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हादसे की दर्दनाक दास्तां: 'सीने पर फुटबॉल की तरह आकर गिरा था सिर'; चश्मदीद बोला- गले से नहीं उतर रहा निवाला
Tue, 06 Jun 2023 08:10 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 06 Jun 2023 08:10 PM IST
सार
ओडिशा के बालासोर में दो जून को हुई रेल दुर्घटना के बाद असम के 27 साल के रूपक दास अभी भी सदमे में है। इस हादसे का उनपर इतना गहरा असर हुआ है कि वे कुछ खा नहीं पा रहे हैं।
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ओडिशा ट्रेन हादसा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पिछले सप्ताह ओडिशा के बालासोर में हुए भयावह हादसे के बाद अब उसके पीड़ितों की दर्दनाक कहानियां सामने आ रही हैं। दिल दहला देने वाले हादसे में किसी का पूरा परिवार ही तबाह हो गया तो कहीं अब भी कोई अपनों का इंतजार कर रहा है। हादसे में जिंदा बचे लोगों का वो आंखों देखा मंजर भी रौंगटे खड़े कर देने वाला है। बता दें कि इस हादसे में अब तक 288 लोगों की मौत हो गई है।
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अभी भी सदमे में है रूपक दास
ओडिशा के बालासोर में दो जून को हुई रेल दुर्घटना के बाद असम के 27 साल के रूपक दास अभी भी सदमे में है। इस हादसे का उनपर इतना गहरा असर हुआ है कि वे कुछ खा नहीं पा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, सोनितपुर जिले के उत्तर मराल गांव के रूपक दास को असम सरकार द्वारा सोमवार रात बालासोर से गुवाहाटी रेफर किया गया था। जहां उनका इलाज गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में चल रहा है।
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मालगाड़ी पर चढ़ा था इंजन
हादसे को लेकर जब दास से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वो मंजर बेहद खौफनाक था। उन्होंने बताया कि इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस की आपातकालीन खिड़की से एक कटा हुआ सिर फुटबॉल की तरह लुढ़क कर मेरे सीने पर आ गिरा था। दास ने कहा कि जब यह घटना हुई तो मैंने अचानक एक जोर की आवाज सुनी। मुझे लगा था कि ट्रेन पटरी से उतर गई है। मैंने खिड़की से बाहर देखा तो मालगाड़ी के ऊपर इंजन चढ़ा हुआ दिखा।
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फुटबॉल की तरह आकर गिरा कटा हुआ सिर
दास ने बताया कि झटका इतनी जोर का था कि मैं इमरजेंसी का शीशा तोड़कर कोच से बाहर आ गया। मेरे ऊपर दो और लोग गिर पड़े। उन्होंने कहा कि इसके एक सेकंड के भीतर बेंगलुरू-हावड़ा एक्सप्रेस हमारी ट्रेन से टकरा गई और हमारा कोच उससे करीब-करीब कुचल गया। उस समय, एक व्यक्ति का कटा हुआ सिर फुटबॉल की तरह मेरे ऊपर आकर गिरा। दास ने बताया कि वो भयानक मंजर देखने के बाद वह ठीक से खाना भी नहीं खा पा रहे हैं।
दास ने लगाया आरोप
इस दौरान दास ने आरोप लगाया कि शुरू में उन्हें सिर्फ बालासोर के एक स्थानीय अस्पताल में रखा गया था और कोई इलाज नहीं दिया गया था। दुर्घटना के एक दिन बाद जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अस्पताल पहुंचीं, तो मैंने उनसे बेहतर इलाज के लिए डॉक्टरों को बताने का अनुरोध किया। इसके बाद ही मेरा इलाज शुरू हुआ। असम सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि असम सरकार से तब तक कोई संवाद नहीं हुआ जब तक कि मैंने वीडियो बना कर उसे फेसबुक पर अपलोड नहीं किया था।
दास पांडिचेरी में एक फैक्ट्री में काम करते हैं और उनकी पत्नी एक पेन निर्माण इकाई में कार्यरत हैं। वह अपनी गर्भवती पत्नी को छोड़ने घर आया था। दास की पांडिचेरी की ट्रेन छूट गई थी जिसके बाद उन्होंने हावड़ा-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस में टिकट बुक कराया था।
जीएमसीएच के अधीक्षक डॉ अभिजीत सरमा ने कहा कि मरीज की हालत स्थिर है। हमने उनके दाहिने घुटने का एमआरआई स्कैन कराया है। मानसिक सदमे से उबरने के लिए उनकी काउंसलिंग की जा रही है।