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Odisha: जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की मरम्मत में जुटे ASI कर्मचारी, 46 साल बाद खोला गया था खजाना
Tue, 17 Dec 2024 10:52 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 17 Dec 2024 10:52 PM IST
सार
Odisha: राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि मरम्मत का काम दोपहर करीब एक बजे शुरू हुआ और शाम छह बजे तक जारी रहा। उन्होंने बताया, एएसआई ने जीर्णोद्धार का काम तीन माह में पूरा कर लेने का भरोसा दिलाया है लेकिन हमने उनसे इसमें तेजी लाने का अनुरोध किया है।
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पुरी जगन्नाथ मंदिर
- फोटो : ANI
विस्तार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने मंगलवार को ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। रत्न भंडार को करीब 46 साल बाद गत जुलाई में खोला गया था। एएसआई के मुताबिक, उसकी टीम मंदिर की पवित्रता का पूरा ख्याल रख रही है। एएसआई कर्मचारी सेवादारों की तरह पारंपरिक पोशाक पहनकर ही रत्न भंडार में दाखिल हो रहे हैं।
राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि मरम्मत का काम दोपहर करीब एक बजे शुरू हुआ और शाम छह बजे तक जारी रहा। उन्होंने बताया, एएसआई ने जीर्णोद्धार का काम तीन माह में पूरा कर लेने का भरोसा दिलाया है लेकिन हमने उनसे इसमें तेजी लाने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि दूसरे भोग मंडप (दोपहर साढ़े 12 बजे का अनुष्ठान) सम्पन्न होने के बाद ही काम शुरू होगा और पांच-छह घटे चलेगा।
हरिचंदन ने कहा कि 12वीं सदी के मंदिर के रत्न भंडार में होने वाले काम के दौरान के देवताओं के दैनिक अनुष्ठानों और भक्तों के दर्शन-पूजा में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। एएसआई की टीम को मंदिर के अंदर एक निश्चित बिंदु तक ही प्रवेश की अनुमति है। एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद डीबी गरनायक ने भी कहा कि मरम्मत कार्य में शामिल सभी कर्मचारी पारंपरिक पोशाकें पहनकर ही मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। उन्हें विशिष्ट पहचान पत्र मुहैया कराए गए हैं।
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शनिवार-रविवार को बंद रहेगा काम
गरनायक ने बताया कि एएसआई के तकनीकी कर्मचारी सीधे तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में काम कर रहे हैं। तकनीकी कोर समिति भी समय-समय पर निगरानी करती रहेगी। एएसआई अधिकारी ने कहा कि भक्तों की भीड़ को देखते हुए रत्न भंडार का जीर्णोद्धार शनिवार और रविवार तथा अन्य छुट्टियों के दिन नहीं किया जाएगा।
दोनों कक्षों का होगा जीर्णोद्धार
एएसआई की टीम मंदिर के खजाने की दीवारों से प्लास्टर हटाने से पहले मचान लगाएगी। फिर पूरे ढांचे को साफ करके लोहे के पुरानी बीम और टूटे पत्थरों की मरम्मत की जाएगी। रत्न भंडार के आंतरिक और बाहरी दोनों कक्षों की मरम्मत की जानी है। रत्न भंडार जगन्नाथ मंदिर के उत्तरी हिस्से में स्थित है। इसमें दो कक्ष हैं, जहां सदियों से भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के सोने और हीरे के आभूषण रखे हैं।
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राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि मरम्मत का काम दोपहर करीब एक बजे शुरू हुआ और शाम छह बजे तक जारी रहा। उन्होंने बताया, एएसआई ने जीर्णोद्धार का काम तीन माह में पूरा कर लेने का भरोसा दिलाया है लेकिन हमने उनसे इसमें तेजी लाने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि दूसरे भोग मंडप (दोपहर साढ़े 12 बजे का अनुष्ठान) सम्पन्न होने के बाद ही काम शुरू होगा और पांच-छह घटे चलेगा।
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हरिचंदन ने कहा कि 12वीं सदी के मंदिर के रत्न भंडार में होने वाले काम के दौरान के देवताओं के दैनिक अनुष्ठानों और भक्तों के दर्शन-पूजा में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। एएसआई की टीम को मंदिर के अंदर एक निश्चित बिंदु तक ही प्रवेश की अनुमति है। एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद डीबी गरनायक ने भी कहा कि मरम्मत कार्य में शामिल सभी कर्मचारी पारंपरिक पोशाकें पहनकर ही मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। उन्हें विशिष्ट पहचान पत्र मुहैया कराए गए हैं।
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शनिवार-रविवार को बंद रहेगा काम
गरनायक ने बताया कि एएसआई के तकनीकी कर्मचारी सीधे तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में काम कर रहे हैं। तकनीकी कोर समिति भी समय-समय पर निगरानी करती रहेगी। एएसआई अधिकारी ने कहा कि भक्तों की भीड़ को देखते हुए रत्न भंडार का जीर्णोद्धार शनिवार और रविवार तथा अन्य छुट्टियों के दिन नहीं किया जाएगा।
दोनों कक्षों का होगा जीर्णोद्धार
एएसआई की टीम मंदिर के खजाने की दीवारों से प्लास्टर हटाने से पहले मचान लगाएगी। फिर पूरे ढांचे को साफ करके लोहे के पुरानी बीम और टूटे पत्थरों की मरम्मत की जाएगी। रत्न भंडार के आंतरिक और बाहरी दोनों कक्षों की मरम्मत की जानी है। रत्न भंडार जगन्नाथ मंदिर के उत्तरी हिस्से में स्थित है। इसमें दो कक्ष हैं, जहां सदियों से भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के सोने और हीरे के आभूषण रखे हैं।