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सुप्रीम कोर्ट की जयललिता को फटकार, आलोचनाओं का सामना करना सीखें
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 24 Aug 2016 03:50 PM IST
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जयललिता
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की सीएम जे जयलिलता को फटकार लगाई है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने तमिलनाडु की सीएम को कहा कि एक जननेता के तौर पर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना आना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की फटकार डीएमडीके चीफ विजयकांत की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान लगी जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दर्ज कराए गए मानहानि केस को रद्द करने की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा, 'तमिलनाडु सरकार से अलग किसी और राज्य ने स्टेट मशीनरी का ऐसा दुरुपयोग नहीं किया। सीएम के स्वास्थ्य पर रिपोर्टिंग करने मात्र से किसी पर मानहानि का केस नहीं लादा जा सकता।'
पिछले कुछ महीनों में कोर्ट ने यह महसूस किया कि राजनीतिक टूल के तौर पर मानहानि को इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने विजयकांत और उनकी पत्नी प्रेमलता के खिलाफ जारी गैरजमानती वॉरंट पर रोक लगा दी। सीएम जे जयललिता के खिलाफ टिप्पणी करने और राज्य के कामकाज पर सवाल उठाने पर विजयकांत और उनकी पत्नी के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। बताया जा रहा है कि विजयकांत के खिलाफ ही मानहानि के 12 केस दर्ज कराए गए।
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सु्प्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मानहानि केस का इस्तेमाल लोकतंत्र का गला घोंटने के लिए नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 22 सितंबर को अगली सुनवाई करेगा।
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कोर्ट ने कहा, 'तमिलनाडु सरकार से अलग किसी और राज्य ने स्टेट मशीनरी का ऐसा दुरुपयोग नहीं किया। सीएम के स्वास्थ्य पर रिपोर्टिंग करने मात्र से किसी पर मानहानि का केस नहीं लादा जा सकता।'
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पिछले कुछ महीनों में कोर्ट ने यह महसूस किया कि राजनीतिक टूल के तौर पर मानहानि को इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने विजयकांत और उनकी पत्नी प्रेमलता के खिलाफ जारी गैरजमानती वॉरंट पर रोक लगा दी। सीएम जे जयललिता के खिलाफ टिप्पणी करने और राज्य के कामकाज पर सवाल उठाने पर विजयकांत और उनकी पत्नी के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। बताया जा रहा है कि विजयकांत के खिलाफ ही मानहानि के 12 केस दर्ज कराए गए।
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सु्प्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मानहानि केस का इस्तेमाल लोकतंत्र का गला घोंटने के लिए नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 22 सितंबर को अगली सुनवाई करेगा।