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अगस्ता से बीजेपी को राहत, कांग्रेस पर दबाव
प्रमोद जोशी/वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
Updated Fri, 29 Apr 2016 02:11 PM IST
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Augusta Westland
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अगस्ता वेस्टलैंड केस 'उत्तराखंड गेट' से घिरे दिख रहे भारतीय जनता पार्टी को सांस लेने का मौका देगा, साथ ही अगले तीन साल तक भारतीय राजनीति को गरमा कर रखेगा।
भले ही नतीजा वैसा ही फुस्स हो, जैसा अब तक होता रहा है। चिंता की बात यह है कि इससे सामान्य नागरिक के मन में प्रशासन और राजनीति के प्रति नफरत बढ़ेगी।
इसे घटनाक्रमों के साथ जोड़ें तो सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, राष्ट्रीय जांच एजेंसी और दूसरी खुफिया एजेंसियों की साख मिट्टी में मिलती नजर आ रही है।
बिचौलिए क्रिश्चियन माइकेल ने अगस्ता वेस्टलैंड के भारत में सक्रिय अधिकारियों को जो दिशा-निर्देश दिए हैं, उनसे सवाल उठता है कि क्या कारण है कि नामी उत्पादक भी भारत में ‘घूस’ को जरूरी मानते हैं? और मीडिया को मैनेज करने की बात सोचते हैं?
भारतीय जनता पार्टी की दिलचस्पी व्यक्तिगत रूप से सोनिया गांधी और राहुल गांधी में है। उसका गणित है कि कांग्रेस को ध्वस्त करना है तो 'परिवार' को निशाना बनाओ।
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भ्रष्टाचार के इस प्रकार के आरोपों से रक्षा में कांग्रेस को जेडीयू, आरजेडी, सपा और वाम मोर्चा का समर्थन नहीं मिलेगा। जिनके साथ मिलकर पार्टी बीजेपी के खिलाफ मोर्चा बनाना चाहती है।
फिलहाल इस वर्चुअल मोर्चे को बीजेपी के साथ कांग्रेस की भी आलोचना करनी होगी।
उत्तराखंड मामले को लेकर सरकार संसद के चालू सत्र में घिरी हुई थी। अब उसे कांग्रेस पर जवाबी हमला बोलने का मौका मिला है।
हालांकि इटली की अदालत ने यह फैसला सात अप्रैल को दिया था पर इसका राजनीतिक मतलब समझने में दिल्ली ने करीब तीन हफ्ते लगाए। या कुछ सोचकर इस पर तब चर्चा शुरू की जब संसद का सत्र चल रहा था।
ऐसे विवादों की माइलेज अच्छी होती है। बोफोर्स और हवाला मामले लंबे समय तक भारतीय राजनीति को प्रभावित करते रहे। यह मामला भी यूपी और पंजाब चुनाव से लेकर 2019 के लोकसभा चुनाव तक चलना चाहिए।
सिर्फ भाजपा ही नहीं कांग्रेस और बाक़ी दल अपनी सुविधा से इसकी अलग-अलग पूंछ पकड़ रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि ये गांधी परिवार को निपटाने की साजिश है। इसके लिए उसने बिचौलिए क्रिश्चियन माइकेल की चिट्ठी का सहारा लिया है।
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भले ही नतीजा वैसा ही फुस्स हो, जैसा अब तक होता रहा है। चिंता की बात यह है कि इससे सामान्य नागरिक के मन में प्रशासन और राजनीति के प्रति नफरत बढ़ेगी।
इसे घटनाक्रमों के साथ जोड़ें तो सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, राष्ट्रीय जांच एजेंसी और दूसरी खुफिया एजेंसियों की साख मिट्टी में मिलती नजर आ रही है।
बिचौलिए क्रिश्चियन माइकेल ने अगस्ता वेस्टलैंड के भारत में सक्रिय अधिकारियों को जो दिशा-निर्देश दिए हैं, उनसे सवाल उठता है कि क्या कारण है कि नामी उत्पादक भी भारत में ‘घूस’ को जरूरी मानते हैं? और मीडिया को मैनेज करने की बात सोचते हैं?
