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पाक से अधिक संवेदनशील है बांग्लादेश सीमा, ढाका हमले के बाद सतर्क हुई सुरक्षा एजेंसियां
राघवेंद्र नारायण मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 05 Jul 2016 03:55 AM IST
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ढ़ाका हमले ने बांग्लादेश सीमा से हो रही घुसपैठ के प्रति सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान फिर से खींचा है। पाकिस्तान सीमा और भारत -पाक नियंत्रण रेखा की तुलना में बांग्लादेश की सीमा अधिक संवेदनशील रही है।
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देश से पांच राज्यों से सटने वाली बांग्लादेश की सीमा से हर साल एक हजार से अधिक घुसपैठ की कोशिशें होती हैं जबकि पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ की कोशिशों की तुलना में लगभग तिगुनी अधिक है। ढ़ाका हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमा के खाली हिस्सों में बाड़ लगाने और एकीकृत जांच चौकियों की स्थापना की कवायद तेज की है।
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गौरतलब है कि बर्धमान बम धमाके की जांच के क्रम में इस तथ्य का खुलासा हुआ था कि बांग्लादेश से आंतकी संगठन जमायत-उल -मुजाहिदीन के आतंकियों ने घुसपैठ कर उस घटना को अंजाम दिया था। बांग्लादेश में कट्टरपंथी और आतंकवादी अपनी मजबूत स्थिति बना चुके हैं।
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लिहाजा अब इस सीमा पर पाकिस्तान सीमा जैसी कड़ी चौकसी पर विचार हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने बांग्लादेश की सीमा पर प्रस्तावित 13 एकीकृत जांच चौकियों के लिए पश्चिम बंगाल सरकार से भूमि का प्रबंध जल्द करने को कहा है। पश्चिम बंगाल के हिली और चंग्राबंधा समेत तेरह संवेदनशील स्थानों पर हाई टेक डिजिटल चौकियों की स्थापना का प्रस्ताव है।
बांग्लादेश सीमा से सबसे अधिक घुसपैठ पश्चिम बंगाल की सीमा में ही होती है। त्रिपुरा, असम, मिजोरम और मेघालय के अलावा बिहार के किशनगंज इलाके से घुसपैठ होती रही है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 2013 में बांगलादेश सीमा से घुसपैठ के 1180 मामले सामने ओ जबकि इस दौरान पाकिस्तान से घुसपैठ के 332 कोशिशें हुईं।
इसी तरह 2014 में बांग्लादेश से 1017 और 2015 में 1047 बार घुसपैठ की कोशिशें हुईं। इस साल में एक माह में घुसपैठ की 114 कोशिशें हुईं। इस दौरान 2014 में पाकिस्तान से घुसपैठ की 266 और 2015 में 165 कोशिशें हुईं।
बांगलादेश सीमा पर हर साल औसतन तीन हजार घुसपैठिए पकड़े जाते हैं। तीन साल में बांगेलादेश सीमा पर 53 घुसपैठिए मारे भी गए। तीन साल में पाकिस्तान सीमा पर 269 घुसपैठियों की गिरफ्तारी हुई है।
80 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ बनाने का काम शुरू नहीं हुआ
भारत बांग्लादेश सीमा पर 80 किलोमीटर लंबे हिस्से में बाड़ बनाने का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। दरअसल गृह मंत्रालय को इसके लिए जरूरी भूमि का पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से हस्तानान्तरण नहीं होने का कारण यह काम लटका है। अब गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने को कहा है।