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बांग्लादेश ने 'जामत-ए-एस्लाम' के नेता को दी फांसी, बौखलाया पाक

Sun, 04 Sep 2016 08:02 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 04 Sep 2016 08:02 PM IST
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 Bangladesh Jamaat- e-Islam leader Mir Qasim hanged
मीर अली कासिम

बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन 'जमात-ए-इस्लाम' के नेता और बांग्लादेश के मीडिया टाइकून मीर अली कासिम को शनिवार रात फांसी पर लटका दिया गया। सन् 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए मुक्ति संग्राम में मीर को युद्ध अपराध में दोषी पाया गया।

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अली को राजधानी के बाहर काशीपुर सेंट्रल जेल में 10:35 बजे फांसी पर लटकाया गया। 63 वर्षीय अली ने राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाई थी।

लेकिन बांग्लादेश के राष्ट्रपति (अब्दुल हमीद) ने उसकी दया याचिका को खारिज कर दिया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे सजा सुनाई।

सजा की तामिल से पहले अली के घर वालो को उससे मिलने बुलाया गया था। अली के घर से 22 लोग उससे मिलने आए थे।

अली ने कई टीवी चैनलों और व्यापारिक घरानों को निलंबित कर उनपर स्वामित्व कायम किया हुआ था। इसके साथ वह जमात-ए-इस्लाम के केंद्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य भी था।
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बता दें कि अली ने 1980 में इस कट्टरपंथी संगठन में नई जान फूकी और तब से लेकर अब तक वह इस संगठन को वित्तीय सहायता भी प्रदान करता रहा।   
       

     

जमात नेता की फांसी से बौखलाया पाक,

 Bangladesh Jamaat- e-Islam leader Mir Qasim hanged
कासिम

बांग्लादेश के जमात-ए-इस्लामी के नेता मीर कासिम को फांसी दिए जाने से पाकिस्तान बौखला गया है। उसने फांसी दिए जाने को एक त्रुटिपूर्ण न्याय व्यवस्था की देन बताया। जबकि बांग्लादेश ने पाकिस्तान को आंतरिक मामलों में दखल देने पर कड़ी चेतावनी दी है।

पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया 63 वर्षीय बांग्लादेशी मीडिया उद्योगपति को फांसी दिए जाने के एक घंटे बाद ही आ गई। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश के जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख नेता को फांसी दिए जाने से गहरे सदमे में है।

मीर कासिम को कथित तौर पर 1971 से पहले हुए अपराध के लिए त्रुटिपूर्ण न्याय प्रक्रिया द्वारा सजा दी गई। त्रुटिपूर्ण न्याय प्रक्रिया द्वारा विपक्ष को दबाने की साजिश पूरी तरह से लोकतंत्र के खिलाफ है।

पाकिस्तान ने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए आरोपी साबित करना उल्टा पड़ सकता है। पाकिस्तान चाहता है कि इन मामलों में आगे की ओर देखते हुए शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिए।

पाक की प्रतिक्रिया पर बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों के अतिरिक्त विदेश सचिव कमरुल अहसान ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त समीना महताब को इस मामले में तलब किया और पाक की प्रतिक्रिया पर विरोध दर्ज कराया।

अहसान ने कहा कि पाकिस्तान ने मीर कासिम अली की फांसी को लेकर जो बयान दिया है वह बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में दखल देने की तरह है। 

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