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भारतीय जनता पार्टी की दिलचस्पी व्यक्तिगत रूप से सोनिया गांधी और राहुल गांधी में है। उसका गणित है कि कांग्रेस को ध्वस्त करना है तो 'परिवार' को निशाना बनाओ।
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भ्रष्टाचार के इस प्रकार के आरोपों से रक्षा में कांग्रेस को जेडीयू, आरजेडी, सपा और वाम मोर्चा का समर्थन नहीं मिलेगा। जिनके साथ मिलकर पार्टी बीजेपी के खिलाफ मोर्चा बनाना चाहती है।
फिलहाल इस वर्चुअल मोर्चे को बीजेपी के साथ कांग्रेस की भी आलोचना करनी होगी।
उत्तराखंड मामले को लेकर सरकार संसद के चालू सत्र में घिरी हुई थी। अब उसे कांग्रेस पर जवाबी हमला बोलने का मौका मिला है।
हालांकि इटली की अदालत ने यह फैसला सात अप्रैल को दिया था पर इसका राजनीतिक मतलब समझने में दिल्ली ने करीब तीन हफ्ते लगाए। या कुछ सोचकर इस पर तब चर्चा शुरू की जब संसद का सत्र चल रहा था।
ऐसे विवादों की माइलेज अच्छी होती है। बोफोर्स और हवाला मामले लंबे समय तक भारतीय राजनीति को प्रभावित करते रहे। यह मामला भी यूपी और पंजाब चुनाव से लेकर 2019 के लोकसभा चुनाव तक चलना चाहिए।
सिर्फ भाजपा ही नहीं कांग्रेस और बाक़ी दल अपनी सुविधा से इसकी अलग-अलग पूंछ पकड़ रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि ये गांधी परिवार को निपटाने की साजिश है। इसके लिए उसने बिचौलिए क्रिश्चियन माइकेल की चिट्ठी का सहारा लिया है।
'उत्तराखंड गेट' से घिरे दिख रहे भारतीय जनता पार्टी को सांस लेने का मौका
चिट्ठी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान इटली के प्रधानमंत्री मत्तेयो रेनजी से मिले थे। माइकेल का आरोप है कि कांग्रेस के गांधी परिवार को फंसाने के बदले इतालवी नौसैनिकों का मामला निपटाने का पेशकश की गई थी।
सवाल है कि क्या इटली की अदालत किसी साजिश में शामिल है? बहरहाल इस मामले ने भाजपा को न केवल जवाबी हमले का बल्कि कांग्रेस को गहरी चोट पहुंचाने का मौका दिया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों से कांग्रेस पहले से घायल है। साल 2010 से पार्टी पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगते रहे हैं। दिल्ली में सत्ता बदलने के बाद पहले रॉबर्ट वाड्रा का मामला उठा। फिर नेशनल हैरल्ड, फिर इशरत जहाँ।
संयोग से राज्यसभा में सुब्रमण्यम स्वामी का प्रवेश भी इसी मौके पर हुआ है। बुधवार को उनके आगमन की झलक भी मिली। उनकी कुछ बातें सदन की कार्यवाही से हटा दी गईं, पर स्वामी ने अपने ट्वीट में इशारा किया कि वे आगे अभी क्या कहने वाले हैं।
ऐसा नहीं कि कांग्रेसी तरकश में तीर नहीं हैं। बुधवार को राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद ने कहा, यूपीए सरकार ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया पर मोदी सरकार ने इस रोक को हटा दिया। यही नहीं कंपनी को 'मेक इन इंडिया' में भागीदार बना लिया।
इसके जवाब में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर का कहना है कि ब्लैकलिस्ट तो हमने किया 3 जुलाई 2014 में। कांग्रेस ने किस तारीख को किया, जरा दिखाए तो सही।
यह पहला मौका है, जब सरकार हमलावर है और विपक्ष दबाव में है। लेकिन इस मामले में मोदी सरकार ने पिछले दो साल में क्या किया? किसी ने घूस दी तो किसने ली? सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय पिछले दो साल से जांच कर रहे हैं लेकिन उनकी जांच की प्रगति का कुछ पता नहीं है।
किसी के पास पुष्ट प्रमाण नहीं हैं पर बिचौलिए क्रिश्चियन माइकेल के हाथ के लिखे कुछ कागज प्रचलन में हैं, जिनमें एएफ, डीएस, जेएस, एपी और एफएएम जैसे संकेताक्षरों से कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
यह वैसा ही विवरण है जैसा बोफोर्स मामले में या नब्बे के दशक में हवाला मामले में था और वैसे ही निष्कर्ष हैं। सवाल है कि क्या नतीजा भी वैसा ही होगा?
सवाल है कि क्या इटली की अदालत किसी साजिश में शामिल है? बहरहाल इस मामले ने भाजपा को न केवल जवाबी हमले का बल्कि कांग्रेस को गहरी चोट पहुंचाने का मौका दिया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों से कांग्रेस पहले से घायल है। साल 2010 से पार्टी पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगते रहे हैं। दिल्ली में सत्ता बदलने के बाद पहले रॉबर्ट वाड्रा का मामला उठा। फिर नेशनल हैरल्ड, फिर इशरत जहाँ।
संयोग से राज्यसभा में सुब्रमण्यम स्वामी का प्रवेश भी इसी मौके पर हुआ है। बुधवार को उनके आगमन की झलक भी मिली। उनकी कुछ बातें सदन की कार्यवाही से हटा दी गईं, पर स्वामी ने अपने ट्वीट में इशारा किया कि वे आगे अभी क्या कहने वाले हैं।
ऐसा नहीं कि कांग्रेसी तरकश में तीर नहीं हैं। बुधवार को राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद ने कहा, यूपीए सरकार ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया पर मोदी सरकार ने इस रोक को हटा दिया। यही नहीं कंपनी को 'मेक इन इंडिया' में भागीदार बना लिया।
इसके जवाब में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर का कहना है कि ब्लैकलिस्ट तो हमने किया 3 जुलाई 2014 में। कांग्रेस ने किस तारीख को किया, जरा दिखाए तो सही।
यह पहला मौका है, जब सरकार हमलावर है और विपक्ष दबाव में है। लेकिन इस मामले में मोदी सरकार ने पिछले दो साल में क्या किया? किसी ने घूस दी तो किसने ली? सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय पिछले दो साल से जांच कर रहे हैं लेकिन उनकी जांच की प्रगति का कुछ पता नहीं है।
किसी के पास पुष्ट प्रमाण नहीं हैं पर बिचौलिए क्रिश्चियन माइकेल के हाथ के लिखे कुछ कागज प्रचलन में हैं, जिनमें एएफ, डीएस, जेएस, एपी और एफएएम जैसे संकेताक्षरों से कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
यह वैसा ही विवरण है जैसा बोफोर्स मामले में या नब्बे के दशक में हवाला मामले में था और वैसे ही निष्कर्ष हैं। सवाल है कि क्या नतीजा भी वैसा ही होगा?