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नहीं हटेगा गणपति विसर्जन और नवरात्रि के दौरान डीजे पर से प्रतिबंध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Updated Fri, 21 Sep 2018 08:32 PM IST
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इस समय पूरे देश में खासकर महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की धूम चल रही है। नवरात्रि भी आने वाली है। इन दोनों त्योहारों पर डीजे वगैरह का प्रयोग परंपरा की तरह हो गया था। ध्वनि प्रदूषण के तर्क पर महाराष्ट्र सरकार ने गणपति विसर्जन और नवरात्रि उत्सव के दौरान डीजे आदि के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस निर्णय को हटाने के लिए दाखिल याचिका को आज बंबई हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। बता दें कि रविवार को गणेस उत्सव विसर्जन जुलूस के साथ पूरा होगा।
महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय के खिलाफ प्रोफेशनल ऑडियो एंड लाइटिंग एसोसिएशन (पीएएलए) ने साउंड एम्प्लीफाइंग सिस्टम्स पर प्रतिबंध को चुनौती दी थी। लेकिन, न्यायमूर्ति शांतनु केमकर और न्यायमूर्ति सारंग कोटवाल की खंडपीठ ने पीएएलए की अंतरिम राहत वाली याचिका को खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि एसोसिएशन यह साबित नहीं कर सकी कि ऐसे ऑडियो सिस्टम्स का मंजूर ध्वनि सीमा का उल्लंघन किए बिना इस्तेमाल किया जा सकता है।
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महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय के खिलाफ प्रोफेशनल ऑडियो एंड लाइटिंग एसोसिएशन (पीएएलए) ने साउंड एम्प्लीफाइंग सिस्टम्स पर प्रतिबंध को चुनौती दी थी। लेकिन, न्यायमूर्ति शांतनु केमकर और न्यायमूर्ति सारंग कोटवाल की खंडपीठ ने पीएएलए की अंतरिम राहत वाली याचिका को खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि एसोसिएशन यह साबित नहीं कर सकी कि ऐसे ऑडियो सिस्टम्स का मंजूर ध्वनि सीमा का उल्लंघन किए बिना इस्तेमाल किया जा सकता है।
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पीठ ने पिछली सुनवाई में राज्य सरकार द्वारा पेश की गई दलीलों पर विचार किया जिसमें महाधिवक्ता आशुतोष कुम्भकणी ने कहा था कि डीजे और डॉल्बी ऑडियो सिस्टम्स ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं। कुम्भकणी ने कहा कि जब डीजे या डॉल्बी सिस्टम बजता है तो ध्वनि का स्तर 100 डेसीबल के पार चला जाता है जो कि ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 के तहत मंजूरी सीमा से कहीं अधिक है। अदालत ने कहा, ‘हम याचिकाकर्ता की इस दलील को स्वीकार नहीं कर सकते कि शहर में ध्वनि का स्तर पहले ही मंजूर स्तर से ज्यादा है और डीजे सिस्टम्स से थोड़ा ही शोर बढ़ेगा इसलिए इसे अनुमति दी जानी चाहिए।’ अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से याचिका का विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए कहा।