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विधानसभा चुनाव: वोटों का क्या है 'पाकिस्तानी कनेक्शन', मोदी से शाह तक सभी करते हैं इस 'तुरुप' के पत्ते का इस्तेमाल!

Wed, 31 Mar 2021 07:05 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 31 Mar 2021 07:05 PM IST
सार

बीते कई चुनावों से देखने को मिल रहा है ये ट्रेंड, 'मियां मुशर्रफ' से लेकर 'बेगम' तक के शब्द बाण चलते हैं हमारे यहां के चुनावों में...

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assembly election 2021: why the pakistan issue always coming up in elections in India
चुनाव प्रचार करते प्रधानमंत्री मोदी - फोटो : PTI

विस्तार

देश के किसी प्रांत में चुनाव हों और पाकिस्तान का जिक्र ना हो ऐसा मुश्किल ही होता है। बीते कुछ सालों के चुनाव और रैलियों पर अगर नजर डालें तो पाएंगे कि हर राज्य में होने वाले चुनावों में पाकिस्तान का जिक्र बार-बार आता रहा है। करीब दो दशक पहले नरेंद्र मोदी का 'मियां मुशर्रफ' कहकर पाकिस्तान को निशाने पर लेने वाली जनसभा हो या बिहार चुनावों में पाकिस्तान भेजने वाली बात कहकर चर्चा में आने वाले भाजपा नेता गिरिराज सिंह हों। देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले चुनावों में पाकिस्तान का जिक्र होना राजनीतिक पार्टियों को हमेशा से भाता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है पाकिस्तान का नाम लेकर राजनैतिक दल लोगों की भावनाओं का फायदा उठाते हैं। यही वजह है कि चुनावों में अपने पड़ोसी दुश्मन मुल्कों का नाम जमकर लिया जाता रहा है।

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बंगाल में हो रहे चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने हाल में चुनावी जनसभा में पाकिस्तान का जिक्र किया। नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 'बेगम' कहते हुए संबोधित किया और कहा कि अगर लोग बेगम को वोट देंगे तो बंगाल 'मिनी पाकिस्तान' बन जाएगा। पाकिस्तान का जिक्र सिर्फ शुभेंदु अधिकारी ने ही नहीं किया, बल्कि पिछले साल दिल्ली में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने भी पाकिस्तान का जिक्र कर दिल्ली चुनावों में भारत-पाकिस्तान का पेच डाल दिया था। कपिल मिश्रा ने 08 फरवरी 2020 को दिल्ली में होने वाले चुनावों को लेकर कहा था कि दिल्ली की सड़कों पर हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।

2015 के विधानसभा चुनाव में भी पाकिस्तान का जिक्र हुआ था। बिहार में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रक्सौल की एक रैली में जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर बिहार में भाजपा हारती है, तो पाकिस्तान में पटाखे फोड़ कर जश्न मनाया जाएगा। इसके पहले 2002 में गुजरात में नरेंद्र मोदी ने भी 'मियां मुशर्रफ' कहकर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया था। एक कार्यक्रम में उन्होंने अक्षरधाम मंदिर पर हुए हमले में पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कई बार 'मियां मुशर्रफ' कहा।

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सिर्फ अमित शाह ही नहीं बल्कि 19 अप्रैल 2014 को भारतीय जनता पार्टी के नेता गिरिराज सिंह ने झारखंड के देवगढ़ में एक चुनावी जनसभा में कहा था कि जो लोग प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पाकिस्तान जाना पड़ेगा। गिरिराज सिंह ने इस रैली में उन लोगों को निशाने पर लिया था, जो नरेंद्र मोदी का विरोध कर रहे थे। उन्होंने रैली में कहा था कि ऐसे लोग पाकिस्तान की ओर देख रहे हैं और ऐसे लोगों की जगह भारत में नहीं बल्कि पाकिस्तान में है।

2017 में गुजरात में हो रहे चुनावों के दौरान वर्तमान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भी पाकिस्तान का जिक्र किया था। विजय रूपाणी ने अपने गुजरात के आणंद में चुनाव प्रचार के दौरान कहा था, अगर कांग्रेस गुजरात में चुनाव जीत गई तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे। 2017 के चुनाव में कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर के घर पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ मीटिंग की साजिश रचे जाने का मुद्दा बहुत ज्यादा गर्म आया था।

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इसी तरीके से पिछले साल बिहार में हुए चुनावों में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पाकिस्तान को लेकर काफी सख्त लहजे में अपनी चुनावी रैली में लोगों को संबोधित किया था। दरभंगा में हुई रैली में राजनाथ सिंह ने भीड़ को भारत-पाकिस्तान से जोड़ते हुए कहा था कि पाकिस्तान गिलगित और बालटिस्तान समेत पूरा पीओके हमारा है।

लखनऊ विश्वविद्यालय में मास कम्युनिकेशन विभाग के प्रमुख और राजनैतिक विश्लेषक प्रोफ़ेसर मुकुल श्रीवास्तव कहते हैं, दरअसल हमारा देश सीमा पार से होने वाले आतंकवाद से बहुत ज्यादा प्रभावित है। जब-जब अपने लोगों को ऐसे दुश्मन देशों के बारे में बताया जाता है, तो निश्चित तौर पर भीड़ भावनात्मक रूप से संबोधन करने वाले की ओर जुड़ जाती है। यह भीड़ जब चुनावी जनसभा में होती है, तो इसी भीड़ की आने वाले चुनावों में वोट के रूप में तब्दील होने की गुंजाइश बहुत ज्यादा बनी रहती है। यही वजह है कि राजनीतिक पार्टियां ज्यादा से ज्यादा लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए पड़ोसी दुश्मन देश पाकिस्तान का जिक्र करती रहती हैं।

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