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Axiom: 'एक्सिओम-4 से सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण शोध बना आसान', शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष यात्रा की उपलब्धि बताई
Thu, 25 Sep 2025 08:55 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: बशु जैन
Updated Thu, 25 Sep 2025 08:55 PM IST
सार
शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत के शोधकर्ता के पास सूक्ष्म-गुरुत्व प्लेटफार्मों तक पहुंच नहीं थी, लेकिन अब वे एक्सिओम-4 पर किए गए प्रयोगों के परिणामों का मूल्यांकन कर रहे हैं। एक्सिओम-4 मिशन की उपलब्धि यह है कि इस मिशन से हमने देश के लिए सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के द्वार खोल दिए हैं।
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ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला।
- फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब
विस्तार
एक्सिओम-4 अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा रहे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा की उपलब्धि के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि एक्सिओम-4 मिशन ने हमें बहुत कुछ सिखाया। इस मिशन ने भारत के लिए सूक्ष्म- गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) अनुसंधान को सुगम बना दिया है।
शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत के शोधकर्ता के पास सूक्ष्म-गुरुत्व प्लेटफार्मों तक पहुंच नहीं थी, लेकिन अब वे एक्सिओम-4 पर किए गए प्रयोगों के परिणामों का मूल्यांकन कर रहे हैं। एक्सिओम-4 मिशन की उपलब्धि यह है कि इस मिशन से हमने देश के लिए सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के द्वार खोल दिए हैं। अब यह होता रहेगा।
उन्होंने कहा कि शोधकर्ता समझ गए हैं कि यह कैसे किया जाता है। इसमें चुनौती यह है कि अगर आप जमीन पर कोई प्रयोग करते हैं और उसे अंतरिक्ष में दोहराते हैं, तो यह कोई साधारण स्थानांतरण नहीं होता है। यह पर्यावरण परिवर्तन के कारण बेहद जटिल है। हर चीज पर विचार करना होता है, लेकिन अब इस प्रक्रिया को समझा जा चुका है।
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अंतरिक्ष में किए प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष मिशन्स के लिए रहे कारगर
शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष में प्रवास के दौरान उन्होंने कई प्रयोग किए। ये सब भारत के नियोजित मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रमा पर मानवयुक्त मिशन पर केंद्रित थे। मिशन के दौरान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर किए प्रयोगों में मांसपेशियों के पुनर्जनन, शैवाल वृद्धि, फसल की व्यवहार्यता (जैसे मेथी और मूंग के बीज अंकुरण) और देश में पाए जाने वाले टार्डिग्रेड्स जैसे सूक्ष्मजीवों की उत्तरजीविता का अध्ययन शामिल था।
देश के अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के सपने को दिया बढ़ावा
भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि देश के मानव अंतरिक्ष गगनयान मिशन की आधिकारिक समय-सीमा 2027 है और एक्सिओम 4 की उड़ान गगनयान मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आगे कहा, हमने पहले ही एक ऐसी प्रक्रिया स्थापित कर ली है जिसके तहत सारी जानकारी सिस्टम में वापस आ रही है। हम जो कुछ भी कर रहे थे, उसे परिष्कृत करना शुरू कर दिया है, क्योंकि मानव अंतरिक्ष मिशन बहुत पेचीदा होते हैं और इससे जुड़े काम का पैमाना और नतीजा बदल जाता है। उन्होंने ने देश नियोजित अंतरिक्ष स्टेशन पर कहा कि एक्सिओम 4 मिशन ने भारत के अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के सपने को भी बढ़ावा दिया है। काम शुरू हो चुका है और वैचारिक रूप से यह परिक्रमा करने वाली प्रयोगशालाओं जैसा है।
हार से न डरें, ये बहुत कुछ सिखाती है
भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन शुक्ला आईएसएस पर 18 दिनों के प्रवास के बाद जुलाई में पृथ्वी पर लौटे। राकेश शर्मा की 1984 की उड़ान के बाद वे अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय हैं। शुक्ला ने कहा, सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण पर शोध करने का अनूठा पहलू यह है कि आप ऐसे वातावरण में जीवन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां उसका अस्तित्व नहीं होना चाहिए। जब आप ऐसा करने की कोशिश करते हैं, तो आप ऐसे समाधान खोज निकालते हैं जो पृथ्वी पर उन समस्याओं का समाधान करते हैं जिनके बारे में आपने सोचा भी नहीं था। उन्होंने कहा कि हार से डरना नहींचाहिए, क्योंकि हार बहुत कुछ सिखा सकती है। हमें कामयाबी की बजाय हार का जश्न मनाना शुरू करना चाहिए, ताकि हम अपने बच्चों को प्रोत्साहित कर सकें कि असफलता भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है। हमें यही बात बच्चों में डालने की जरूरत है।
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शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत के शोधकर्ता के पास सूक्ष्म-गुरुत्व प्लेटफार्मों तक पहुंच नहीं थी, लेकिन अब वे एक्सिओम-4 पर किए गए प्रयोगों के परिणामों का मूल्यांकन कर रहे हैं। एक्सिओम-4 मिशन की उपलब्धि यह है कि इस मिशन से हमने देश के लिए सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के द्वार खोल दिए हैं। अब यह होता रहेगा।
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उन्होंने कहा कि शोधकर्ता समझ गए हैं कि यह कैसे किया जाता है। इसमें चुनौती यह है कि अगर आप जमीन पर कोई प्रयोग करते हैं और उसे अंतरिक्ष में दोहराते हैं, तो यह कोई साधारण स्थानांतरण नहीं होता है। यह पर्यावरण परिवर्तन के कारण बेहद जटिल है। हर चीज पर विचार करना होता है, लेकिन अब इस प्रक्रिया को समझा जा चुका है।
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अंतरिक्ष में किए प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष मिशन्स के लिए रहे कारगर
शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष में प्रवास के दौरान उन्होंने कई प्रयोग किए। ये सब भारत के नियोजित मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रमा पर मानवयुक्त मिशन पर केंद्रित थे। मिशन के दौरान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर किए प्रयोगों में मांसपेशियों के पुनर्जनन, शैवाल वृद्धि, फसल की व्यवहार्यता (जैसे मेथी और मूंग के बीज अंकुरण) और देश में पाए जाने वाले टार्डिग्रेड्स जैसे सूक्ष्मजीवों की उत्तरजीविता का अध्ययन शामिल था।
देश के अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के सपने को दिया बढ़ावा
भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि देश के मानव अंतरिक्ष गगनयान मिशन की आधिकारिक समय-सीमा 2027 है और एक्सिओम 4 की उड़ान गगनयान मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आगे कहा, हमने पहले ही एक ऐसी प्रक्रिया स्थापित कर ली है जिसके तहत सारी जानकारी सिस्टम में वापस आ रही है। हम जो कुछ भी कर रहे थे, उसे परिष्कृत करना शुरू कर दिया है, क्योंकि मानव अंतरिक्ष मिशन बहुत पेचीदा होते हैं और इससे जुड़े काम का पैमाना और नतीजा बदल जाता है। उन्होंने ने देश नियोजित अंतरिक्ष स्टेशन पर कहा कि एक्सिओम 4 मिशन ने भारत के अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के सपने को भी बढ़ावा दिया है। काम शुरू हो चुका है और वैचारिक रूप से यह परिक्रमा करने वाली प्रयोगशालाओं जैसा है।
हार से न डरें, ये बहुत कुछ सिखाती है
भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन शुक्ला आईएसएस पर 18 दिनों के प्रवास के बाद जुलाई में पृथ्वी पर लौटे। राकेश शर्मा की 1984 की उड़ान के बाद वे अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय हैं। शुक्ला ने कहा, सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण पर शोध करने का अनूठा पहलू यह है कि आप ऐसे वातावरण में जीवन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां उसका अस्तित्व नहीं होना चाहिए। जब आप ऐसा करने की कोशिश करते हैं, तो आप ऐसे समाधान खोज निकालते हैं जो पृथ्वी पर उन समस्याओं का समाधान करते हैं जिनके बारे में आपने सोचा भी नहीं था। उन्होंने कहा कि हार से डरना नहींचाहिए, क्योंकि हार बहुत कुछ सिखा सकती है। हमें कामयाबी की बजाय हार का जश्न मनाना शुरू करना चाहिए, ताकि हम अपने बच्चों को प्रोत्साहित कर सकें कि असफलता भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है। हमें यही बात बच्चों में डालने की जरूरत है।