फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   baghpat: school refuse to admission of tea vendor's son

'चाय' नहीं 'चाय की पत्ती' बेचता है छात्र का पिता, स्कूल पर था निकालने का आरोप

Sat, 07 May 2016 07:02 PM IST
हरेन्द्र सिंह मोरल, मदन बालियान/अमर उजाला, नई दिल्ली
हरेन्द्र सिंह मोरल, मदन बालियान/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 07 May 2016 07:02 PM IST
विज्ञापन
baghpat: school refuse to admission of tea vendor's son
अपनी दुकान पर चाय की पत्ती बेचते मंगतराम जैन - फोटो : kuldeep kumar/amar ujala

बागपत के बड़ौत में स्कूल प्रबंधन और एक छात्र के पिता के बीच चली लंबी लड़ाई में जीत आखिर पिता की हुई। आरोप था ‌कि उनके बेटे को स्कूल प्रबंधन ने यह कहकर निकाल दिया कि वो किसी चाय वाले के बेटे को अपने यहां नहीं पढ़ा सकते। 

विज्ञापन


मामला सामने आया तो अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इसी बीच बात डीएम तक भी पहुंची तो उन्होंने जांच बैठा दी, ‌मामला जिलाधिकारी से होते हुए डीआईओएस तक पहुंचा और अंततः दो साल से पढ़ाई से वंचित चल रहे छात्र को स्कूल में एडमिशन मिल गया। 
विज्ञापन


स्कूल प्रबंधन और एक पिता की यह लड़ाई जल्द ही नेशनल मीडिया की सुर्खियां भी बन गया। और इसी बीच एक कमाल ये हुआ कि चाय की पत्ती बेचने वाला एक पिता 'चाय बेचने' वाला बन गया। ऊपर लगी तस्वीरें शायद सारी कहानी अपने आप बयां कर रही हैं। खैर इस मुद्दे पर बात बाद में करेंगे लेकिन पहले जान लें कि मामला क्या है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

यूपी के बड़ौत कस्बे का मामला, दो साल पहले स्कूल से निकाला था छात्र

baghpat: school refuse to admission of tea vendor's son
मंगतराम की मोहल्ला ठाकुरद्वारा में चाय की पत्‍ती की दुकान - फोटो : kuldeep kumar/amar ujala

असल में मामला है यूपी के बागपत जिले के तहसील बड़ौत का। कस्बे के आर्य नगर निवासी मंगतराम जैन मोहल्ला ठाकुरद्वारा में चाय की पत्ती बेचते हैं। कुछ दिन पहले जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. आशुतोष भारद्वाज से मिलने पहुंचे मंगतराम ने बताया कि उनका बेटा अरिहंत महावीर एकेडमी में पढ़ता था। सत्र 2013-14 में उसने कक्षा पांच उत्तीर्ण की, लेकिन स्कूल ने कक्षा छह में प्रवेश देने के बजाए उसकी टीसी काट दी।

पिछले दो वर्ष से वह छात्र की पसंद के चलते लार्ड महावीरा एकेडमी में ही प्रवेश कराने के लिए प्रयासरत हैं। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उनके बेटे को प्रवेश से इंकार कर दिया। शिकायतों का दौर शुरू हुआ। डीएम ह्दय शंकर तिवारी के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. आशुतोष भारद्वाज ने दोनों पक्षों को बुलाया। 

यहां मंगतराम जैन ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को स्कूल प्रबंधन ने चाय की दुकान चलाने वाला कहकर बच्चे को प्रवेश देने से इंकार किया है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। छात्र के पिता ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी तक भी पहुंचा दी है, जिन्होंने जल्द मुलाकात का आश्वासन दिया है। 

वहीं स्कूल के प्रधानाचार्य विक्रम सिंह दानी का कहना था कि बच्चे के अभिभावक खुद ही स्कूल से टीसी कटवाकर ले गए थे। संस्था में सभी वर्गों के बच्चे पढ़ते हैं। चाय वाला कहने का आरोप बेबुनियाद है। टीसी कटाने के कारण संस्था ने बच्चे के दोबारा एडमीशन पर विचार नहीं किया। 

दो साल से अगर पढ़ाई छुड़वाने के बजाए अन्य किसी संस्था में बच्चे का एडमीशन कराया जा सकता था। संस्था को बदनाम करने की साजिश है, हमें किसी भी वर्ग के बच्चे से कोई परहेज नहीं। संस्था का कार्य बच्चों को शिक्षित करना है, न की उनके अभिभावकों का पेशा देखना। 

तीन दिनों में चाय पत्ती बेचने वाले से चाय बेचने वाले बने अभिभावक

baghpat: school refuse to admission of tea vendor's son
मंगतराम की मोहल्ला ठाकुरद्वारा में चाय की पत्‍ती की दुकान - फोटो : kuldeep kumar/amar ujala

इस सारी लड़ाई के बीच दो दिन पहले अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया तो मामला नेशनल मीडिया की सुर्खियों तक भी पहुंच गया। इसके बाद तेजी से घटनाक्रम बदला और शनिवार को डीएम ने छात्र के पिता मंगतराम और स्कूल के प्रधानाचार्य विक्रम सिंह को अपने सामने बुलवाया। 

वहां से दोनों पक्षों को डीआईओएस के यहां भेजा गया। यहां काफी देर चली बातचीत के बाद छात्र को स्कूल में एडमिशन देने पर सहमति बन गई। डीआईओएस ने अपने दो कर्मचारियों को मंगतराम के साथ भेजकर छात्र का एडमिशन करवाया। लेकिन इस सारी लड़ाई में खास बात ये रही कि तीन दिन पहले तक ठाकुरद्वारा में थोक की 'चाय की पत्ती' की दुकान चलाने वाले मंगतराम जैन 'चाय बेचने' वाले वेंडर बन गए। 

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उन्हें 'चाय बेचने' वाला ही बताया गया। हालांकि न खुद मंगतराम ने इसका विरोध किया न किसी और ने। बात शायद एक छात्र के एडमिशन और उसके भविष्य की जो थी। इसलिए यह कहानी दबी रह गई, लेकिन तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं.....।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed