फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Azamgarh Ground report Malnutrition becomes major Problems Lack of blood in Child but Still away from treatment

आजमगढ़ ग्राउंड रिपोर्ट: सूख रहा मासूमों का खून... इलाज से फिर भी दूर

Fri, 08 Jan 2021 02:59 AM IST
देव कश्यप आशुतोष यादव, आजमगढ़
आशुतोष यादव, आजमगढ़ Published by: देव कश्यप Updated Fri, 08 Jan 2021 02:59 AM IST
विज्ञापन
सार
  • 60 फीसदी महिलाओं और 52 फीसदी बच्चों में है यहां खून की कमी
  • ज्यादातर मां-बाप को नहीं हो पाती बच्चे के कुपोषित होने की जानकारी
loader
Azamgarh Ground report Malnutrition becomes major Problems Lack of blood in Child but Still away from treatment
आजमगढ़ के पवई ब्लाक में लाभार्थियों को पोषण आहार वितरित करती आगनबाड़ी कार्यकत्री किरन सोहायल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंद्रमा ऋषि, दत्तात्रेय और दुर्वासा ऋषि की तपोस्थली, कैफी आजमी के गीत, राहुल सांकृत्यायन और अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध के साहित्य से लहलहाने वाला आजमगढ़ जिला अब कुपोषण और एनीमिया के बदनुमा दाग के रूप में जाना जाता है। जिले में गरीबी और कम उम्र में शादी होने के कारण कुपोषित बच्चों की संख्या लगभग 42 हजार से अधिक है। इसके बावजूद पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चे भर्ती नहीं हो रहे हैं।



जिले में कुपोषित और एनीमिक बच्चों के मां-बाप को समय पर यह भी जानकारी नहीं मिल पाती है कि उनके लाडले कुपोषण की चपेट में आ चुके हैं। साठ फीसदी महिलाओं और 52 फीसदी बच्चों में एनीमिया के मामले मिलते हैं। मेडिकल कॉलेज में एक महीने में पंद्रह से बीस ऐसे बच्चे इलाज के लिए पहुंचते हैं जिनको खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।



खुशी को चलने में हुआ दुख, तब कुपोषण की हुई जानकारी
फूलपुर तहसील के अरपति गांव निवासी अनीता के पति धर्मेंद्र प्राइवेट नौकरी करते हैं। दो साल की बेटी खुशी के पैर अभी तक बेजान हैं। बच्ची चलने का प्रयास करती है, लेकिन चल नहीं पाती है। उसका विकास भी नहीं हो रहा है। बच्ची के पैदा होने के बाद डेढ़ साल तक उन्हें पता नहीं चल पाया कि वह कुपोषित है। जब डेढ़ साल पर लगने वाला टीका लगवाने के लिए टीकारण सेंटर पर गईं तो एएनएम ने कहा कि बच्ची का विकास नहीं हो रहा है। सरकारी अस्पताल में ले जाओ। जिला अस्पताल जाने के लिए पर्याप्त किराया नहीं था, क्योंकि घर से आजमगढ़ अस्सी किलोमीटर दूर है। पवई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज कराना शुरू किया। आंगनबाड़ी से लगातार पुष्टाहार मिल रहा था। पिछले दो महीने से सूखा राशन मिल रहा है। अब बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार है।

दो साल तक चल नहीं पाया बच्चा, फिर भी नहीं गए एनआरसी

आजमगढ़ एनआरसी में इलाज के लिए भर्ती बच्चे अपनी मां प्रियंका के साथ
आजमगढ़ एनआरसी में इलाज के लिए भर्ती बच्चे अपनी मां प्रियंका के साथ - फोटो : अमर उजाला

आजमगढ़ से 65 किलोमीटर दूर पवई ब्लॉक के मित्तूपुर में एएनएम सेंटर के पास राजू शर्मा रहते हैं। उनका तीन साल का बेटा चलने में असमर्थ है। बेटे को जन्म देने के दौरान ही राजू की पत्नी की मौत हो गई थी। दो बेटियां पहले से ही थीं बच्चे का पालन पोषण उसकी दादी कर रही हैं। भूमिहीन राजू को पता नहीं चल पाया कि उनका बेटा कुपोषित है। शुरुआत में ही उसके पैर पतले थे, लेकिन डॉक्टर के पास जाने के लिए समय नहीं मिल पाता था।

