{"_id":"69a9a55f926289c80c00bf56","slug":"bengal-cm-mamata-banerjee-expressed-concern-governor-bose-resignation-additional-responsibility-to-rn-ravi-2026-03-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंगाल: राज्यपाल बोस के इस्तीफे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जताई चिंता; अब आरएन रवि संभालेंगे अतिरिक्त जिम्मा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
बंगाल: राज्यपाल बोस के इस्तीफे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जताई चिंता; अब आरएन रवि संभालेंगे अतिरिक्त जिम्मा
सार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद केंद्र ने आरएन रवि को राज्य का अंतरिम राज्यपाल नियुक्त कर दिया। चुनावी माहौल के बीच हुए इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चिंता जताते हुए केंद्र की भूमिका और फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पढ़ें रिपोर्ट-
विज्ञापन
ममता बनर्जी, सीवी आनंद बोस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच गुरुवार को बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेजा। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का अंतरिम राज्यपाल नियुक्त करने की घोषणा की है।
आरएन रवि फिलहाल तमिलनाडु के राज्यपाल हैं और अब वे वहां की जिम्मेदारी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के अंतरिम राज्यपाल का दायित्व भी संभालेंगे। रवि पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे हैं और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) तथा खुफिया ब्यूरो (आईबी) में भी अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले एक पूर्व खुफिया अधिकारी को अंतरिम राज्यपाल बनाए जाने को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और राज्यपाल आरएन रवि के बीच लंबे समय से टकराव की स्थिति रही है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों के बीच कई मुद्दों पर सार्वजनिक मतभेद सामने आए। यहां तक कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्यपाल द्वारा आयोजित चाय समारोह का तमिलनाडु सरकार ने बहिष्कार भी किया था। 2023 से स्टालिन सरकार राजभवन के कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए है। तमिलनाडु सरकार ने पहले राष्ट्रपति से राज्यपाल को हटाने की मांग भी की थी। इस पृष्ठभूमि में अब रवि का पश्चिम बंगाल का अतिरिक्त प्रभार संभालना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: कौन हैं सीवी आनंद बोस?: 39 महीने रहे बंगाल के राज्यपाल, पूर्व IAS अफसर ने 32 किताबें भी लिखीं; जानिए खास बातें
उधर, पश्चिम बंगाल में भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए थे। बोस ने कई बार राज्य सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना की थी। हालांकि, जब वे राज्यपाल बनकर कोलकाता आए थे, तब उन्होंने बंगाली परंपरा के अनुसार ‘हातेखड़ी’(शिक्षा की शुरुआत की रस्म) भी निभाई थी, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थीं। बोस ने खुद को ‘बंगाल का दत्तक पुत्र’ बताने की इच्छा भी जताई थी और केरल से अपना वोटर रजिस्ट्रेशन पश्चिम बंगाल में स्थानांतरित कराने की प्रक्रिया भी शुरू की थी।
जानकारी के अनुसार, उनका नाम हाल ही में मतदाता सूची के प्रारंभिक अंतिम प्रकाशन में शामिल भी हो गया था। ऐसे में उनके अचानक इस्तीफे को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे अप्रत्याशित कदम माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि बोस अक्सर दिल्ली आते-जाते रहते थे, लेकिन इस बार उन्होंने दिल्ली में रहते हुए अचानक राष्ट्रपति भवन को अपना इस्तीफा भेज दिया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल के इस्तीफे पर जताई चिंता
राज्यपाल सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि राज्यपाल के इस्तीफे की खबर से मैं स्तब्ध हूं। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि उन्हें अभी तक राज्यपाल के इस्तीफे के कारणों की जानकारी नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें इस बात पर आश्चर्य नहीं होगा यदि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कुछ राजनीतिक हितों को साधने के लिए उन पर दबाव डाला गया हो। उन्होंने आशंका जताई कि केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से किसी तरह का दबाव बनाया गया हो सकता है।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें फोन कर जानकारी दी कि आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से पहले उनसे कोई परामर्श नहीं किया गया, जबकि इस तरह के मामलों में परंपरागत रूप से राज्य सरकार से सलाह-मशविरा किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के एकतरफा फैसले भारत के संविधान की भावना को कमजोर करते हैं और देश की संघीय व्यवस्था की बुनियाद को प्रभावित करते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह सहकारी संघवाद की भावना का सम्मान करे और ऐसे कदमों से बचे जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।
