काबुल एयरपोर्ट पर हमला: अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के जिन आतंकियों को जेल से छोड़ा, उन्होंने ही मचाई तबाही!
तालिबान ने आईएस के जिन आतंकियों को छोड़ा था, उनमें सीरिया में लंबे वक्त तक ऑपरेशन को कमांड करने वाला आतंकी अबुल अल शहरयार भी था। काबुल की जेल से जब अल शहरयार को छोड़ा गया तो खुफिया एजेंसियों समेत दुनिया के अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों ने हमले की आशंका का अंदाजा लगा लिया था...
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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से पिछले हफ्ते आईएस यानी इस्लामिक स्टेट के जिन आतंकवादियों को रिहा किया गया था, उन्हीं आतंकियों ने काबुल में तबाही मचा दी। खुफिया एजेंसियों की मानें तो सिर्फ आईएस के आतंकी ही नहीं बल्कि अल-कायदा और हक्कानी नेटवर्क के आतंकवादी अभी और तबाही मचाने के मूड में हैं। हक्कानी नेटवर्क की सलाह पर ही आईएस और अलकायदा के आतंकवादियों को अफगानिस्तान की जेलों से रिहा करने का सिलसिला शुरू किया गया था। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी देशों से लेकर यूरोप और भारत में भी आतंकी हमले का इनपुट मिला है।
गुरुवार शाम से काबुल एयरपोर्ट के बाद राजधानी के कई होटलों और बहुत से इलाकों में बम धमाकों की आवाजें आईं। एयरपोर्ट के अंदर धमाके उन जगहों पर हुए जहां पर ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों की तैनाती थी। इस हमले में 90 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जिसमें 13 अमेरिकी सैनिक भी हैं। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक यह हमला पहले से तय था। दरअसल अफगानिस्तान में तालिबान ने सत्ता हासिल करने के बाद खूनी खेल शुरू करने की कवायद जेल में बंद खूंखार आतंकवादियों को छोड़ने के साथ ही शुरू कर दी थी।
तालिबान ने आईएस के जिन आतंकियों को छोड़ा था, उनमें सीरिया में लंबे वक्त तक ऑपरेशन को कमांड करने वाला आतंकी अबुल अल शहरयार भी था। काबुल की जेल से जब अल शहरयार को छोड़ा गया तो खुफिया एजेंसियों समेत दुनिया के अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों ने हमले की आशंका का अंदाजा लगा लिया था। खुफिया रिपोर्ट के आधार पर ही पेंटागन से लेकर ब्रिटेन ने भी अफगानिस्तान में होने वाले हमले को लेकर एक अलर्ट जारी किया था। जिसमें काबुल समेत अफगानिस्तान के कई शहरों में उनके नागरिकों और सैनिकों पर हमला होने का दावा था।
दुनियाभर की तमाम खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के आधार पर इस बात का अंदाजा है कि आने वाले दिनों में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत और कई प्रमुख शहरों पर हमले होंगे। उन्हें इसके अलावा आईएस, अल-कायदा और हक्कानी नेटवर्क के आतंकवादी संगठनों और पाकिस्तान के कई आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर पश्चिमी देशों समेत भारत और अन्य देशों पर हमले करने का भी इनपुट मिला है। विदेशी मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान में जिस हक्कानी नेटवर्क के कहने पर तालिबान ने अफगान की जेल से आतंकियों को छोड़ा था, वही लोग पूरी दुनिया में आतंक फैलाने का पूरा नेटवर्क बिछाने में लग गए हैं। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान से छोड़े गए आतंकवादी स्लीपर सेल में तब्दील हो चुके कई आतंकी संगठनों को दोबारा जिंदा करने की फिराक में हैं। इसके लिए अल-कायदा और आईएस के आतंकियों ने पाकिस्तान के कई छोटे बड़े आतंकी संगठनों से इस्लामिक मूवमेंट के नाम पर आतंक को बढ़ाने का सौदा करना शुरू कर दिया है।
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हुए धमाकों के बाद और हमलों की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जनरल फ्रेंक मैकेंजी ने खुफिया रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि अमेरिका को एयरपोर्ट पर और हमले होने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है जिस तरीके से तालिबान ने काबुल में हुए बम धमाकों से पल्ला झाड़ते हुए अपने दामन को पाक साफ करने की चाल चली है वह जगजाहिर हो चुकी है। क्योंकि जिस आईएस-खोरासान आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली है उसी आतंकी संगठन के कई बड़े आतंकवादी तालिबान की पनाहगाह में पाले पोसे जा रहे थे। पूरी दुनिया को पता है कि तालिबान हक्कानी नेटवर्क के इशारे पर ही काम कर रहा है।
हक्कानी नेटवर्क के आतंकी, तालिबान, आईएस, अल-कायदा और पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा जैसे कई आतंकी संगठन अफगानिस्तान के कबीलाई इलाकों में ही लगातार अपना शेल्टर बनाए हुए थे। इन कबीलाई इलाकों पर वर्षों से तालिबान का ही कब्जा है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि तालिबान का यह कह देना कि हमला उनकी जानकारी में नहीं था यह सिर्फ खुद को धोखा देने जैसा ही है। क्योंकि पूरी दुनिया को इस बात का पता है कि अफगानिस्तान में होने वाला कत्लेआम बगैर तालिबान की मंजूरी के नहीं हो सकता। फिलहाल इस हमले के बाद दुनियाभर के सभी मुल्कों ने अपनी सुरक्षा के लिए एहतियातन कदम उठाने भी शुरू कर दिए हैं।