Bihu Festival: दो विश्व कीर्तिमान के साक्षी बने पीएम नरेंद्र मोदी, बोले- दिल और आत्मा का त्योहार रंगाली बिहू
प्रधानमंत्री इस विश्व रिकॉर्ड के गवाह बनें, जहां 11,304 बिहू नासनियों और ढोलियों ने हिस्सा लिया। इससे पहले एक साथ इस तरह का बिहू नृत्य कहीं नहीं हुआ। 2548 धुलिया ने इसमें हिस्सा लिया। इससे पहले का जो रिकॉर्ड था 1356 ढोल का, उसे आज हमारे युवाओं ने तोड़ दिया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि बिहू पर्व सिर्फ संस्कृति का उत्सव मात्र नहीं है। यह पर्व सबको जोड़ने और साथ मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है। रंगाली बिहू और बोहाग बिहू की यही साक्षात भावना है। असम वासियों के लिए दिल और आत्मा का त्योहार है रंगाली बिहू। यह हर प्रकार की खाई को पाटता है, हर भेद को मिटाता है। वे गुवाहाटी में सरुसजाई मैदान में असमिया बिहू नृत्य के गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के मौके पर बोल रहे थे।
प्रधानमंत्री इस विश्व रिकॉर्ड के गवाह बनें, जहां 11,304 बिहू नासनियों और ढोलियों ने हिस्सा लिया। इससे पहले एक साथ इस तरह का बिहू नृत्य कहीं नहीं हुआ। 2548 धुलिया ने इसमें हिस्सा लिया। इससे पहले का जो रिकॉर्ड था 1356 ढोल का, उसे आज हमारे युवाओं ने तोड़ दिया। आज 2548 ढोलियों ने ढोल बजाकर भी विश्व कीर्तिमान कायम किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, यह मानव और प्रकृति के बीच तालमेल का उत्तम प्रतीक है। इसलिए बिहू को शाब्दिक अर्थ से कोई नहीं समझ सकता। इसे समझने के लिए भानवाओं और एहसासों की आवश्यकता होती है। यही भाव बहनों-बेटियों के बालों में सजे कोपौ फूल से होता है, मेखेला चादस से होता है। यही एहसास विशेष व्यंजन से होता है। प्रधानमंत्री ने कहा, भारत की विशेषता ही यही है कि हमारी संस्कृति, हमारी परंपराएं, हजारों वर्षों से हर भारतवासी को जोड़ती आई है।
हमारे पीएम भी, आज का दिन भूल नहीं पाएंगे.....
शुक्रवार का दिन असम वासियों के लिए एक अविस्मरणीय दिन रहा। असम के लोग ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खुद आज के दिन को भूल नहीं पाएंगे। इसे एक ऐतिहासिक दिन कहा जा सकता है। सुबह से लेकर शाम तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर जगह असम वासियों का दिल जीता, दिल को छुआ। कई बार उनका पूर्वोत्तर प्रेम उमड़-उमड़ कर उनके शब्दों से और उनके चेहरे से झलक रहा था। खासतौर से असमिया संस्कृति और बिहू की व्याख्या प्रधानमंत्री ने की, वह आश्चर्यचकित करने वाला था। यह उनके पूर्वोत्तर के प्रति स्नेह को ही दिखाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध असमिया कवि ज्योति प्रसाद आगरवाला की एक कविता पढ़ने से पहले उपस्थित हजारों लोगों से पूछा- अगर मैं उच्चारण गलत करूं तो मांफ करेंगे ना। इस बात पर सरुसजाई मैदान पर उपस्थित हजारों बिहू नृत्य करने पहुंचे युवाओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। साथ ही मंच पर बैठे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस विनम्रता पर मंद-मंद मुस्काते रहे। उनकी विनम्रता, उनके शब्दों का जादू, उनका पूर्वोत्तर के प्रति प्यार को ही देखकर शायद, एक नासनी दूसरी से कह रही थी, हम तो आज का दिन भूल नहीं पाएंगे। शायद हमारे पीएम भी, आज का दिन भूल नहीं पाएंगे।
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