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Aviation: भारतीय एयरलाइन कंपनियों पर बढ़ेगी सरकारी निगरानी, अब पहले के मुकाबले इन कामों पर होगा ज्यादा फोकस

Fri, 26 Sep 2025 04:14 PM IST
ज्योति भास्कर डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 26 Sep 2025 04:14 PM IST
सार

देश में पिछले एक दशक में वाणिज्यिक विमानों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। जबकि आने वाले समय में एयरलाइंस ने करीब 2,000 नए विमान ऑर्डर किए हैं। ऐसे में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने भारत में विमानन क्षेत्र में तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए एयरलाइंस पर सख्त निगरानी रखने की जरूरत बताई है।

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Aviation Sector Govt increased monitoring of Indian airline companies there will be more focus on works
भारतीय एयरलाइन कंपनियों पर बढ़ेगी सरकारी निगरानी (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो चली है। ट्रेनों के टिकट फुल होने के बाद यात्रियों के पास अब फ्लाइट का विकल्प बचा है। टिकट महंगे होने के बावजूद लोग घर जाने के लिए फ्लाइट का सहारा ले रहे है। इस बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने भारत में विमानन क्षेत्र में तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए एयरलाइंस पर सख्त निगरानी रखने की जरूरत बताई है। डीजीसीए से जुड़े अफसरों का कहना है कि,भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानान बाजारों में से एक है।आने वाले दिनों में हजारों नए विमान आने वाले है, लेकिन जून में हुए एयर इंडिया हादसे ने सुरक्षा मानकों पर निगरानी को और सख्त कर दिया है। ऐसे सरकार ज्यादा जिम्मेदारी, ज्यादा सुरक्षा निगरानी और ज्यादा जनशक्ति पर फोकस कर रही है।

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देश में पिछले एक दशक में वाणिज्यिक विमानों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। जबकि आने वाले समय में एयरलाइंस ने करीब 2,000 नए विमान ऑर्डर किए हैं।ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में विमानों के संचालन के लिए सुरक्षा और नियामक ढांचे को मजबूत करना जरूरी होगा, ताकि बढ़ते हवाई यातायात के साथ किसी तरह की चूक न हो।
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हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की विमानन एजेंसी की त्रैवार्षिक महासभा मॉन्ट्रियल में आयोजित हुई। इसमें नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए है। इस महासभा में भारत के एविएशन सेक्टर को लेकर भी चर्चा हुए। इसमें सामने आया कि भारत का विमानन बाज़ार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वालों में से एक है। लेकिन जून में हुए एयर इंडिया विमान हादसे ने सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जो पिछले एक दशक में सबसे बड़ी दुर्घटना मानी जा रही है।
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सरकारी प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत मिला है कि टेकऑफ़ के तुरंत बाद विमान के फ्यूल इंजन स्विच लगभग एक साथ रन से कटऑफ  मोड में चले गए, जिससे पायलटों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई और यह हादसा हो गया। दरअसल, भारतीय विमानन क्षेत्र इस समय पायलटों की कमी का सामना कर रहा है। हाल ही में संसद की एक समिति ने चेतावनी दी कि हवाई सुरक्षा नियामक में स्टाफ की कमी सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। जुलाई में नियामक द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय एयरलाइंस में 263 सुरक्षा संबंधी चूक दर्ज की गईं है।


हालांकि वर्तमान में भारत के विमानन बाज़ार में इंडिगो और एयर इंडिया एयरलाइंस का दबदबा है, लेकिन बढ़ती यात्रा मांग नई एयरलाइंस के लिए अवसर पैदा कर रही है। डीजीसीए अधिकारियों का कहना है कि, जिस रफ्तार से इस सेक्टर की वृद्धि हो रही है, उसमें और एयरलाइंस के लिए जगह है। अगर नए प्लेयर्स आते हैं, तो निश्चित ही उन्हें अवसर मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन संघ के आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2024 में भारत में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर रिकॉर्ड 17.4 करोड़ यात्रियों ने उड़ान भरी, जबकि चीन में यह संख्या 73 करोड़ रही है। 

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