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भारत-म्यांमार की सेनाओं में सहयोग से टूटी नगा विद्रोहियों की कमर, 60 उग्रवादी मुख्यधारा में आएंगे

Sun, 27 Dec 2020 03:47 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 27 Dec 2020 03:47 AM IST
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Around 60 Naga insurgents likely to join national mainstream
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल, अमर उजाला

पूर्वोत्तर के नगा विद्रोही संगठन एनएससीएन (के) के करीब 60 विद्रोही राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होंगे। सैन्य सूत्रों ने यह खुलासा करते हुए बताया है कि सीमावर्ती इलाकों में भारत और म्यांमार की सेनाओं के बीच बढ़ते सहयोग के चलते एनएससीएन (के) को अपनी गतिविधियां चलाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं।

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सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा बलों, सेना और सैन्य खुफिया एजेंसियों के प्रयासों से निकी सूमी की अगुवाई वाले गुट ने बीते माह ही सरेंडर करने का फैसला किया था।
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सूत्रों के मुताबिक, अब एक और गुट ने स्टारसन लामकांग की अगुवाई में सरेंडर का फैसला किया है। इसमें विद्रोही संगठन के 52 उग्रवादी हैं, जो सरेंडर के लिए नगालैंड के फेक जिले में सुरक्षा बलों से संपर्क में हैं। संगठन के आठ और विद्रोही भी मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं। उनसे बातचीत जारी है।
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इस कामयाबी से नगा शांति समझौतेे को बल मिलेगा। भारत-म्यांमार सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के सहयोग और प्रबंधन के चलते यह कामयाबी मिली है। इसके अलावा हाल ही में सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने म्यांमार का दौरा किया था। कूटनीतिक प्रयास भी किए गए थे।

अक्तूबर में ही जनरल नरवणे के साथ विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने म्यांमार का दौरा किया था, जिसमें भारत ने म्यांमार की नौसेना को हमलावर पनडुब्बी देने का फैसला किया था। इससे दोनों देशों में सैन्य और रक्षा संबंधों को और मजबूती मिली थी।


म्यांमार के साथ भारत की 1,640 किमी लंबी सीमा
म्यांमार भारत का रणनीतिक पड़ोसी है, जिसके साथ भारत की 1,640 किमी लंबी सीमा है। इसके दायरे में उग्रवाद प्रभावित नगालैंड और मणिपुर भी आते हैं। एनएससीएन (खपलांग) और दूसरे नगा विद्रोही संगठन अरसे से ग्रेटर नगालैंड की मांग करते रहे हैं। इसके दायरे में नगा प्रभावित असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश भी आते हैं।

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