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BBC Survey: बीबीसी के दफ्तरों पर आईटी के सर्वे क्यों हुए? सर्वे और रेड में अंतर क्या होता है?

Wed, 15 Feb 2023 06:52 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 15 Feb 2023 06:52 PM IST
सार

बीबीसी के दिल्ली और मुंबई के दफ्तरों पर आयकर विभाग ने सर्वे किया है। बीबीसी पर आरोप है कि इसने ट्रांसफर प्राइसिंग रूल्स का जानबूझकर उल्लंघन किया और इसके मुनाफों में बड़े पैमाने पर बदलाव भी किए।

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BBC Survey: reason of IT surveys conducted at BBC office, difference between survey and raid
बीबीसी के दफ्तरों पर आईटी के सर्वे - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

बीबीसी द्वारा प्रधानमंत्री पर बनाई गए डॉक्यूमेंट्री का विवाद अभी रुका नहीं ही था कि अब ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के दिल्ली और मुंबई दफ्तरों पर आयकर विभाग के सर्वे की खबर आई है। सर्वे की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रही। 
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रिपोर्ट्स के अनुसार, बीबीसी के कर्मचारियों के फोन जब्त कर लिए गए हैं। बीबीसी ने कहा है कि उसके कई कर्मचारी बिल्डिंग से जा चुके हैं। कुछ कर्मचारियों को यहां रहने के लिए कहा गया और वे मंगलवार सुबह से चल रही इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों की पूछताछ में सहयोग कर रहे हैं। कंपनी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो जाएगी।''
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BBC Survey: reason of IT surveys conducted at BBC office, difference between survey and raid
बीबीसी के दफ्तरों पर आईटी के सर्वे - फोटो : SOCIAL MEDIA
अभी क्या हुआ है? 
मंगलवार को बीबीसी के दिल्ली और मुंबई के दफ्तरों पर आयकर विभाग ने सर्वे किया है। आयकर विभाग ने कार्रवाई के बाद एक आधिकारिक बयान जारी किया है। बीबीसी पर आरोप है कि इसने ट्रांसफर प्राइसिंग रूल्स का जानबूझकर उल्लंघन किया और इसके मुनाफों में बड़े पैमाने पर बदलाव भी किए। एजेंसी का कहना है कि बीबीसी कई वर्षों से इन नियमों का पालन नहीं कर रहा है जिसको लेकर उसको कई नोटिस भी जारी किए गए हैं। इन सबके बावजूद बीबीसी ने यह उल्लंघन जारी रखा। कहा गया कि इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य अनाधिकृत मुनाफों के लिए कीमतों में हेराफेरी की जांच करना है।

BBC Survey: reason of IT surveys conducted at BBC office, difference between survey and raid
आयकर विभाग - फोटो : Amar Ujala Digital
आयकर विभाग का सर्वे क्या होता है?
आयकर विभाग के अधिकारी छिपी या अघोषित आय और संपत्ति का पता लगाने के लिए सर्वे करते हैं। कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सूचनाएं इकट्ठा करना होता है। आयकर विभाग को सर्वे की यह शक्ति आयकर अधिनियम की धारा 133ए से मिलती है। सर्वे में यह भी पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति या व्यवसाय ने अपने खातों की पुस्तकों को ठीक से बनाए रखा है या नहीं।
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जयपुर में आयकर विभाग की कार्रवाई - फोटो : Amar Ujala Digital
क्या सर्वे और छापेमारी अलग होते हैं?
सर्वे और छापेमारी दोनों अलग-अलग कार्रवाईयां होती हैं। सर्वे तलाशी अभियान का एक हल्का रूप है। सर्वे का मुख्य उद्देश्य जानकारी प्राप्त करना होता है। तलाशी और छापेमारी के दौरान, सामान्यतः अघोषित संपत्ति और इसके लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड का पता लगाया जाता है।
 
सर्वे, काम करने वाले घंटों (बिजनेस आवर्स) के दौरान किए जा सकते हैं जबकि छापेमारी के लिए कोई समय निश्चित नहीं होता है। छापेमारी के दौरान अघोषित संपत्ति को जब्त करने की अनुमति होती है। असहयोग की स्थिति में अधिकारी कोई भी दरवाजा या खिड़की तोड़ सकते हैं लेकिन सर्वे के दौरान ऐसा कुछ नहीं किया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया के लिए पुलिस अधिकारियों या केंद्र सरकार के किसी अन्य अधिकारी की मदद ली जा सकती है। सर्वे केवल कारोबारी दफ्तर पर हो सकता है। तलाशी अभियान में ऐसी कोई मनाही नहीं होती है।
2002 के वित्त अधिनियम से पहले, अधिकारियों के पास सर्वे के दौरान किसी भी संपत्ति को जब्त करने की शक्ति नहीं थी। हालांकि, नए नियमों के मुताबिक, कारण बताकर अधिकारी सर्वे की गई पुस्तकों और दस्तावेजों को जब्त कर सकते हैं। 

ट्रांसफर प्राइसिंग क्या होती है? 
जब एक पक्ष किसी कीमत पर वस्तु या सेवाओं को स्थानांतरित करता है। उस कीमत को ट्रांसफर प्राइसिंग या 'हस्तांतरण मूल्य' कहते हैं। हालांकि, यह मनमाना, पूर्व निर्धारित या बाजार की कीमतों से अलग हो सकता है। आसान शब्दों में कहें तो ट्रांसफर प्राइसिंग किन्हीं दो कारोबारी संस्थाओं के बीच वस्तुओं, सेवाओं और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण से जुड़ी कीमत को बताता है। 

उदाहरण के तौर पर, एक कंपनी X 10 रुपये की वस्तु खरीदती है और इसे अपनी संबद्ध कंपनी Y को दूसरे देश में 20 रुपये में बेचती है। हालांकि, Y कंपनी इसी वस्तु को खुले बाजार में 40 रुपये में बेचती है। यदि X ने उसे सीधे बेच दिया होता, तो उसे 30 रुपये का मुनाफा होता। यहां ध्यान देने वाली बात है कि वस्तु को Y के जरिए बेचने पर A को केवल 10 रुपये का ही मुनाफा मिला। X और Y के बीच लेन-देन तो हुआ लेकिन यह बाजार द्वारा नियंत्रित नहीं है। इस तरह से 20 रुपये का मुनाफा, Y कंपनी के देश में हस्तानांतरित कर दिया जाता है। वस्तु को एक कीमत (ट्रांसफर प्राइसिंग) पर हस्तानांतरित किया जाता है जो बाजार मूल्य (40 रुपये) पर न होकर मनमाना या पूर्व निर्धारित (20 रुपये) है।

 
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