फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम बोले, रिविजन का रास्ता निकला तो ठीक, अन्यथा फैसला मानेंगे
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कोई भी समुदाय इस फैसले को हार-जीत के तौर पर न ले। इसे कानून के तौर पर लें और पालन करें। किसी भी सूरत में आपसी भाईचारा खराब न करें। सभी धर्म एक दूसरे का आदर करते हुए आगे बढ़ें।
डॉ. मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम ने कहा, जैसा हम सुन रहे हैं कि 1528 में विवादित ढांचे वाली जगह पर मस्जिद बनी थी। ऐसे सबूत सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बताए जा रहे हैं, जबकि वहां मंदिर तोड़ने का कोई सबूत नहीं मिला है। हमें उम्मीद है कि इंसाफ मिलेगा। इस फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट को पुख्ता माना गया है। हकीकत यह है कि इस रिपोर्ट में ज्यादा ठोस साक्ष्य नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि देश में सभी मजहबों की भावनाओं का ख्याल रखा जाएगा। तब तक फैसले को कानून के तौर पर लें। कानून की नजर में तो इस विवाद का निपटारा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट में रिविजन के लिए जाएंगे, कुछ हुआ तो ठीक, अन्यथा कानून का पालन करेंगे। यदि कोई व्यक्ति इस फैसले में किसी तरह की हार जीत देखता है तो वह गलत है।दोनों समुदायों को मिलकर रहना है।