नागरिकता संशोधन विधेयक पर बोले ओवैसी- देश को ऐसे कानून से बचा लें गृह मंत्री
लोकसभा में एआईएमआईएम सांसद ने अकबरुद्दीन ओवैसी ने गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादास्पद बयान दिया, जिसके बाद सदन में हंगामा मच गया। ओवैसी ने कहा कि गृह मंत्री मुल्क को ऐसे कानून से बचा लें। मुस्लिम इसी देश का हिस्सा हैं। जिसपर शाह ने जवाब देते हुए कहा कि यह संविधान के खिलाफ नहीं है।
Om Birla,Lok Sabha Speaker to Asaduddin Owaisi: Please don't use such unparliamentary language in the house, this remark will be expunged from records. https://t.co/8IE32jZdpB
— ANI (@ANI) December 9, 2019विज्ञापन
उन्होंने लोकसभा में कहा, 'मैं आपसे (स्पीकर) और गृह मंत्री से अपील करता हूं इस देश को बचा लीजिए। मुस्लिम इसी देश का हिस्सा हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हो रहा है।' हैदराबाद सांसद ने शाह पर विवादित टिप्पणी की जिसे लेकर काफी हंगामा हुआ। जिसपर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करें। यह टिप्पणी रिकॉर्ड में शामिल नहीं होगा।
इसके बाद गृह मंत्री ने जबाव दिया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने सभी अप्रवासियों को नागरिकता प्रदान की थी। यह विधेयक संविधान के खिलाफ नहीं है। विपक्ष ने उन्हें बोलना नहीं दिया जिसपर उन्होंने कहा कि हमें पांच साल के लिए चुना है सुनना पड़ेगा। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं।
गृह मंत्री ने कहा, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, ईसाइयों, पारसियों और जैनों के साथ भेदभाव किया गया है। इसलिए यह विधेयक इन सताए हुए लोगों को नागरिकता देगा। साथ ही यह आरोप कि विधेयक मुस्लिमों के अधिकारों को छीन लेगा गलत है।
Union Home Minister Amit Shah in Lok Sabha on #CitizenshipAmendmentBill: Why do we need this Bill today? After independence, if Congress had not done partition on the basis on religion,then,today we would have not needed this Bill. Congress did partition on the basis of religion. pic.twitter.com/gYsfbdl8U1
— ANI (@ANI) December 9, 2019
विपक्ष पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा, 'हमें इस विधेयक की आखिर जरूरत क्यों पड़ी? स्वतंत्रता के बाद यदि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर विभाजन न किया होता तो आज हमें इस विधेयक को लाने की जरूरत नहीं पड़ती। कांग्रेस ने धर्म के आधार पर विभाजन किया था। विधेयक में मुस्लिम समुदाय का एक बार भी नाम नहीं है।'