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देश के कई राज्यों में मौसम की मार: पहाड़ से मैदान तक... हर तरफ तबाही, अब तक 500+ मौतें; हजारों करोड़ के नुकसान

Sun, 07 Sep 2025 05:51 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क।
अमर उजाला नेटवर्क। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 07 Sep 2025 05:51 AM IST
सार

जलवायु परिवर्तन और तेजी से बदलते मौसम के मिजाज के बीच पहाड़ से लेकर मैदानी राज्यों में भारी तबाही हुई है। अलग-अलग राज्यों में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। 500 से अधिक लोगों की मौत होने के अलावा कई राज्य हजारों करोड़ के आर्थिक नुकसान भी झेल रहे हैं। किस राज्य में कैसा है मौसम का मिजाज? इस रिपोर्ट में जानिए

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Bad Weather Updates devastation in many states mountains to plains 500 plus deaths thousands crores loss news
देशभर में मौसम की मार (फाइल) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

खराब मौसम, बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं के कारण देश के कई राज्य प्रभावित हुए हैं। जम्मू-कश्मीर में अब तक 123 लोगों की जान जा चुकी है। हरियाणा में 24 से अधिक मौतों के अलावा कई एकड़ में खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। पहाड़ी राज्य हिमाचल में बीते ढाई माह में 360 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। सरकारी आंकड़े के मुताबिक 3900 करोड़+ का नुकसान हुआ है। उत्तराखंड में भी हर तरफ तबाही का मंजर है। राज्य सरकार ने नुकसान के मुआवजे के तौर पर केंद्र सरकार से 5700 करोड़ का राहत पैकेज मांगा है। पंजाब की नदियों में उफान के बाद 1500 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

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पहाड़ी राज्यों का हाल
उत्तराखंड महीने भर से आपदाओं से जूझ रहा है। ग्लेशियर टूटकर गिर रहे हैं। अचानक बादल फट रहे हैं। नदियां पूरे वेग से उफान पर हैं। लगातार बन रहीं अस्थायी झीलों ने बड़ी आबादी, सरकार और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। नए भूस्खलन क्षेत्र बनने से जगह-जगह पहाड़ दरक रहे हैं। जमीन और मकानों में गहरी दरारें पड़ गई हैं। इस वर्ष राज्य को 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद सबसे बड़ी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। राज्य की आर्थिकी चारधाम यात्रा से भी जुड़ी है, मगर सीजन में 55 दिन यात्रा नहीं हो सकी। राज्य सरकार ने हालात से उबरने के लिए केंद्र से 5,702 करोड़ की विशेष सहायता मांगी है। राज्य के 13 जिलों में से दस किसी न किसी रूप में आपदा की चपेट में हैं। एक अप्रैल से 31 अगस्त तक 79 लोग जान गंवा चुके हैं।
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हिमाचल में ढाई माह में 360 की मौत, 3979 करोड़ का नुकसान
देश का एक और पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ढाई महीनों से प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। बादल फटने, भारी बारिश, बाढ़ व भूस्खलन के कारण जून माह के आखिरी सप्ताह से लेकर अब तक 360 लोगों की मौत हो चुकी है। 47 लोग लापता हैं। इस मानसून सत्र में सैकड़ों घर जमींदोज हो गए। 5,162 घर क्षतिग्रस्त हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 3,979 करोड़ का नुकसान हो चुका है। प्रदेश के सभी जिले आपदा का दंश झेल रहे हैं, लेकिन कुल्लू, मंडी, चंबा, शिमला व कांगड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ढाई माह के दौरान ही प्रदेश में 50 से ज्यादा स्थानों पर बादल फटे हैं, जबकि बाढ़ की 96 और भारी भूस्खलन की 133 घटनाएं हो चुकी हैं।

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पंजाब के 1500 गांव बाढ़ की चपेट में, 3.87 लाख लोग प्रभावित
आपदा की चपेट में आए पंजाब में नदियों के उफान से तबाही का मंजर है। इतिहास की सबसे बड़ी बाढ़ त्रासदी ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अब तक 46 लोगों की जानें जा चुकी हैं। 1.74 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है। सभी 23 जिलों के करीब 1500 गांव और 3.87 लाख से अधिक आबादी बाढ़ की चपेट में है। लोगों के आशियाने, सामान और पशुधन बाढ़ में बह चुके हैं। 

