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आरएसएस नेता ने की सुप्रीम कोर्ट की निंदा, कहा- राम मंदिर पर तैयार है केंद्र सरकार का कानून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 28 Nov 2018 08:37 AM IST
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अयोध्या राम मंदिर
- फोटो : PTI
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि देश का संविधान जजों की बपौती नहीं, जो उनके मुताबिक चलेगा। उन्होंने कहा, "मैं नाम नहीं बताऊंगा क्योंकि 125 करोड़ भारतीय उनके नाम जानते हैं, तीन जजों की बेंच वहां थी। उन्होंने देरी की, अस्वीकार किया, उन्होंने अनादर किया। ये उन्होंने उचित नहीं किया।"
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कुमार ने दावा किया कि सरकार कानून के साथ तैयार है। राम मंदिर मामले में कुछ जजों ने सुनवाई नहीं की, कुछ ने देरी की। कोर्ट के फैसले का इंतजार भाजपा सरकार करती रही लेकिन अब राम मंदिर के लिए 11 दिसंबर के बाद बिल आएगा।I haven’t taken names because 125 crore Indians know their names, a three-judge bench(SC) was there. They delayed, they denied, they disrespected. Yeh unho ne anuchit kiya hai: Indresh Kumar, RSS on Ayodhya case pic.twitter.com/mYeXCRXi5T
— ANI (@ANI) November 28, 2018
इंद्रेश कुमार पंजाब विश्वविद्यालय के इंग्लिश डिपार्टमेंट में जोशी फाउंडेशन की ओर से आयोजित राम मंदिर पर हुए कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 1470 में इस्लाम के अंतिम रसूल मोहम्मद साहब 38 दिन के पैदल सफर पर मदीना से मक्का लौटे तो उन्होंने अपने कोटेशन में कहा था कि जब भी मैं तन्हा या तन्हाई में होता हूं तो मुझे हिंद की सरजमीं से एक ठंडी हवा आती है, जो मुझे सुकून पहुंचाती है। कहा, आज इसी जमीन पर लोग जहर उगलने का काम कर रहे हैं। विदेशी स्कॉलरों का उदाहरण देते हुए कहा, ब्रुनी समेत 700 से अधिक स्कॉलर ने लिखा है कि हिंदुस्तान के एक भी घर में ताला नहीं लगता, भिखारी कहीं नहीं मिलते। भूख से कोई आदमी नहीं मरता लेकिन आज कौन सा ग्रहण लग गया, जो सब कुछ पलट गया है।
मुगल बादशाहों ने हिंदुस्तान को तबाह किया
उन्होंने मुहम्मद कासिम से लेकर औरंगजेब तक मुगलों के काल को लोगों के सामने रखा। कहा, इस काल में जो भी मुगल शासक आए उन्होंने न देश को कोई विश्वविद्यालय दिया और न अस्पताल। वह हिंदुस्तान को आगे बढ़ता नहीं देखना चाहते थे। कहा, इन्हीं मुगल शासकों ने लोगों के धर्म बदले, हत्याएं की, मकबरे व मस्जिदें बनवाईं। 1526 में मंगोलियाई बादशाह बाबर आया। उसने अयोध्या के नाम को बदलकर फैजाबाद किया। इसी तरह प्रयागराज का नाम बदलकर इलाहाबाद किया। उन्होंने कहा, क्या भगवान राम फैजाबाद गए थे? यदि नहीं तो क्या उसे स्वीकार करेंगे। कहा, जब काबा नहीं बदला जा सकता, स्वर्ण मंदिर का स्थान नहीं बदला जा सकता तो फिर राम मंदिर का स्थान कैसे बदला जा सकता है।
बाबर के रास्ते चलने वालों ने इस्लाम को कुचला
इंद्रेश ने कहा कि इस्लाम में लिखा है, मस्जिद उसी जगह बनती है जो जमीन पाक होने के अलावा वक्फ की हो या दान में मिली हो। किसी अन्य धार्मिक स्थल को तोड़कर यदि मस्जिद बनाई जाती है तो वह भी गुनाह माना जाएगा लेकिन बाबर ने इस्लाम को कुचल डाला। कहा कि बाबर के पदचिन्हों पर चलने वाले उसी की मानसिकता के हैं।
जजों के साथ कांग्रेसी मिले हुए
हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के जजों की ढील पर भी उन्होंने प्रहार किए। कहा, सुबूत सामने हैं कि वहां राम मंदिर था लेकिन एक जज ने मामला सुप्रीम कोर्ट रेफर कर दिया। कांग्रेस ने भी साथ दिया। कहा, कोर्ट का समय बर्बाद किया गया लेकिन अब सरकार भी राम मंदिर के लिए बिल लाने जा रही है। जैसे ही 11 दिसंबर को आचार संहिता हटेगी, उसके बाद प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस मुद्दे पर जनता शांत है। हर वर्ग को राम मंदिर कुबूल है। उन्होंने लोगों से कह दिया कि जिस तरह स्वामी विवेकानंद में अमेरिका ने श्रद्धा रखी लेकिन स्वामी वहां के इतिहास में नहीं, उसी तरह गांधी जी अफ्रीका के इतिहास में नहीं तो फिर हिंदुस्तान में आक्रांताओं का इतिहास देश कैसे कुबूल करेगा।