जम्मू में आतंकियों के खिलाफ तेज होगा ऑपरेशन, सेना प्रमुख ने कहा- राज्यपाल शासन से नहीं पड़ेगा फर्क
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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खात्मे को चलाए जाने वाले ऑपरेशन आलआउट पर डीजीपी एस. पी. वैद के बाद सेना प्रमुख बिपिन रावत ने बयान दिया है। सेना प्रमुख ने संवाददाताओं से बातचीत में यह साफ किया कि राज्यपाल शासन से आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सेना के काम पर कोई राजनीतिक दखल नहीं दिया जा रहा है। हमनें केवल रमजान के दौरान (जम्मू-कश्मीर में) ऑपरेशन बंद किया था। लेकिन हमने देखा कि क्या हुआ?
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उल्लेखनीय है कि इससे पहले, इसी संबंध में डीजीपी एस. पी. वैद ने कहा कि आने वाले दिनों में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन और तेज होगा। आतंक फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। एसपी वैद ने यह भी कहा कि राज्यपाल के शासन में पुलिस को काम करने में काफी आसानी होगी। बता दें कि सीजफायर की समाप्ति के बाद पिछले दो दिनों में सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन में चार आतंकी ढेर किए हैं।
We only stopped our operations during Ramzan. But, we saw what happened. The imposing of Governor's rule will not affect our operations. Our operations will go on like they used to. We don't face any political interference: General Bipin Rawat, Army chief pic.twitter.com/aOv0saHNE4
— ANI (@ANI) June 20, 2018
गौरतलब है कि कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पर राजनीति भारी पड़ रही थी। रमजान में एकतरफा सीजफायर करने का फैसला भारी पड़ा। आतंकी सेना और पुलिस पर हावी हो गए थे। जिसके बाद ऑपरेशन आलआउट फिर से जारी रखने के निर्देश दिए गए।
सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस को चार दिन पहले ही बोल दिया गया था कि आतंकियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करें। इसमें कोई राजनीति हस्तक्षेप नहीं होगा। तीन दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एकतरफा सीजफायर को वापिस कर लिया। उसके अगले ही दिन सेना प्रमुख रियासत के दौरे पर पहुंच गए। ऑपरेशन आलआउट में कहीं न कहीं राजनीतिक हस्तक्षेप एक बड़ा रोड़ा बन गया था। वहीं, रक्षा विशेषज्ञों की भी राय है कि अब सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए। एकतरफा सीजफायर का आखिर नतीजा क्या हुआ।