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Hindi News ›   India News ›   At Over 28 Lakh, India Has The Third Highest Number Of Internally Displaced People In The World

भारत में आपदा, हिंसा के कारण 28 लाख लोग हुए विस्थापित

Mon, 22 May 2017 10:59 PM IST
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट Updated Mon, 22 May 2017 10:59 PM IST
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At Over 28 Lakh, India Has The Third Highest Number Of Internally Displaced People In The World

भारत में पिछले साल आपदा और जातीय संघर्ष के कारण करीब 28 लाख लोगों को आंतरिक विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा। यह जानकारी नॉर्वेइन रिफ्यूजी काउंसिल की द इंटरनल डिस्प्लेसमेंट मॉनिटरिंग सेंटर की तरफ से जारी रिपोर्ट में दी गई है।

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रिपोर्ट में आपदा के कारण सबसे अधिक विस्थापन झेलने वाले देशों की सूची में भारत, चीन और फिलीपींस के बाद तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में 4.48 लाख लोग हिंसा और संघर्ष के कारण विस्थापित हुए।
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करीब 2.40 लाख लोगों को आपदाओं के कारण विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, ‘चीन और फिलीपींस के साथ देश में लगातार सबसे अधिक संख्या में विस्थापन देखा जा रहा है। हालिया वर्षों में विस्थापन मुख्यतऱ् बाढ़ एवं तूफानी घटनाओं से संबद्ध रहे।
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हालांकि भारत के करीब 68 प्रतिशत क्षेत्र सूखा संभावित, 60 प्रतिशत भूकंप संवेदी और देश के 75 प्रतिशत तटीय हिस्से चक्रवातों एवं सुनामी संभावित क्षेत्र हैं।’

रिपोर्ट के अनुसार, ‘संघर्ष अधिकतर पहचान एवं जातीयता से संबद्ध रहते हैं। क्षेत्रीयता एवं जातीयता आधारित संघर्ष समेत यह हिंसक अलगाववाद तथा पहचान आधारित आंदोलनों के साथ स्थानीय हिंसा का रूप ले लेता है।’

सरदार सरोवर बांध परियोजना से 3.5 लाख लोग विस्थापित

At Over 28 Lakh, India Has The Third Highest Number Of Internally Displaced People In The World

भारत की उल्लेखनीय आर्थिक वृद्धि और इसकी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में सुधार के हालिया प्रयास सामाजिक समूहों एवं शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच की असमानता को पाटने में नाकाम रहे हैं।

1984 में सरदार सरोवर बांध परियोजना की मंजूरी के बाद से गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में साल 2015 तक एक अनुमान के अनुसार 3.50 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ‘जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम अब भी लागू हैं।

अत्यधिक एवं असंगत बल प्रयोग के लिए किसी भी तरह के दंड के प्रावधान से मिली छूट के चलते मानवाधिकार उल्लंघन होते हैं।’

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