मिड डे मील योजना में चार हजार पदों पर फर्जी नियुक्ति का पर्दाफाश
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मिड डे मील योजना के नाम पर नियुक्ति में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। ठगों ने देशभर के दस लाख सरकारी स्कूलों को निशाना बनाया है। केंद्र सरकार के अपर सचिव के नाम पर इस योजना की निगरानी करने वाले अधिकारी पद के लिए चार हजार पदों पर महीनों पहले फर्जी विज्ञापन जारी हुआ था। आवेदकों को नियुक्ति पत्र तक जारी हो गए, लेकिन केंद्र व राज्य सरकारों को भनक तक नहीं लगी।
गुरुग्राम के आयूष अग्रवाल ने आरटीआई के जरिये इसकी सत्यता की जानकारी मांगी, तब जाकर पूरा मामला सामने आया। सरकार अब इसकी जांच करवाने जा रही है। एक अधिकारी ने बताया कि मिड डे मील योजना के तहत 12 सितंबर को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अपर सचिव अचिंत कुमार के नाम से चार हजार पदों पर नियुक्ति का फर्जी विज्ञापन जारी हुआ।
इसमें ठेके पर चीफ कंसलटेंट, सीनियर कंसलटेंट, प्राइमरी स्कूल सुपरवाइजर पद पर भर्तियों का जिक्र था। उसमें 90 हजार रुपये से 20 हजार रुपये प्रति माह वेतन का जिक्र किया गया था। उक्त पदों के लिए 20 व 21 अक्तूबर को चयनित आवेदकों का इंटरव्यू भी हुआ। चुने गए आवेदकों से पैसे लेकर उन्हें नियुक्ति पत्र भी थमा दिए गए।
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राज्यों को पत्र लिखकर किया सचेत
फर्जी विज्ञापन के गोरखधंधे का खुलासा होते ही मंत्रालय में अफरातफरी मच गई, क्योंकि सरकार ने ऐसा कोई विज्ञापन निकाला ही नहीं था। अब सरकार इस मामले की जांच करवाने जा रही है। साथ ही विभिन्न राज्य सरकारों को पत्र लिख कर आगाह किया है कि यह फर्जी विज्ञापन था, सरकार कोई भर्ती नहीं कर रही है।
यूपी के सबसे ज्यादा आवेदकों को ठगा
यूपी के ठगे आवेदक ने मंत्रालय को फोन कर कहा कि मैं यूपी से हूं पर नियुक्ति पत्र हरियाणा के लिए जारी हुआ है। जबकि मुझे यूपी में ही नौकरी का वादा किया गया था। उसने नौकरी के बदले पैसे भी दिए थे। ऐसे ही बिहार और हरियाणा से भी कई आवेदकों के मंत्रालय के पास फोन आ रहे हैं।
यूपी में सबसे अधिक 450 सुपरवाइजर के पद पर आवेदन मांगे गए थे। जबकि हरियाणा में 132, पंजाब में 132, हिमाचल प्रदेश में 72, उत्तराखंड में 78, जम्मू-कश्मीर में 132, दिल्ली में 66 पद निकाले गए थे।
ठगों ने अपर सचिव के नाम का इस्तेमाल किया
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सरकार की सभी योजनाओं की अधिसूचना व विज्ञापन अपर सचिव स्तर के अधिकारी के नाम से ही जारी होते हैं। इसीलिए फर्जी विज्ञापन में उक्त अधिकारी के पद व नाम का इस्तेमाल किया गया, ताकि किसी को शक न हो।