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अब पश्चिम बंगाल में 10वीं तक अनिवार्य होगी बांग्ला की पढ़ाई
ब्यूरो/ अमर उजाला, कोलकाता
Updated Wed, 17 May 2017 05:01 AM IST
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पश्चिम बंगाल सरकार राज्य के स्कूलों में दसवीं कक्षा तक बांग्ला भाषा की पढ़ाई अनिवार्य करने जा रही है। इनमें आईसीएसई और सीबीएसई बोर्डों से संबद्ध स्कूल भी शामिल हैं। शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि अब छात्रों के लिए बांग्ला सीखना अनिवार्य होगा।
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शिक्षा मंत्री ने कहा कि कि तमाम स्कूलों को पहली कक्षा से बांग्ला को ऐच्छिक विषयों की सूची में शामिल करना होगा। छात्रों के समक्ष दूसरी या तीसरी भाषा के तौर पर इसे चुनने का विकल्प होगा।
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मंत्री ने कहा कि अगर कोई छात्र हिंदी, अंग्रेजी, गुरुमुखी, उर्दू और नेपाली में से किसी एक को पहली भाषा के तौर पर चुनता है तो उसे दो अन्य भाषाएं चुननी होंगी और उनमें एक भाषा बांग्ला होनी चाहिए। चटर्जी ने साफ कहा कि पहली से 10वीं तक के छात्र तीन में से दो भाषाएं चाहे कोई भी चुने, लेकिन एक भाषा का बांग्ला होना अनिवार्य है।
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चटर्जी ने कहा कि सरकार को सूचना मिली थी कि कई स्कूलों में बांग्ला भाषा का विकल्प नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद सरकार ने इसे अनिवार्य बनाने का फैसला किया।
मंत्री ने कहा कि सरकार इस फैसले के कानूनी पहलुओं पर भी विचार करेगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि इसके लिए अलग से कानून बनाना जरूरी है या फिर कैबिनेट का फैसला ही पर्याप्त है। जाने माने इतिहासकार और लेखक नृसिंह प्रसाद भादुरी ने सरकार के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि आखिर हमारे बच्चे बांग्ला क्यों नहीं जानेंगे? यह सही है कि कई स्कूलों के पाठ्यक्रम में बांग्ला भाषा शामिल नहीं है। ऐसे में सरकार की यह पहल सराहनीय है।