राजू का कहना है कि काम पर नहीं जाएंगे तो खाने के लिए परेशानी होगी। दो साल होने के बाद भी चलना शुरू नहीं किया तब वह पड़ोस में एएनएम सेंटर पर गए तो वहां पर टीकाकरण के दौरान एएनएम ने कहा कि पोषण पुनर्वास केंद्र पर ले जाकर भर्ती करवा दो। वहां पर निशुल्क इलाज के साथ ही प्रतिदिन मां को भी 50 रुपये मिलेंगे, लेकिन दादी केंद्र पर इसलिए नही गयी कि दोनों पोतियों की देखभाल कौन करेगा। बच्चे का इलाज स्थानीय स्तर पर कराने के साथ ही आंगनबाड़ी का पुष्टाहार दे रहे हैं।


जुड़वा बच्चे इलाज के बाद हुए स्वस्थ
शहर में ही सिबली कालेज के पास प्रियंका रहती हैं। उनके पति विजय ठेली लगाकर छोटा व्यवसाय करते हैं। प्रियंका ने जुड़वा बेटे और बेटी को जन्म दिया। शुरुआती दौर में पड़ोसियों ने प्रियंका से कहा कि बच्चे जुड़वा हैं, इसलिए कमजोर हैं। स्वयं के खाने-पीने पर ध्यान दें तो दूध बनेगा और बच्चे धीरे-धीरे स्वस्थ हो जाएंगे। छह महीने बाद बच्चों के हाथ-पैर सूखने के साथ ही पेट बाहर निकलने लगा और चमड़ी बुजुर्गों की तरह सूखकर झुर्रियां पड़ने लगी, तब प्रियंका पति धर्मेंद्र के साथ जिला अस्पताल में इलाज कराने बच्चों को ले गई। वहां दोनों बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कर लिया गया। अब दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।

लॉकडाउन के दौरान आठ नाबालिग शादियां रुकवाई

अरपति गांव में कुपोषित बच्ची के साथ मां अनिता और मित्तूपुर गांव में दादी की गोद में तीन वर्षीय अति कुपोषित बच्चा
अरपति गांव में कुपोषित बच्ची के साथ मां अनिता और मित्तूपुर गांव में दादी की गोद में तीन वर्षीय अति कुपोषित बच्चा - फोटो : अमर उजाला

बचपन संस्था के संचालक डॉ. अविनाश राजभर ने बताया कि क्षेत्र में अभी गरीबी बहुत है। लोग सोचते हैं कि ज्यादा उम्र में शादी करेंगे तो दहेज अधिक देना होगा। इसलिए कई क्षेत्रों में लोग कम उम्र में ही बेटी की शादी कर देना चाहते हैं। राजभर ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान छह लड़कियों की शादी उनके परिजनों को समझाकर रोक दी गई, जबकि दो मामलों में पुलिस का सहारा लेना पड़ा था।

बाल रोग विशेषज्ञ एवं एनआरसी प्रभारी डॉ. कासिफ असरार बताते हैं कि 'गरीबी के कारण मां को पोषक आहार नहीं मिल पाता है। इससे एनीमिक होती हैं, जो बच्चा पैदा होता है वह एनीमिक होने के साथ ही कुपोषित भी हो जाता है। लोगों को जागरूक किया जाता है कि बच्चे को एनआरसी पर ले आएं। यहां बच्चे के इलाज के साथ ही मां को निशुल्क भोजन और प्रतिदिन का भत्ता भी दिया जाता है। जो बच्चे यहां पर आते हैं, उनका जल्दी ही 15 प्रतिशत वजन इसलिए बढ़ जाता है कि देखभाल सही हो जाती है।'
 
डीपीओ सुनील कुमार मौर्य ने बताया कि 'पिछले छह महीने में कुपोषण में कमी आई है। जिन क्षेत्रों में कुपोषित बच्चे मिलते हैं, उन्हें आंगनबाड़ी की मदद से एनआरसी पर लाया जाता है। 24 ब्लॉक में कुल 4,81,073 बच्चों का वजन किया गया था। इनमें से 41,551 बच्चे कुपोषित और 7,415 बच्चे अतिकुपोषित हैं। 40,32,107 बच्चे सामान्य हैं। बिलारीगंज में सबसे अधिक 602 बच्चे अतिकुपोषित हैं इस बार वहां पर भी संख्या में कमी आई है।

एनआरसी पर नहीं मिला एक भी बच्चा भर्ती
जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) पर अमर उजाला की टीम पहुंची तो न्यूट्रीशियनिस्ट रिचा सिंह रजिस्टर दुरुस्त कर रही थीं। सेंटर पर एक भी बच्चा न होने से खाली था। रिचा सिंह ने बताया कि इस समय आरबीएसके की टीम कोरोना सर्वे में लगी है। आंगनबाड़ी द्वारा कोई सहयोग नहीं मिलता है, इसलिए सेंटर खाली चल रहा है। उन्होंने बताया कि जनवरी से मार्च तक 29, जून में एक, सितंबर से 20 दिसंबर तक 18 बच्चे स्वस्थ हो चुके हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed