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असम में खिला कमल: फिर सही बैठा बहुसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण का दांव
Mon, 03 May 2021 08:56 AM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 03 May 2021 08:56 AM IST
सार
- एनआरसी के विरोध व विपक्षी एकजुटता के बावजूद भाजपा ने हासिल की जीत, बिस्व सरमा को कमान संभव
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नरेंद्र मोदी-सर्बानंद सोनोवाल (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
असम में भाजपा अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रही। पार्टी के अल्पसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण के समानांतर बहुसंख्यक वर्ग के समानांतर ध्रुवीकरण कराने की रणनीति एक बार फिर परवान चढ़ी है। करीब-करीब सभी विपक्षी दलों के एकजुट होने और एनआरसी पर गहरे असंतोष के बीच भाजपा की इस जीत को ऐतिहासिक माना जा सकता है। चर्चा है कि जीत में अहम भूमिका निभाने वाले राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री हिमंत बिस्व सरमा को इनाम के रूप में सीएम की कुर्सी मिल सकती है।
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गौरतलब है कि इस चुनाव में उतरने से पूर्व कांग्रेस ने बेहद सधी रणनीति अपनाई। भाजपा के खिलाफ मुस्लिम में व्यापक प्रभाव रखने वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अलावा बीपीएफ, भाकपा, माकपा समेत आठ दलों का विशाल गठबंधन बनाया। बीते विधानसभा और लोकसभा चुनाव में इन दलों का संयुक्त वोट भाजपा से 10 फ़ीसदी से भी ज्यादा था। इसके बावजूद भाजपा पुरानी सहयोगी अगप और नई सहयोगी यूपीपीएल के साथ पुराना प्रदर्शन दोहराने में कामयाब रही। खास बात यह है कि इस चुनाव में भी पार्टी के बीते चुनाव की तरह लोकसभा से भी अधिक मत हासिल हुए।
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जनता ने कांग्रेस गठबंधन को नकारा
नतीजे बताते हैं कि राज्य के मतदाताओं को कांग्रेस का खास तौर पर एआईयूडीएफ से गठबंधन रास नहीं आया। इस गठबंधन के कारण ही भाजपा के कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के आरोपों को मजबूती मिली। बीते चुनाव की तरह इस चुनाव में भी बहुसंख्यक वर्ग के मतों का अल्पसंख्यक वर्ग के मतों के ध्रुवीकरण के खिलाफ समानांतर ध्रुवीकरण हुआ।
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बिस्व सरमा की रणनीति
भाजपा ने इस बार किसी को सीएम पद का चेहरा नहीं बनाया। स्थानीय स्तर पर रणनीति बनाने का जिम्मा बिस्वसरमा को सौंपा और मोदी के चेहरे के सहारे चुनाव में उतरने की रणनीति बनाई। भले ही पार्टी ने बिस्व सरमा को सीएम पद का चेहरा नहीं बनाया, मगर अधिकतर टिकट उन्हीं की सिफारिश पर बांटे। आखिर में बीपीएफ की जगह यूपीपीएल से गठजोड़ की रणनीति भी बिस्व सरमा की थी।
सोनोवाल के पक्ष में संघ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मानना है कि सोनोवाल की बदौलत की भाजपा सत्ता में वापसी कर पाई है। ज्यादा संघ का एक मजबूत धड़ा सोनोवाल को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हैं। चुनाव में नेतृत्व ने सोनोवाल को चेहरा बनाने से परहेज किया था। इसके बाद से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी इस बार सोनोवाल सरकार के वरिष्ठ मंत्री हिमंत बिस्व सरमा को नई सरकार की कमान दे सकती है।