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आपबीतीः इतना मारा कि रेटिना फट गया, जेल में भी हुआ था हमला

Fri, 21 Dec 2018 05:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 21 Dec 2018 05:06 AM IST
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beaten so much that the retina of the eye burst, even in jattacked in jail
Hamid Ansari - फोटो : amar ujala

इश्क के चक्कर में पाकिस्तान की जेल में छह साल बिताने के बाद हामिद अंसारी बृहस्पतिवार को मुंबई के वर्सोवा स्थित अपने घर लौटे और आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे उसे वहां यातना दी गई। लेकिन, अब वह अपने पुराने घावों को खरोंचना नहीं चाहते। हामिद अतीत को भूलकर अपनी नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं।

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बृहस्पतिवार को दिल्ली से मुंबई पहुंचने पर हामिद अंसारी ने कहा कि पाक में उसे बहुत यातनाएं सहनी पड़ीं। लेकिन, जो कुछ भी उसे सहन करना पड़ा उसके लिए वह खुद को ही जिम्मेदार मानता है। हामिद ने बताया कि पाक खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने जेल में उसे इस कदर प्रताड़ित किया कि उनकी बाई आंख का रेटिना फट गया। हालांकि बाद में इसका ऑपरेशन भी कराया।
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जेल में बिताए गए पल याद कर वह भावुक हो गए। जब उसे यह भी पता नहीं चलता था कि कब दिन हुआ और कब रात हुई। हामिद को शुरुआत के तीन साल तक एकांतवास में जमीन से 15 फुट नीचे कालकोठरी में रखा गया था। वहां कोई सुविधा नहीं थी। 24 घंटे में सिर्फ एक बार कुछ पल के लिए उसे वॉशरूम ले जाया जाता था। 
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जेल में कई दिनों तक उसे खाना भी नहीं दिया जाता था। तपा देने वाली गर्मी में भी उसके नहाने-धोने पर पाबंदी लगा दी जाती थी, जिससे उसके शरीर में कीड़े तक पड़ जाते थे। वहीं, सर्दियों में उसे घंटों खड़ा रखा जाता था और झपकी आने पर वहां मौजूद जेलकर्मी कहीं भी मार देते थे। 

दो साल पहले पेशावर जेल में हामिद पर कुछ लोगों ने हमला भी कर दिया था। लेकिन, पाक में जीनत शहजादी, मोहम्मद उमर काजी और रक्षदा खान जैसे कुछ ऐसे लोग भी मिले जिन्होंने उसकी मदद की।

माता-पिता से कुछ न छिपाना

हामिद ने कहा कि तीन चीजें नहीं करनी चाहिए। पहला फेसबुक के जरिए इश्क नहीं करना चाहिए। दूसरा पाकिस्तान नहीं जाना चाहिए और तीसरा अच्छा हो या बुरा जो भी हो अपने मां-बाप को बताना चाहिए। उसने दिमाग से नहीं, दिल से पाकिस्तान जाने का फैसला लिया था। उसने जिस लड़की के लिए इतना बड़ा खतरा मोल लिया उसके दीदार भी नहीं हुए। उल्टा उसे धोखा मिला। 

जिन लोगों को वह अपना साथी समझता था उन्होंने फर्जी कार्ड दिए और कहा कि इससे वह बच जाएंगे लेकिन, उन्हीं लोगों ने पकड़वा दिया। हामिद ने कहा कि अब वह अपनी जिंदगी सामान्य तरीके से जीना चाहते हैं। उनकी कोशिश फिलहाल नौकरी पाने और उसके बाद शादी करने की है।

सुषमा दखल नहीं देतीं तो नामुमकिन थी जल्द रिहाई

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से हामिद के पिता निहाल अंसारी की मुलाकात करवाने वाले भाजपा के पूर्व विधायक कृष्णा हेगड़े ने कहा कि विदेश मंत्रालय के दखल के बाद उसकी जल्द रिहाई सुनिश्चित हो सकी। हेगडे़ ने खुद निहाल अंसारी को दो बार विदेश मंत्री से मिलवाया था। उन्होंने बताया कि हामिद की मदद कई लोगों ने अपने स्तर पर की लेकिन, विदेश मंत्रालय के दखल से जल्द रिहाई हुई। 

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