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Ayodhya Verdict: फैसले से खुश नहीं है सुन्नी वक्फ बोर्ड, लोगों से कहा शांति बनाए रखें

Sat, 09 Nov 2019 12:50 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 09 Nov 2019 12:50 PM IST
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Ayodhya Case Verdict 2019: Hindu Mahasabha happy with verdict, Sunni waqf board is not satisfied
वकील वरुण कुमार सिन्हा- वकील जफरयाब जिलानी - फोटो : ANI

उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या विवाद पर शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। पांच मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई के नेतृत वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। जानें फैसला आने के बाद किसने क्या कहा।

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हमको दान में क्या दे रहे हैं

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कमाल फारूकी ने कहा, 'इसके बदले हमें 100 एकड़ जमीन भी दे दो कोई फायदा नहीं है। हमारी 67 एकड़ जमीन पहले ही अधिग्रहित की हुई है तो हमको दान में क्या दे रहे हैं वो? हमारी 67 एकड़ जमीन लेने के बाद पंच एकड़ दे रहे हैं। ये कहां का इंसाफ है?'

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उच्चतम न्यायालय का आभारी है निर्मोही अखाड़ा

निर्मोही अखाड़े के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने कहा, 'निर्मोही अखाड़ा आभारी है कि उच्चतम न्यायालय ने पिछले 150 वर्षों की हमारी लड़ाई को मान्यता दी है और श्री राम जन्मस्थान मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किए जाने वाले ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है।'

 

अदालत के निर्णय से हल हुआ बहुत बड़ा मसला

मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, 'हम सर्वोच्च अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। हमने पहले भी कहा था कि अदालत का फैसला मानेंगे। आज भी कह रहे हैं कि हम इसे मानते हैं। अब देखना है कि सरकार हमें मस्जिद निर्माण के लिए कहां जगह मिलती है। फिलहाल अदालत के इस निर्णय से एक बहुत बड़ा मसला हल हो गया है।

दावा खारिज होने का अफसोस नहीं: निर्मोही अखाड़ा

निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ पंच महंत धर्मदास ने कहा कि विवादित स्थल पर अखाड़े का दावा खारिज होने का कोई अफसोस नहीं है, क्योंकि वह भी रामलला का ही पक्ष ले रहा था। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि निर्मोही अखाड़े का दावा कानूनी समय सीमा के तहत प्रतिबंधित है।

हिंदू महासभा ने फैसले को बताया ऐतिहासिक

अदालत का फैसला आने के बाद हिंदू महासभा के वकील वरुण कुमार सिन्हा ने कहा, 'यह ऐतिहासिक फैसला है। इस फैसले के साथ, सर्वोच्च न्यायालय ने विविधता में एकता का संदेश दिया है।'

फैसले से सहमत नहीं

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा, 'हम फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। हम आगे की कार्रवाई तय करेंगे। पूरे मुल्क की आवाम से अपील है कि शांति बनाए रखें। इसे लेकर कहीं भी किसी प्रकार का कोई प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। यदि हमारी समिति मान जाती है तो हम पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे। यह हमारा अधिकार है और यह उच्चतम न्यायालय के नियमों के अधीन भी है।'

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