुख्यालय जाने की अनुमति देता है। इस बीच, डब्ल्यूबीएसएसी मुख्यालय की ओर किसी भी रैली को रोकने के लिए साल्ट लेक इलाके में भारी पुलिस तैनात की गई थी। यह रैली दोपहर में होने वाली थी।
पुलिस ने दावा किया कि सुमन विश्वास बिना अनुमति के रैली निकालने की कोशिश कर रहे थे, जबकि निषेधाज्ञा लागू थी। उन्हें 18 अगस्त को एक और रैली से पहले हिरासत में लिया गया था। सुमन विश्वास के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रविवार रात उनके बंडेल स्थित मोहल्ले में 'छापा' मारा, लेकिन घर में दाखिल नहीं हुए, क्योंकि वहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे। उनके भाई ने कहा कि बार-बार ऐसे निशाना बनाए जाने से यह साफ है कि पुलिस आंदोलन को कुचलने के लिए बौखलाई हुई है।
ये भी पढ़ें: मणिपुर में उग्रवादी संगठनों के चार सदस्य गिरफ्तार, भारी मात्रा में आधुनिक हथियार बरामद
एसएससी अभ्यर्थियों का कहना है कि अयोग्य अभ्यर्थियों की सूची पहले ही जारी हो चुकी है, इसलिए नई भर्ती परीक्षा नहीं होनी चाहिए। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि दागी अभ्यर्थियों की सूची सामने आने के बाद अब साफ-सुथरे शिक्षकों को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि विधानसभा में अगर योग्य उम्मीदवारों को बिना परीक्षा बहाल करने का प्रस्ताव आता है, तो वह उसका समर्थन करेंगे।
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सुमन विश्वास ने पत्रकारों से कहा, जब मैं मेट्रो स्टेशन पर था, तब पुलिस ने मुझे गिरफ्तार करने की कोशिश की। वह आंदोलन को रोकने और मुझे पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) के अधिकारियों से मिलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
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प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने विश्वास को गिरेबां से पकड़ा, जिससे वहां धक्का-मुक्की शुरू हो गई। यह पूरी घटना सोशल मीडिया पर लाइव दिखाई गई। सुमन विश्वास के अनुसार, हाईकोर्ट का आदेश उन्हें और चार अन्य प्रतिनिधियों को डब्ल्यूबीएसएससी मुख्यालय जाने की अनुमति देता है। इस बीच, डब्ल्यूबीएसएसी मुख्यालय की ओर किसी भी रैली को रोकने के लिए साल्ट लेक इलाके में भारी पुलिस तैनात की गई थी। यह रैली दोपहर में होने वाली थी।
पुलिस ने दावा किया कि सुमन विश्वास बिना अनुमति के रैली निकालने की कोशिश कर रहे थे, जबकि निषेधाज्ञा लागू थी। उन्हें 18 अगस्त को एक और रैली से पहले हिरासत में लिया गया था। सुमन विश्वास के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रविवार रात उनके बंडेल स्थित मोहल्ले में 'छापा' मारा, लेकिन घर में दाखिल नहीं हुए, क्योंकि वहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे। उनके भाई ने कहा कि बार-बार ऐसे निशाना बनाए जाने से यह साफ है कि पुलिस आंदोलन को कुचलने के लिए बौखलाई हुई है।
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एसएससी अभ्यर्थियों का कहना है कि अयोग्य अभ्यर्थियों की सूची पहले ही जारी हो चुकी है, इसलिए नई भर्ती परीक्षा नहीं होनी चाहिए। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि दागी अभ्यर्थियों की सूची सामने आने के बाद अब साफ-सुथरे शिक्षकों को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि विधानसभा में अगर योग्य उम्मीदवारों को बिना परीक्षा बहाल करने का प्रस्ताव आता है, तो वह उसका समर्थन करेंगे।
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