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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान: बीते वर्ष रोके गए दो लाख बाल विवाह, अब भी हो रही पांच में से एक नाबालिग की शादी
Thu, 28 Nov 2024 04:42 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Thu, 28 Nov 2024 04:42 AM IST
सार
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के शुभारंभ के मौके पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि बाल विवाह हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है और यह एक ऐसी प्रथा है जो लाखों लड़कियों की क्षमता को सीमित करती है। बाल विवाह मानवाधिकार उल्लंघन के सबसे गंभीर रूपों में से एक है और कानून के तहत एक अपराध भी है।
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केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी
- फोटो : एएनआई
विस्तार
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि पिछले एक वर्ष में करीब दो लाख बाल विवाह रोके गए, इसके बावजूद भारत में पांच में से एक लड़की की शादी कानूनी आयु 18 वर्ष तक पहुंचने से पहले ही हो जाती है। देश को इस बुराई से पूरी तरह मुक्त करना होगा। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के शुभारंभ के मौके पर उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 2029 तक बाल विवाह दर को 5 फीसदी से नीचे लाने के लिए विशिष्ट कार्य योजनाएं बनाने का आग्रह किया।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा, बाल विवाह हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है और यह एक ऐसी प्रथा है जो लाखों लड़कियों की क्षमता को सीमित करती है। बाल विवाह मानवाधिकार उल्लंघन के सबसे गंभीर रूपों में से एक है और कानून के तहत एक अपराध भी है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकथाम अधिनियम जैसे कानून महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हमें जागरूकता बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए।
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सात राज्यों पर विशेष ध्यान
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य बाल विवाह को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास में विभिन्न हितधारकों को शामिल करना है। मुख्य फोकस ज्यादा समस्या वाले सात राज्यों-पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, राजस्थान, त्रिपुरा, असम और आंध्र प्रदेश पर होगा। इसमें भी लगभग 300 जिलों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जहां बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में अधिक है।
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