फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Ayodhya : Muslim side will file reconsideration petition for mosque rights

अयोध्या : मस्जिद के हक के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा मुस्लिम पक्ष

Mon, 18 Nov 2019 05:08 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 18 Nov 2019 05:08 AM IST
विज्ञापन
Ayodhya : Muslim side will file reconsideration petition for mosque rights
सुफ्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लखनऊ में हुई मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक के निर्णय से सरोकार रखने वाले अयोध्या के मुस्लिम पक्षकारों ने कहा कि हक के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करना जरूरी है।

विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने खुद यह माना है कि साल 1856 से लेकर 1949 तक यहां नमाज अदा की जाती रही है। साथ ही मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई थी और मूर्ति रखे जाने की घटना गलत थी।
विज्ञापन


मस्जिद को ढहाए जाने की घटना को भी गैरकानूनी माना गया है। लेकिन मस्जिद का स्थान दूसरी जगह दे दिया गया है। मस्जिद का स्थान दूसरी जगह क्यों हुआ और मस्जिद के हक फैसला क्यों नहीं दिया गया, इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

यह हमारा कानूनी हक : बादशाह खान

बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे मुफ्ती बादशाह खान बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अब तक दूसरे पक्ष से लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

कोर्ट ने माना है कि बाबरी मस्जिद थी, उसको ढहाया जाना गैर कानूनी था, वहां साल 1949 तक नमाज पढ़ी जाती थी, साथ ही किसी मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण नहीं किया गया था लेकिन फैसले में विवादित स्थान दूसरे पक्ष को देते हुए मस्जिद के लिए अलग से जगह दिए जाने की बात कही गई है।

उन्होंने बताया है कि हम जब सब जगह सही हैं तो हमें दूसरी जगह जमीन क्यों दी जाए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार याचिका दायर होगी। यह हमारा कानूनी हक है।

जनहित के लिए किया जाता है धारा 142 का प्रयोग : खालिक

मौलाना महफूज उर रहमान के नामिनी पक्षकार मो. खालिक का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने मुस्लिम समुदाय पर लगे सभी पूर्ववत आरोपों को खारिज किया है।

बाबरी मस्जिद का बिना किसी मंदिर को तोड़कर होने से लेकर नमाज होने तक की बात को स्वीकार किया है लेकिन अपने फैसले में संविधान की धारा 142 का प्रयोग किया है।

वह बताते हैं कि संविधान की धारा 142 का वजूद इसलिए हुआ है कि यह सिर्फ जनहित के कार्यों के लिए लिया जा सके न कि इस धारा का प्रयोग कर किसी के साथ अन्याय किया जाए। उन्होंने बताया है कि मस्जिद को अन्यत्र जगह क्यों दी गई, इसको लेकर पुर्नविचार याचिका दायर की जाएगी।

फैसले में खामियां इसलिए करेंगे याचिका : मो. उमर

बाबरी मस्जिद के मुद्दई मो. उमर का कहना है कि उनको रविवार को लखनऊ बुलाया गया था। सुन्नी वक्फ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने फैसले के बाबत सारी बातों को बताया है।

मो. उमर का कहना है कि फैसले में कई खामियां है। जब सुप्रीम कोर्ट सारी बातों को मान रहा है तो अखिर में फैसला क्यों दूसरे पक्ष के हक में दे रहा है, यह जानना जरूरी है।

वह बताते हैं कि यह कानूनी लड़ाई है, इसमें हम सुन्नी वक्फ बोर्ड व मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं। वह बताते हैं कि जब हम कोर्ट जाएंगे तो सारी बातें स्पष्ट हो जाएंगी।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed