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अयोध्या केस: क्या है मोल्डिंग ऑफ रिलीफ, सीजेआई ने रद्द किया विदेश दौरा

Thu, 17 Oct 2019 11:47 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Thu, 17 Oct 2019 11:47 AM IST
सार

  • 40 दिन चली जिरह तय समय से एक घंटे पहले पूरी
  • 17 नवंबर को सीजेआई के रिटायर होने से पहले आ सकता है फैसला
  • मध्यस्थता पैनल ने भी सौंपी संविधान पीठ को दूसरी रिपोर्ट
  • केशवानंद मामले के बाद न्यायिक इतिहास की दूसरी सबसे लंबी सुनवाई

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Ayodhya Case hearing molding of relief supreme court ram janmabhoomi babri masjid case ranjan gogoi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में 40 दिन चली जिरह के बाद सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ अब दशकों पुराने इस मामले का फैसला सुनाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले पर एक महीने के अंदर फैसला आ सकता है, हालांकि अदालत की ओर से फैसले की कोई तारीख निश्चित नहीं की गई है।

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क्या है मोल्डिंग ऑफ रिलीफ (राहत में बदलाव)

दोनों पक्षों की ओर से अपील के दौरान जो गुहार लगाई गई है क्या इससे भी इतर आगे-पीछे क्या कुछ गुंजाइश बनती है? पक्षकारों को लिखित रूप में यह बताने के लिए कहा गया है। हालांकि यह देखने वाली बात होगी कि इस मामले में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ सिद्धांत किस हद तक लागू किया जा सकता है। इसके अलावा पीठ ने सभी पक्षों से तीन दिनों के भीतर मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर अपना-अपना लिखित पक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। पीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई मौखिक बहस नहीं होगी।

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सीजेआई ने रद्द किया विदेश दौरा

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने 17 नवंबर को सेवानिवृत्ति से पूर्व होने वाले अपने विदेश दौरे को रद्द कर दिया है। अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ के अध्यक्ष सीजेआई गोगोई को दक्षिण अमेरिका के कुछ देशों, मध्यपूर्व सहित कुछ अन्य देशों की आधिकारिक यात्रा पर जाना था। सूत्रों ने बताया कि सीजेआई ने प्रस्तावित विदेश यात्राओं को अंतिम रूप मिलने से पहले इन्हें रद्द कर दिया। गोगोई ने पिछले साल तीन अक्तूबर को 46वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।

न्यायिक इतिहास की दूसरी सबसे लंबी सुनवाई

40 दिनों तक चली अयोध्या मामले की सुनवाई इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में केशवानंद भारती मामले के बाद दूसरी लंबी सुनवाई थी। केशवानंद मामले में 68 दिन चली जिरह के बाद सुप्रीम कोर्ट की 13 सदस्यीय पीठ ने 31 अक्तूबर, 1972 को फैसला सुनाया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुनवाई

संविधान पीठ अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर बांटने के आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ सुनवाई कर रही है। शीर्ष कोर्ट ने हाईकोर्ट के 30 सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ 14 अपीलों सुनवाई की।

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