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अमर्त्य सेन ने नोटबंदी को बताया अधिनायकवादी कदम
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 26 Nov 2016 02:37 PM IST
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अमर्त्य सेन
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नोटबंदी पर विपक्ष के हंगामे के बीच भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने भी इसकी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि 500 और 1000 रुपए पर केंद्र सरकार की कार्रवाई निरंकुश है।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अमर्त्य सेन ने कहा, 'लोगों को अचानक बताया गया कि उनकी करेंसी अब काम की नहीं है, उसका इस्तेमाल वो अब नहीं कर सकते हैं। यह अधिनायकवाद जैसा है। सरकार इसे कथित तौर पर जायज ठहरा रही है।'
उन्होंने कहा कि 8 नवंबर को नरेंद्र मोदी सरकार की इस घोषणा ने एक ही झटके में सभी भारतीय नागरिकों को कुटिल करार दिया है, लेकिन, वास्तविकता में ऐसा नहीं है।
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उन्होंने कहा कि एक अधिनायकवादी सरकार ही लोगों को संकट झेलने के लिए छोड़ सकती है। लाखों निर्दोष लोग अपना ही पैसा नहीं ले पा रहे हैं। उन्हें अपना खुद का पैसा पाने के लिए संघर्ष, असुविधा और अपमान का सामना करना पड़ रहा है।
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अमर्त्य सेन ने कहा, 'लोगों को अचानक बताया गया कि उनकी करेंसी अब काम की नहीं है, उसका इस्तेमाल वो अब नहीं कर सकते हैं। यह अधिनायकवाद जैसा है। सरकार इसे कथित तौर पर जायज ठहरा रही है।'
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उन्होंने कहा कि 8 नवंबर को नरेंद्र मोदी सरकार की इस घोषणा ने एक ही झटके में सभी भारतीय नागरिकों को कुटिल करार दिया है, लेकिन, वास्तविकता में ऐसा नहीं है।
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उन्होंने कहा कि एक अधिनायकवादी सरकार ही लोगों को संकट झेलने के लिए छोड़ सकती है। लाखों निर्दोष लोग अपना ही पैसा नहीं ले पा रहे हैं। उन्हें अपना खुद का पैसा पाने के लिए संघर्ष, असुविधा और अपमान का सामना करना पड़ रहा है।
8 नवंबर को हुई थी नोटबंदी
अमर्त्य सेन
- फोटो : getty images
बताते चलें कि 8 नवंबर को रात 8 बजे देश के नाम एक संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद से पूरे देश में लोग कैश के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विपक्ष इस मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक हंगामा कर रहा है।
दिल्ली और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर रैली कर चुके हैं। वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ 13 राजनीतिक दल इस मुद्दे पर विरोध कर रहे हैं।