Shubhanshu on India from Space: अंतरिक्ष से जब पहली बार भारत को देखा.. बहुत भव्य दिखता है, हम सब मानवता के अंश
Shubhanshu On India From Space: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने आज जब पीएम मोदी ने बातचीत की तो उन्होंने 41 साल पहले की घटना की याद दिला दी। दरअसल, शुभांशु शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष से देखने पर हमारी पृथ्वी और भारत कैसा दिखता है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से भारत बहुत भव्य दिखता है। जानिए प्रधानमंत्री के सामने प्रकट हुआ शुभांशु का यह एहसास क्यों है खास..
विस्तार
एक्सिओम-मिशन में तीन अन्य देशों के सहयात्रियों के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर गए भारतीय अंतरिक्ष यात्री और ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान बताया कि अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी के साथ-साथ देश कैसा लगता है।
भारत सच में बहुत भव्य, बहुत बड़ा दिखता है
करीब 18 मिनट के संवाद में पीएम मोदी ने शुभांशु से कहा, परिक्रमा करना भारत की सदियों पुरानी परंपरा है। आपको तो पृथ्वी माता की परिक्रमा का सौभाग्य मिला है। उन्होंने पूछा, अंतरिक्ष की विशालता देखकर सबसे पहले आपको क्या विचार आया? इस पर शुभांशु ने कहा, भारत सच में बहुत भव्य दिखता है, बहुत बड़ा दिखता है। जितना हम मैप पर देखते हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ा है।
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सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा...
शुभांशु के यह एहसास ठीक वैसा ही है, जब देश के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सवाल पर कहा था, सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा...। दरअसल, खगोल विज्ञान की दुनिया में जब पहली बार कोई मानव अंतरिक्ष में जाता है तो यह बेहद संवेदनशील होने के साथ-साथ और विशिष्ट अवसर भी होता है। लगभग 41 साल पहले भारतीय वायुसेना के अधिकारी राकेश शर्मा अंतरिक्ष पहुंचे थे। यह देश के इतिहास का पहला मौका था। अब शुभांशु शुक्ला ऐतिहासिक यात्रा पर हैं। ऐसे में उनके अनुभवों को जानना सचमुच खास है। जानिए शुभांशु ने पीएम मोदी के सामने अपने एहसासों को शब्दों में बयां करते हुए और क्या बातें कहीं
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अभी आप पृथ्वी के किस भाग के ऊपर से गुजर रहे होंगे? इस सवाल पर शुभांशु ने प्रधानमंत्री को बताया थोड़ी देर पहले जब उन्होंने खिड़की से देखा तो वे अमेरिकी राज्य हवाई के ऊपर से गुजर रहे थे। उन्होंने ये भी बताया कि वे दिन में 16 बार पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। जिसके कारण उन्हें 16 सूर्य उदय और 16 सूर्यास्त दिखाई देता है। शुभांशु ने कहा कि परिक्रमा करीब 28 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हो रही है। आपसे बात करते हुए वक्त और गति का पता नहीं चल रहा है, क्योंकि हम तो अंदर हैं। यह गति दिखाती है कि हमारा देश कितनी गति से आगे बढ़ रहा है।
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पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला से पूछा कि अंतरिक्ष की विशालता देखकर सबसे पहले आपको क्या विचार आया? इस पर शुभांशु शुक्ला ने कहा- जब पहली बार हम लोग ऑर्बिट में पहुंचे, अंतरिक्ष में पहुंचे, तो पहला दृश्य पृथ्वी का था। धरती को बाहर से देख के पहला ख्याल मन में आया कि पृथ्वी बिल्कुल एक दिखती है, मतलब बाहर से कोई सीमा रेखा नहीं दिखाई देती, कोई बॉर्डर नहीं दिखाई देता। भारत सच में बहुत भव्य दिखता है, बहुत बड़ा दिखता है। जितना हम मैप पर देखते हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ा।
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अंतरिक्ष स्टेशन से शुभांशु ने प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान भारत की भावना और इंसानियत को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, जब हम भारत को मैप पर देखते हैं तो, हम बाकी देशों का आकार कितना बड़ा है, हमारा आकार कैसा है, इन चीजों को देखते हैं। हालांकि, मैप पर सही नहीं होता क्योंकि हम 3D ऑब्जेक्ट को 2D यानी पेपर पर उतारते हैं। बकौल शुभांशु, 'जितना हम मैप पर देखते हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ा दिखता है। जो एकता का भाव है, वह पृथ्वी की एकता की फीलिंग है। हमारा भी मोटो है, अनेकता में एकता। उसका महत्व समझ में आता है। बाहर से देखने पर लगता है कि कोई सीमा है ही नहीं। कोई राज्य या देश अलग नहीं दिखते। आखिरकार हम सब इंसानियत का हिस्सा हैं। पृथ्वी हमारा घर है और हम सबके सब उसके निवासी हैं।
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विस्तार से हुई बातचीत में अंतरिक्ष के अलावा खेती-किसानी, स्वास्थ्य पर भी चर्चा
लगभग 18 मिनट की बातचीत में पीएम मोदी ने शुभांशु के साथ अंतरिक्ष की जीरो ग्रेविटी, उनकी इस यात्रा से बच्चों और युवाओं को मिलने वाली प्रेरणा पर भी बात की। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भावी परियोजना- गगनयान पर भी बात की। बता दें कि यह भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। दोनों के बीच साइंस और स्पिरिचुअलिटी की ताकत, एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष में होने वाले प्रयोगों से खेती-किसानी और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलने वाले लाभ जैसे विषयों पर भी विस्तार से बातें की। पीएम मोदी ने शुभांशु को इस अंतरिक्ष मिशन में सफलता हासिल करने के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
शुभांशु पीएम मोदी से करीब 18 मिनट तक चली बातचीत के अंतिम हिस्से में इस ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के गवाह बनने वाले युवाओं और बच्चों से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा, मैं हर एक बच्चे और युवा को एक मैसेज देना चाहता हूं। उन्होंने कहा, अगर आप कोशिश करते हैं और अपना भविष्य अच्छे से बनाते हैं तो आपके साथ-साथ हमारे देश का भविष्य भी अच्छा बनेगा। केवल एक बात अपने मन में रखिए, आकाश की कभी सीमा नहीं होती (sky has never the limits)। यह बात हमेशा अगर अपने मन में रखी, तो आप आगे बढ़ेंगे। आपके साथ-साथ देश का भविष्य भी शानदार होगा। बस मेरा यही मैसेज है।