जन्मभूमि के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने वाल्मीकि रामायण से वर्ड्सवर्थ तक का किया जिक्र
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विधान पीठ ने फैसले में भगवान राम के जन्मस्थान के पक्ष में महर्षि वाल्मीकि की रामायण से लेकर ब्रिटेन के 17वीं सदी के चर्चित कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की कविता, भारत आने वाले ब्रिटिश यात्री विलियम फिंच के यात्रा विवरण तक का जिक्र किया।
पीठ ने लिखा, ऐतिहासिक साक्ष्यों और विशेषज्ञों द्वारा दिए वैज्ञानिक सुबूतों से यह साबित होता है कि मस्जिद किसी मंदिर की जमीन पर मंदिर तोड़कर बनाई गई थी। आस्था और विश्वास आत्मा की आध्यात्मिक जिंदगी को बढ़ावा देता है। हर धर्म भगवान की महिमा का गुणगान करता है। सभी इससे जुड़ना चाहते हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि वाल्मीकि रामायण और स्कंद पुराण सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों के कारण हिंदुओं का विश्वास है कि वह जगह राम का जन्मस्थान है। कोर्ट ने कहा कि धार्मिंक ग्रंथों की बातों को आधारहीन करार नहीं दिया जा सकता।
पीठ ने यह भी पाया कि रामचरित मानस और आइने अकबरी में भी अयोध्या को धार्मिक स्थल बताया गया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विलियम फिंच, जोसफ टेफेनथेलर आदि विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांतों, ईस्ट इंडिया गेजेटियर ऑफ वाटर हैमिल्टन सहित अन्य ऐतिहासिक साक्ष्यों को भी आधार बनाया।
भगवान राम के जन्म के बारे में वाल्मीकि रामायण में जिक्र है, जिसे मुकदमे की एक गवाह इतिहासकार सुवित्रा जायसवाल के बयान में हवाला दिया गया है। उन्होंने कहा, वाल्मीकि रामायण का वक्त 300 ईसा पूर्व से 200 ईसा पूर्व निर्धारित है। इसके एक श्लोक में भगवान राम को विष्णु का अवतार बताया गया है। जो कौशल्या के गर्भ से पैदा हुए, जो महाराजा दशरथ की पत्नी थीं।
अंग्रेजी के मशहूर कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की इस कविता का हवाला
हमारा जन्म एक नींद और एक भूल है;
आत्मा जो हमारे साथ, हमारे जीवन के सितारों के साथ जन्म लेती है
हमारा जन्म कहीं और तय था,
और हम फिर दूर से आते हैं;
संपूर्ण विस्मृति में नहीं,
और बिल्कुल नंगेपन में नहीं,
लेकिन महिमा के बादलों से होते हुए हम,
भगवान के यहां से आते हैं, जो हमारा घर है।
वाल्मीकि रामायण के बालकांड के एक श्लोक का जिक्र भी
प्रोद्यमाने जगन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम्।
कौसल्याजनयद् रामं दिव्यलक्षणसंयुतम।।
यानी कौशल्या ने एक बेटे को जन्म दिया, जो पूरे जगत के भगवान हैं। जो पूरे जगत के इष्ट हैं। वह आम आदमी जैसे नहीं हैं। उनमें अलौकिक शक्तियां हैं।