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अखिल गोगोई बोले: मेरे मामले ने यूएपीए और एनआईए अधिनियम के दुरुपयोग को साबित किया

Fri, 02 Jul 2021 08:30 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, गुवाहाटी।
पीटीआई, गुवाहाटी। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 02 Jul 2021 08:30 PM IST
सार

असम के विधायक अखिल गोगोई ने विशेष एनआईए अदालत द्वारा जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए सभी आरोपों से उन्हें बरी करने को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि उनका मामला सबूत है कि यूएपीए और एनआईए अधिनियम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है।

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assam : Akhil Gogoi said My case proved misuse of UAPA and NIA Act
अखिल गोगोई (फाइल फोटो) - फोटो : ट्विटर

विस्तार

असम के विधायक अखिल गोगोई ने विशेष एनआईए अदालत द्वारा जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए सभी आरोपों से उन्हें बरी करने को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि उनका मामला सबूत है कि यूएपीए और एनआईए अधिनियम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है।

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शिवसागर से निर्दलीय विधायक गोगोई ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआई) को भाजपा नीत केंद्र सरकार का 'राजनीतिक हथियार' करार देते हुए कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जिन्हें इन दो आतंकवाद रोधी कानूनों का कथित दुरुपयोग कर गिरफ्तार किया गया है।
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संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) विरोधी कार्यकर्ता गोगाई ने 567 दिनों के बाद हुई रिहाई के उपरांत पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा कि मेरा मामला गैर कानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम और एनआईए अधिनियम के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग को साबित करता है। यह फैसला उन लोगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा जिन्हें इन दो कानूनों का दुरुपयोग कर गिरफ्तार किया गया है।
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2019 में किया गया था गिरफ्तार
गोगोई को राज्य में सीएए विरोधी आंदोलन के समय हुई हिंसा में कथित भूमिका के आरोप में 12 दिसंबर 2019 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें बृहस्पतिवार को रिहा किया गया। उन्होंने कहा कि विशेष एनआईए अदालत का फैसला ऐतिहासिक है क्योंकि यह एनआईए का पर्दाफाश करता है जो सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की तरह 'राजनीतिक एजेंसी' बन गई है।

उन्होंने कहा कि यहां तक कि बृहस्पतिवार को भी एनआईए नए मामले दर्ज करना चाहती थी, लेकिन अपील के साथ जब वह अदालत गई तब तक फैसला आ चुका था। एनआईए द्वारा 29 जून को जमा अतिरिक्त आरोपपत्र पर गोगोई ने कहा कि मोहपाश, गो तस्करी और माओवादी शिविर में प्रशिक्षण के फर्जी आरोप लगाए गए।

मई में जेल से लिखी थी चिट्ठी 
रायजोर दल के प्रमुख गोगाई ने आरोप लगाया कि एनआईए ने आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) या भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने पर तुरंत जमानत देने की पेशकश की थी। इसी तरह के आरोप उन्होंने मई में जेल से लिखी चिट्ठी में भी लगाए थे।

उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने मुझे हिरासत में लिया तो केवल यह पूछा कि क्या मैं आरएसएस में शामिल होना चाहूंगा। एक बार भी उन्होंने ने माओवादियों से कथित संबंध के बारे में नहीं पूछा। मेरे सीआईओ डीआर सिंह ने कभी लाल विद्रोहियों (माओवादियों) के बारे में पहले कभी बात नहीं की। उन्होंने कहा कि अगर मैं आरएसएस में शामिल होता हूं तो 10 दिन के भीतर मुझे रिहा कर दिया जाएगा।

मंत्री बनने की पेशकश की
गोगोई ने कहा कि जब मैंने इसका नकारात्मक जवाब दिया, तब उन्होंने मुझे भाजपा में शामिल होने और मंत्री बनने की पेशकश की। मैंने उस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया। इस पर उन्होंने कहा कि मैं अगले 10 साल तक जेल में रहूंगा। उन्होंने कहा कि विशेष एनआईए अदालत का फैसला न्यायपालिका में 'अहम मोड़' है और यह दिखाता है कि 'कार्यपालिका का दबाव स्थायी नहीं होता।


गौरतलब है कि विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रंजल दास ने फैसले में टिप्पणी की कि 'घेराबंदी की बात करने' से देश की आर्थिक सुरक्षा को धमकी देने का संकेत नहीं मिलता या 'आतंकवादी कृत्य' नहीं है। गोगोई असम विधनसभा के पहले सदस्य हैं जिन्होंने जेल में रहते हुए चुनाव जीता और विधायक बने। राज्य विधानसभा के लिए हाल में चुनाव संपन्न हुए हैं।

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