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Aviation: विमान हादसे, देरी-कैंसिलेशन.. एविएशन सिस्टम में गड़बड़ी! समिति की सिफारिश- जांच के लिए कमेटी गठित हो
Fri, 27 Mar 2026 01:02 PM IST
Asmita Tripathi
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Asmita Tripathi
Updated Fri, 27 Mar 2026 01:02 PM IST
सार
समिति ने कहा, इस सेक्टर में बार बार सामने आ रही तकनीकी खराबियों, कई बड़े हादसे और डीजीसीए में संसाधनों और क्षमता की कमी गंभीर चिंता का विषय हैं। इन समस्याओं की जड़ तक पहुंचकर समाधान निकालना जरूरी है, ताकि हवाई यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
देश के एविएशन सेक्टर में लगातार सामने आ रही सुरक्षा खामियों को लेकर संसद की एक समिति ने गंभीर चिंता जताई है। समिति ने सिफारिश की है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति का गठन करे, जो पूरे सेक्टर में मौजूद सुरक्षा संबंधी सिस्टम की गहराई से जांच करे। रिपोर्ट में व्यापक सुधारों की जरूरत पर जोर दिया गया है।
समिति ने कहा, इस सेक्टर में बार बार सामने आ रही तकनीकी खराबियों, कई बड़े हादसे और डीजीसीए में संसाधनों और क्षमता की कमी गंभीर चिंता का विषय हैं। इन समस्याओं की जड़ तक पहुंचकर समाधान निकालना जरूरी है, ताकि हवाई यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हाल ही में राज्यसभा में पेश परिवहन, पर्यटन और संस्कृति से जुड़ी स्थायी समिति ने साफ संकेत दिया कि समस्या सतही नहीं, बल्कि गहराई तक फैली हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुए हादसे और ऑडिट यह बताते हैं कि एविएशन सुरक्षा व्यवस्था में खामियां छिटपुट नहीं, बल्कि सिस्टम स्तर की हैं। इसका मतलब है कि मौजूदा सुरक्षा ढांचे में कई स्तरों पर कमजोरी है, जिसे सुधारने के लिए बड़े और ठोस कदम उठाने होंगे।
समिति ने हाल की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये सिर्फ अलग अलग मामले नहीं है। जबकि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं। 12 जून 2025 को अहमदाबाद विमान हादसे में 260 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा 23 फरवरी 2026 को झारखंड के चतरा में एयर एंबुलेंस दुर्घटना में 7 लोगों की जान गई, जबकि 28 जनवरी 2026 को बारामती में चार्टर्ड विमान हादसा हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दिसंबर 2025 में बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हुईं और लगातार देरी की समस्या भी सामने आई। इन घटनाओं से साफ है कि समस्या किसी एक एयरलाइन तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे एविएशन सिस्टम में गहरी खामियां हैं।
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90 दिन में रिपोर्ट दे पैनल
समिति ने सिफारिश की है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय एक उच्चस्तरीय पैनल बनाए। जो 2025–26 के दौरान हुई सुरक्षा चूक की जड़ तक जाकर जांच करे। इस पैनल में डीजीसीए, एएआईबी, एयरलाइन ऑपरेटर, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संस्थाएं और स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हों, ताकि जांच निष्पक्ष और व्यापक हो सके। समिति ने कहा कि यह पैनल 90 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे।
डीजीसीए में स्टाफ की कमी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि डीजीसीए में कर्मचारियों की भारी कमी है। कुल 1,630 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 843 कर्मचारी कार्यरत हैं, यानी करीब 48.3 प्रतिशत पद खाली हैं। 787 पद अब भी भरे नहीं गए हैं। हालांकि मंत्रालय का कहना है, इस कमी का निगरानी योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है।
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समिति ने कहा, इस सेक्टर में बार बार सामने आ रही तकनीकी खराबियों, कई बड़े हादसे और डीजीसीए में संसाधनों और क्षमता की कमी गंभीर चिंता का विषय हैं। इन समस्याओं की जड़ तक पहुंचकर समाधान निकालना जरूरी है, ताकि हवाई यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हाल ही में राज्यसभा में पेश परिवहन, पर्यटन और संस्कृति से जुड़ी स्थायी समिति ने साफ संकेत दिया कि समस्या सतही नहीं, बल्कि गहराई तक फैली हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुए हादसे और ऑडिट यह बताते हैं कि एविएशन सुरक्षा व्यवस्था में खामियां छिटपुट नहीं, बल्कि सिस्टम स्तर की हैं। इसका मतलब है कि मौजूदा सुरक्षा ढांचे में कई स्तरों पर कमजोरी है, जिसे सुधारने के लिए बड़े और ठोस कदम उठाने होंगे।
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समिति ने हाल की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये सिर्फ अलग अलग मामले नहीं है। जबकि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं। 12 जून 2025 को अहमदाबाद विमान हादसे में 260 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा 23 फरवरी 2026 को झारखंड के चतरा में एयर एंबुलेंस दुर्घटना में 7 लोगों की जान गई, जबकि 28 जनवरी 2026 को बारामती में चार्टर्ड विमान हादसा हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दिसंबर 2025 में बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हुईं और लगातार देरी की समस्या भी सामने आई। इन घटनाओं से साफ है कि समस्या किसी एक एयरलाइन तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे एविएशन सिस्टम में गहरी खामियां हैं।
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90 दिन में रिपोर्ट दे पैनल
समिति ने सिफारिश की है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय एक उच्चस्तरीय पैनल बनाए। जो 2025–26 के दौरान हुई सुरक्षा चूक की जड़ तक जाकर जांच करे। इस पैनल में डीजीसीए, एएआईबी, एयरलाइन ऑपरेटर, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संस्थाएं और स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हों, ताकि जांच निष्पक्ष और व्यापक हो सके। समिति ने कहा कि यह पैनल 90 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे।
डीजीसीए में स्टाफ की कमी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि डीजीसीए में कर्मचारियों की भारी कमी है। कुल 1,630 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 843 कर्मचारी कार्यरत हैं, यानी करीब 48.3 प्रतिशत पद खाली हैं। 787 पद अब भी भरे नहीं गए हैं। हालांकि मंत्रालय का कहना है, इस कमी का निगरानी योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है।