हरियाणा में अब तक 24 से अधिक मौतें...फसलें बर्बाद
देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सरहद पर बसे राज्य हरियाणा के 12 जिले बाढ़ जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। 27 साल बाद सामान्य से 48% ज्यादा बारिश से चारों प्रमुख नदियां यमुना, मारकंडा, टांगरी और घग्घर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। अंबाला, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, कैथल, रोहतक, पलवल, सिरसा व दादरी के हजारों घर पानी में घिरे हैं।  अब तक 24 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। 1.92 लाख किसानों की 11 लाख एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा है। पलवल, फरीदाबाद, फतेहाबाद, भिवानी, कुरुक्षेत्र व अंबाला में 2,247 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। झज्जर के बहादुरगढ़ में सेना के जवान भी बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। हाल ये है कि प्रदेश के पांच नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित चल रहा है।

जम्मू-कश्मीर में इस दशक की सबसे बड़ी त्रासदी, अब तक 123 लोगों ने गंवाई जान
जम्मू-कश्मीर के लिए अगस्त का महीना भारी तबाही लेकर आया। यह एक दशक में प्राकृतिक आपदा का यह सबसे बड़ा प्रहार है। इस तबाही ने राज्य में हो रहे तीव्र विकास की गति को काफी पीछे धकेल दिया है। प्राकृतिक आपदा में 123 लोगों की जानें जा चुकी हैं। लापता लोगों का 23 दिन बाद भी पता नहीं चल सका है। बादल फटने की घटनाओं में हो रही बढ़ोतरी से लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। आसमानी आफत के जख्म इतने गहरे हैं कि उन्हें भरने में बरसों लगेंगे। सबसे भारी तबाही किश्तवाड़ के चिशोती में हुई। मछेल में मां चंडी का दर्शन करने पहुंचे हजारों लोग बादल फटने और पहाड़ों से आए भारी मलबे में फंस गए। 68 लोगों की मौत हो गई। तमाम लोग अब भी लापता हैं। जम्मू-कश्मीर में 2014 में भी ऐसी ही आपदा आई थी। तब जम्मू में तवी रिवर फ्रंट निर्माण की योजना शुरू हुई। 2023 तक इसे पूरा होना था, मगर अभी यह काम अधूरा है। अलबत्ता रिवर फ्रंट का जितना भी काम अब तक हुआ है, उसने इस बार की तबाही में रक्षा कवच का काम किया है। 

रेड अलर्ट के बीच राजस्थान में भारी बारिश
मौसम विभाग की तरफ से जारी रेड अलर्ट के बीच राजस्थान के कई क्षेत्रों में शनिवार को भारी बारिश हुई। इसमें यातायात व्यवस्था चरमरा गई और संपत्ति का भी भारी नुकसान हुआ। जयपुर में एक जर्जर मकान का एक हिस्सा गिरने से एक व्यक्ति और उसकी बेटी की मौत हो गई और पांच लोग घायल हो गए। कोटा के एक गांव में बिजली की चपेट में आने से एक व्यक्ति की जान चली गई। भीलवाड़ा में भारी बारिश के बाद रिहायशी कॉलोनियों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। मौसम की स्थिति को देखते हुए अजमेर, उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा और सलूंबर में शनिवार को स्कूल बंद रहे। राजसमंद कुंभलगढ़ उपखंड में शुक्रवार रात से हो रही भारी बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-162 का एक हिस्सा बह गया, जिससे यातायात को डायवर्ट करना पड़ा।

माता वैष्णो देवी यात्रा 12वें दिन भी स्थगित
इन राज्यों की खबरों के आधार पर साफ है कि उत्तर भारत, खासतौर पर पहाड़ी राज्यों में बारिश और भूस्खलन का कहर जारी है। लगातार खराब मौसम और तीर्थयात्रा मार्ग पर भूस्खलन की घटनाओं के कारण माता वैष्णो देवी यात्रा शनिवार को लगातार 12वें दिन भी स्थगित रही। पिछले कई दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण त्रिकुटा पहाड़ियों में भूस्खलन और सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं, जिससे तीर्थयात्रा मार्ग श्रद्धालुओं के लिए असुरक्षित हो गया है।
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