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Bengal: हाईकोर्ट ने मृत्युदंड पाने वाले लश्कर के चार आतंकियों को किया बरी, अन्य मामलों में सुनाई गई सजा

Mon, 14 Nov 2022 09:51 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 14 Nov 2022 09:51 PM IST
सार

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति अनन्या बंदोपाध्याय की खंडपीठ ने चारों दोषियों को भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए आईपीसी की धारा 121 के तहत आरोपों से बरी कर दिया।

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Bengal High Court acquits four LeT terrorists sentenced to death
कलकत्ता उच्च न्यायालय (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को दो पाकिस्तानी नागरिकों समेत लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के चार आतंकियों को बरी कर दिया। इन्हें देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया था और मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, उन्हें अन्य अपराधों के लिए सजा दी सुनाई गई है। 

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इन चारों को भारत सरकार के खिलाफ 'युद्ध छेड़ने की साजिश' का दोषी पाया गया था और दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। 

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति अनन्या बंदोपाध्याय की खंडपीठ ने चारों दोषियों को भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए आईपीसी की धारा 121 के तहत आरोपों से बरी कर दिया। पीठ ने निर्देश दिया कि दो पाकिस्तानी नागरिकों मोहम्मद युनूस और मोहम्मद अब्दुल्ला को उनके देश वापस भेजा जाए। ये दोनों पहले सजा काट चुके हैं। 
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अदालत ने निर्देश दिया कि अन्य दो भारतीय नागरिक आईपीसी की धारा 121ए के तहत देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के दोषी पाए गए थे और सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि मुजफ्फर अमहमद को सुधार गृह से रिहा किया जाए और एस. नईम को एक अन्य मामले के संबंध में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। 
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एक सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ अपीलों पर उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, आईपीसी की धारा 121 के तहत बरी किए जाने के मद्देनजर अपीलकर्ताओं को मिली मौत की सजा व पचास-पचास हजार रुपये के जुर्माने को रद्द किया जाता है। 

अदालत ने आगे कहा, आपराधिक ताकत का प्रदर्शन कर लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार की संप्रभुता को आतंकित करने या युद्ध छेड़ने की साजिश रचने से संबंधित आईपीसी की धारा 121 के तहत अपहाध गंभीर प्रकृति का है। इसमें एक ऐसे आतंकी संगठन से प्रेरित सदस्य शामिल हैं, जिनका उद्देश्य देश में आतंक फैलाना या राष्ट्र को अस्थिर करना है। 

खंडपीठ ने आगे कहा, अपीलकर्ता ऐसे लोग नहीं हैं, जो आतंकी संगठन में शीर्ष पद पर बैठे थे। वे अपने संगठन के ऐसे लड़ाकू हैं जिन्हें गतिविधियों को अंजाम देने के लिए लालच देकर या बलपूर्वक भर्ती किया गया। अदालत ने कहा, मोहम्मद युनूस और मोहम्मद अब्दुल्ला अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, उन्हें उनके मूल देश (पाकिस्तान) भेजने का निर्देश दिया जाता है। 


उत्तर 24 परगना जिले की एक अदालत ने एलईटी के तीन आतंकियों मो. युनूस, मो. अब्दुल्ला और मुजफ्फर अहमद राठेर को जनवरी 2017 में मौत की सजा सुनाई थी। चौथे आतंकी अब्दुल नईम को दिसंबर 2018 में देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए मृत्युदंड दिया था।     

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