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जज बनने के लिए तीन साल की वकालत अनिवार्य हो, बार काउंसिल सुप्रीम कोर्ट से करेगी गुहार
Sun, 03 Jan 2021 07:19 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sun, 03 Jan 2021 07:19 PM IST
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया
- फोटो : सोशल मीडिया
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने न्यायिक अधिकारी यानी जज बनने के लिए कम से कम तीन साल की वकालत को अनिवार्य करने की मांग की है। इस बारे में बीसीआई जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करेगी।
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बीसीआई देश में वकीलों की शीर्ष संस्था है। उसका कहना है कि वकील के तौर पर व्यावहारिक अनुभव नहीं रखने वाले ज्यादातर न्यायिक अधिकारी अक्षम और मामलों के निपटारे के लिए अकुशल पाए गए हैं। ऐसे ज्यादातर अधिकारी अशिष्ट पाए गए हैं और बार के सदस्यों और वादियों के साथ अपने बर्ताव में अव्यावहारिक होते हैं।
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बीसीआई ने कहा कि वर्तमान में कानून की डिग्री लेकर विश्वविद्यालयों से निकले छात्र देश भर में न्यायिक सेवा की परीक्षा में बैठते हैं जबकि उनके पास बार यानी वकालत का कोई व्यावहारिक अनुभव नहीं होता है। सभी राज्यों की बार काउंसिल के साथ बीसीआई न्यायिक सेवा परीक्षा में बैठने के योग्य होने के लिए वकील के तौर पर कम से कम तीन साल के अनुभव की शर्त का पुरजोर समर्थन कती है।
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बीसीआई सचिव श्रीमंतो सेन ने एक बयान में कहा कि सीधे परीक्षा पास कर जज बनने वाले लोगों में उपयुक्त और शालीन व्यवहार व समझ का अभाव होता है। इससे वे वकीलों व वादियों से सही बर्ताव नहीं कर पाते हैं। वकालत का अनुभव नहीं होना निचली अदालतों में मामलों के निपटारे में विलंब का मूल और बड़ा कारण है।
सुप्रीम कोर्ट ने खत्म की शर्त
बता दें कि जज बनने के पूर्व तीन साल के वकालत के अनुभव की शर्त को सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2002 के एक आदेश के जरिए समाप्त कर दिया था। बीसीआई ने कहा कि वह जल्द ही शीर्ष न्यायालय में एक अर्जी दायर कर उस आदेश में संशोधन करने का अनुरोध करेगी। बीसीआई का यह बयान सुप्रीम कोर्ट में हाल में दायर एक याचिका के मद्देनजर आया है।
आंध्र लोकसेवा आयोग के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश लोकसेवा आयोग ने दिसंबर-2020 की एक अधिसूचना द्वारा आंध्र प्रदेश राज्य न्यायिक सेवा में सिविल जज के पद के लिए ऐसे वकीलों से आवेदन आमंत्रित किए हैं जिनके पास कम से कम तीन साल की वकालत का अनुभव है। इस अधिसूचना के खिलाफ शीर्ष न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है।