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Arunachal: एयरगन सरेंडर अभियान को UNESCO के सम्मेलन में मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता, 2021 में शुरू हुई थी पहल

Tue, 14 Nov 2023 07:25 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 14 Nov 2023 07:25 PM IST
सार

Arunachal: अरुणाचल प्रदेश वन विभाग की वन्यजीव संरक्षण पहल 'एयरगन सरेंडर अभियान' को सोमवार को मलेशिया के सबा में बायोस्फीयर रिजर्व पर यूनेस्को के सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है।

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Arunachal's 'Airgun Surrender Abhiyan' receives international recognition
अरुणाचल के 'एयरगन सरेंडर अभियान' को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता - फोटो : X/Dr. DAMODHAR A.T., IFS

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश वन विभाग की वन्यजीव संरक्षण पहल 'एयरगन सरेंडर अभियान' को सोमवार को मलेशिया के सबा में बायोस्फीयर रिजर्व पर यूनेस्को के सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। 

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यह अभियान राज्य के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री मामा नातुंग के नेतृत्व में मार्च में 2021 में शुरू किया गया गया था, ताकि पक्षियों और वन्यजीवों के शिकार को रोका जा सके और वन्यजीवों की हत्या के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। 

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मंत्री की ओर से देहंग-देबांग बायोस्फीयर रिजर्व के निदेशक डॉ. दामोधर ने पुरस्कार प्राप्त किया। राज्य के वन अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि उन्हें मलेशिया के पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन और जलवायु परिवर्तन मंत्री निक नजमी निक अहमद से यह मान्यता मिली। 

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डॉ. दामोधर को पर्यावरण, वन औ जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से देश की रिपोर्ट पेश करने और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सफलता की कहानी को साझा करने के लिए भारत से प्रतिनिधि के रूप में चुना गया था। यह अभियान पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के शिकार में उनके इस्तेमाल की जांच करने के लिए एयरगन और लाइसेंस प्राप्त बंदूकों के स्वैच्छिक आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित करता है।
 

कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन 17 मार्च, 2021 को पूर्वी कामेंग जिले के लुमदुंग में किया गया था, जहां 46 एयरगन को आत्मसमर्पण किया गया था, जिससे लुमदुंग अरुणाचल प्रदेश का पहला एयरगन-मुक्त गांव बन गया।
 

इसके बाद, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने राज्य के सभी जिलों में स्थानीय समुदायों, प्रशासनिक विभागों, गैर सरकारी संगठनों और समुदाय-आधारित संगठनों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाया, जिससे लोगों को एयरगन छोड़ने के लिए राजी किया जा सके।
 

अधिकारियों ने बताया कि समुदायों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के लोगों ने 2,400 से अधिक एयरगन और 9 लाइसेंस प्राप्त बंदूकों को स्वैच्छिक आत्मसमर्पण किया। इससे पहले, अभियान को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स से प्रशंसा मिली थी और 2021 में असम के सिलचर में आयोजित पूर्वोत्तर के वन मंत्रियों के छठे पूर्वोत्तर हरित सम्मेलन में सम्मानित किया गया था।

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