राज्यपाल के इस्तीफे और नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर राज्य की सियासत में बहस तेज हो गई है, खासकर तब जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है।
विज्ञापन
आरएन रवि फिलहाल तमिलनाडु के राज्यपाल हैं और अब वे वहां की जिम्मेदारी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के अंतरिम राज्यपाल का दायित्व भी संभालेंगे। रवि पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे हैं और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) तथा खुफिया ब्यूरो (आईबी) में भी अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं।
विज्ञापन
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले एक पूर्व खुफिया अधिकारी को अंतरिम राज्यपाल बनाए जाने को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और राज्यपाल आरएन रवि के बीच लंबे समय से टकराव की स्थिति रही है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों के बीच कई मुद्दों पर सार्वजनिक मतभेद सामने आए। यहां तक कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्यपाल द्वारा आयोजित चाय समारोह का तमिलनाडु सरकार ने बहिष्कार भी किया था। 2023 से स्टालिन सरकार राजभवन के कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए है। तमिलनाडु सरकार ने पहले राष्ट्रपति से राज्यपाल को हटाने की मांग भी की थी। इस पृष्ठभूमि में अब रवि का पश्चिम बंगाल का अतिरिक्त प्रभार संभालना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: कौन हैं सीवी आनंद बोस?: 39 महीने रहे बंगाल के राज्यपाल, पूर्व IAS अफसर ने 32 किताबें भी लिखीं; जानिए खास बातें
उधर, पश्चिम बंगाल में भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए थे। बोस ने कई बार राज्य सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना की थी। हालांकि, जब वे राज्यपाल बनकर कोलकाता आए थे, तब उन्होंने बंगाली परंपरा के अनुसार ‘हातेखड़ी’(शिक्षा की शुरुआत की रस्म) भी निभाई थी, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थीं। बोस ने खुद को ‘बंगाल का दत्तक पुत्र’ बताने की इच्छा भी जताई थी और केरल से अपना वोटर रजिस्ट्रेशन पश्चिम बंगाल में स्थानांतरित कराने की प्रक्रिया भी शुरू की थी।
जानकारी के अनुसार, उनका नाम हाल ही में मतदाता सूची के प्रारंभिक अंतिम प्रकाशन में शामिल भी हो गया था। ऐसे में उनके अचानक इस्तीफे को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे अप्रत्याशित कदम माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि बोस अक्सर दिल्ली आते-जाते रहते थे, लेकिन इस बार उन्होंने दिल्ली में रहते हुए अचानक राष्ट्रपति भवन को अपना इस्तीफा भेज दिया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल के इस्तीफे पर जताई चिंता
राज्यपाल सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि राज्यपाल के इस्तीफे की खबर से मैं स्तब्ध हूं। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि उन्हें अभी तक राज्यपाल के इस्तीफे के कारणों की जानकारी नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें इस बात पर आश्चर्य नहीं होगा यदि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कुछ राजनीतिक हितों को साधने के लिए उन पर दबाव डाला गया हो। उन्होंने आशंका जताई कि केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से किसी तरह का दबाव बनाया गया हो सकता है।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें फोन कर जानकारी दी कि आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से पहले उनसे कोई परामर्श नहीं किया गया, जबकि इस तरह के मामलों में परंपरागत रूप से राज्य सरकार से सलाह-मशविरा किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के एकतरफा फैसले भारत के संविधान की भावना को कमजोर करते हैं और देश की संघीय व्यवस्था की बुनियाद को प्रभावित करते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह सहकारी संघवाद की भावना का सम्मान करे और ऐसे कदमों से बचे जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।
राज्यपाल के इस्तीफे और नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर राज्य की सियासत में बहस तेज हो गई है, खासकर तब जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन